*मां शीतला की महिमा पर केंद्रित छत्तीसगढ़ी प्रबंध काव्य 'मउंहा रुख के सीतला दाई' का भव्य विमोचन, दल्ली राजहरा की लोक-संस्कृति को मिली साहित्यिक पहचान*
*मां शीतला की महिमा पर केंद्रित छत्तीसगढ़ी प्रबंध काव्य 'मउंहा रुख के सीतला दाई' का भव्य विमोचन, दल्ली राजहरा की लोक-संस्कृति को मिली साहित्यिक पहचान*
दल्ली राजहरा के पुराना बाजार क्षेत्र के महुआ चौक में विराजमान मां शीतला की महिमा, लोककथाओं और दल्ली राजहरा की सांस्कृतिक विरासत को साहित्य में सहेजने की एक अनूठी पहल हुई है। रविन्द्र ग्रंथागार (बंगाली क्लब), टाउनशिप में बंग समाज दल्ली राजहरा द्वारा आयोजित गरिमामय समारोह में साहित्यकार दीपक कुमार मण्डल द्वारा रचित छत्तीसगढ़ी प्रबंध काव्य ‘मउंहा रुख के सीतला दाई’ का विधिवत विमोचन किया गया।
पुस्तक का विमोचन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि तोरण लाल साहू (नगर पालिका अध्यक्ष दल्ली राजहरा) तथा विशेष अतिथियों रामेश्वर साहू (भाजपा मंडल अध्यक्ष दल्ली राजहरा), छत्तीसगढ़ रत्न से सम्मानित वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. शिरोमणि माथुर, प्रथम नगर पालिका अध्यक्ष पुरोबी वर्मा, बंग समाज दल्ली राजहरा के मुख्य सचिव कनक बैनर्जी, हस्ताक्षर साहित्य समिति दल्ली राजहरा के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ साहित्यकार संतोष कुमार ठाकुर ‘सरल’, संग समाज के संरक्षक एवं लेखक गगन पांड्या तथा काली बाड़ी के मुख्य सचिव मदन माइति के करकमलों से संपन्न हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के तिलक लगाकर स्वागत के साथ हुआ। इसके पश्चात अतिथियों ने लेखक दीपक कुमार मण्डल की काव्य कृति पुस्तक ‘मउंहा रुख के सीतला दाई’ का विमोचन किया।
*लोकआस्था और लोककथाओं को छत्तीसगढ़ी साहित्य में किया गया लिपिबद्ध*
विमोचन के पश्चात लेखक दीपक कुमार मण्डल ने पुस्तक की रचना की पृष्ठभूमि एवं उद्देश्य के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पुस्तक में दल्ली राजहरा के पुराना बाजार क्षेत्र के महुआ चौक में विराजमान मां शीतला माता की महिमा का वर्णन छत्तीसगढ़ी भाषा में पद्य शैली के माध्यम से किया गया है। पुस्तक में वर्ष 2012 में महुआ पेड़ में लगी आग से जुड़ी अलौकिक एवं अद्भुत घटना का भी कविता के माध्यम से वर्णन किया गया है। इसके साथ ही क्षेत्र के बुजुर्गों द्वारा कही-सुनी गई कहानियों, लोकप्रचलित कथाओं एवं किंवदंतियों को छत्तीसगढ़ी कविता के माध्यम से लिपिबद्ध किया गया है।
लेखक ने बताया कि पुस्तक लिखने का उद्देश्य केवल मां शीतला की महिमा को जन-जन तक पहुंचाना ही नहीं, बल्कि बुजुर्गों से सुनी गई लोककथाओं एवं किंवदंतियों को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित एवं संरक्षित करना भी है। पुस्तक का संपादन वरिष्ठ साहित्यकार शमीम अहमद सिद्दीकी ने किया है।
*अतिथियों ने लेखक को दी शुभकामनाएं*
विमोचन के पश्चात सभी अतिथियों ने पुस्तक की सराहना करते हुए लेखक दीपक कुमार मण्डल को उनकी प्रथम कृति के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। मुख्य अतिथि नगर पालिका अध्यक्ष तोरण लाल साहू ने पुस्तक के प्रकाशन एवं विमोचन पर लेखक को बधाई देते हुए महुआ चौक स्थित मां शीतला माता मंदिर के जीर्णोद्धार की दिशा में कार्य करने की बात कही।
कार्यक्रम का संचालन मुनमुन सिन्हा ने किया। कार्यक्रम का मार्गदर्शन पुरोबी वर्मा एवं बंग समाज दल्ली राजहरा द्वारा किया गया।
*पुस्तक के साथ अतिथियों को भेंट किया गया गुलाब का पौधा*
कार्यक्रम के अंतिम पड़ाव में अतिथियों को पुस्तक की प्रति के साथ एक-एक गुलाब का पौधा भेंट किया गया। इस अभिनव पहल के माध्यम से साहित्य के साथ प्रकृति एवं पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया गया।
पुस्तक के संबंध में वरिष्ठ लेखिका डॉ. शिरोमणि माथुर ने कहा कि जिस तरह दीपक मंडल ने बांग्ला भाषा होते हुए छत्तीसगढ़ की संस्कृति और परंपरा की धार्मिक मान्यता शीतला मां की बखान अपने इस काव्य कृति में किया गया है बहुत ही सराहनी प्रयास है क्योंकि अपने मातृभाषा के अलावा दूसरी भाषा में लिखना एक कठिन कार्य है जिसे दीपक कुमार मंडल ने बहुत ही सरलता के साथ पूरा किया है।
पुरोबी वर्मा ने पुस्तक के संबंध में बताया कि जिस तरह महुआ रुख के शीतला दाई पुस्तक में 1960-70 के दशक में हुई महामारी के रूप में शीतला माता (छोटी चेचक) जब दल्ली राजहरा में छोटे बड़े बुजुर्ग महिला पुरुष सभी के ऊपर विराजमान हुआ था तब सभी वर्ग बहुत चिंतित थे कोई बैद तो कोई डॉक्टर के पास इलाज के लिए जाते थे कि किसी ना किसी तरह से व्यक्ति की जीवन बच जाए बैगा बैद के जड़ी बूटी और माँ शीतला के कृपा से किसी तरह लोगों की जान बची थी। तब एक विशाल पहुँचानी का कार्यक्रम यहां पर हुआ था जैसे कई स्मृति को इस पुस्तक में संजोया गया है।
पुस्तक में शीतला मां की महिमा के संबंध में एक घटनाक्रम का भी उल्लेख किया गया है जिसमें बताया गया है कि गणेश पक्ष में रामधुनी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था जिसमें एक गांव को विजेता घोषित किया गया। वहीं से एक व्यक्ति शराब के नशे में था माता सेवा का कार्यक्रम चल रहा था जब दूसरे व्यक्ति के ऊपर मां विराजमान हुई। तब वह व्यक्ति भी शराब के नशे में मां का मजाक करते हुए उसी तरह का स्वांग करने लगा। लोग समझ रहे थे कि उसके ऊपर देव विराजमान हो गया है लेकिन वह व्यक्ति शराब के नशे में उसी तरह का कृत्य करने लगा लेकिन मां सब समझ गई थी। अचानक वह व्यक्ति गिर पड़ा बहुत मुश्किल से मां की कृपा से उसकी स्मृति वापस लौटी बैगा के बहुत अनुनय विनय के बाद मां की कृपा से वह ठीक हो पाया।
कहते हैं मां की महिमा तो अपरंपार है छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचल में हर गांव में मां शीतला का विशेष स्थान है किसी भी शुभ कार्य शुरुआत करने से पहले मां शीतला को नमन करना प्रणाम करना अति आवश्यक माना जाता है। आज भी ग्रामीण आंचल में शादी विवाह या शुभ कार्य से पहले मां शीतला को प्रणाम कर उन्हें आशीर्वाद लेने की परंपरा है। जो की दल्ली राजहरा के ऐतिहासिक महुआ रूख के शीतला दाई की पुस्तक में झलकती है।
40 वर्षीय दीपक कुमार मंडल द्वारा लिखित और सरस्वती बुक्स भिलाई के द्वारा प्रकाशित पुस्तक छत्तीसगढ़ के संस्कृति मां शीतला की महिमा और दल्ली राजहरा के पुराना बाजार क्षेत्र के महुआ वृक्ष पर केंद्रित कलाकृति बहुत ही लाजवाब है।
‘मउंहा रुख के सीतला दाई’ के विमोचन के साथ दल्ली राजहरा की लोकआस्था, मां शीतला के प्रति श्रद्धा, स्थानीय लोककथाओं और बुजुर्गों से चली आ रही मौखिक परंपराओं को छत्तीसगढ़ी साहित्य में संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल हुई है। यह कृति आने वाली पीढ़ियों को क्षेत्र की लोक-संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का प्रयास भी है।
*कार्यक्रम में ये रहे उपस्थित*
कार्यक्रम में मुख्य एवं विशेष अतिथियों के अलावा साहित्यकारों एवं गणमान्य नागरिकों के रूप में आर.के. माने, शंकर गुहा नियोगी गांधी विद्या मंदिर एवं प्राचार्य साईं शिशु मंदिर, राकेश देवांगन (एल्डरमेन नगर पालिका दल्लीराजहरा), समर्थ लखानी (भाजपा मंडल मंत्री), राहुल साहू (भाजयुमो नगर मंत्री), जे.आर. महिलांगे, घनश्याम पारकर, गोविन्द कुट्टी पणिकर, शमीम अहमद सिद्दीकी, गौतम बोस, गौतम बेरा, गौतम माइति, अशोक आइच, जयंत चक्रवर्ती, सजल राय, सुरेश सरकार, दीपा माइति, मिठु कारफा, बबली विश्वकर्मा, सिमरन पटेल, सुरेश ठगेल, ललित गेडाम, संजीवन यादव, रोशन यादव, हेमन्त साहू, भोज देवांगन, अनीता मण्डल, दीपिका भास्कर, दिशा भास्कर, अभिलव भास्कर, निशा मण्डल, हृदिका मण्डल एवं जोयल यादव सहित अनेक ईष्ट-मित्र एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।