प्रेस विज्ञप्ति
*खेतों में लौटने लगी हरियाली, रोपा-बुआई का दौर अब समाप्ति की ओर*
लगभग एक माह पूर्व शुरू हुआ खरीफ सीजन का खेती-किसानी से जुड़ा बुआई, रोपा एवं रोपाई का कार्य अब अंतिम चरण में पहुंच गया है। क्षेत्र के अधिकांश किसानों ने अपने खेतों में धान की फसल लगाने का कार्य लगभग पूरा कर लिया है। खेतों में लहलहाते धान के पौधे अब ग्रामीण अंचल में हरियाली की सुंदर तस्वीर प्रस्तुत कर रहे हैं।भरुवाडीह कला के कृषक गेंदलाल साहू ने बताया कि वे इस वर्ष लगभग 8 एकड़ कृषि भूमि में रोपा पद्धति से धान की खेती कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि रोपा लगाने का कार्य लगभग पूरा हो चुका है और अब खेतों में फसल की देखभाल, खाद-उर्वरक तथा खरपतवार नियंत्रण जैसे कार्यों पर किसानों का ध्यान केंद्रित रहेगा। समय पर वर्षा होने से खेती-किसानी के कार्यों को भी काफी गति मिली है।
वहीं भरुवाडीह कला के कृषक धीरेंद्र कुमार वर्मा ने कहा कि धान की खेती किसानों के लिए केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण आधारशिला है। लगभग एक माह से किसान लगातार खेतों में मेहनत कर रहे हैं और रोपा-बुआई का कार्य अब समाप्ति की ओर पहुंचने से किसानों को कुछ राहत मिली है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष मौसम का साथ मिलने और समय पर कृषि कार्य आगे बढ़ने से किसानों में अच्छी फसल की उम्मीद जगी है। अब किसान फसल की नियमित निगरानी करते हुए बेहतर उत्पादन के लिए आवश्यक कृषि कार्यों में जुटेंगे। कृषि कार्यों का यह चरण समाप्त होने के साथ ही गांवों में खेती-किसानी की व्यस्तता का एक महत्वपूर्ण दौर पूरा हो रहा है। खेतों में रोपे गए धान के पौधों के बढ़ने के साथ आने वाले दिनों में क्षेत्र की कृषि भूमि और अधिक हरी-भरी नजर आने की उम्मीद है।