*सोंहपुर में काव्य-कृति ‘भाव तरंगिणी’ का भव्य विमोचन एवं कवि सम्मेलन सम्पन्न*
*साहित्य, संस्कार और संस्कृति के संगम ने सोंहपुर को बनाया अविस्मरणीय साहित्यिक तीर्थ*
*सोंहपुर (गुरूर)* रचना साहित्य समिति, गुरूर के वरिष्ठ साहित्यकार एवं कवि *श्री पंचराम हिरवानी* के जन्मदिन के पावन अवसर पर उनकी प्रथम काव्य-कृति *भाव तरंगिणी* का भव्य विमोचन एवं विराट कवि सम्मेलन *08 अगस्त 2026, शनिवार* को दोपहर 12 बजे से *बाजार चौक, सोंहपुर (गुरूर)* में विशाल जनसमुदाय की गरिमामयी उपस्थिति में सम्पन्न हुआ। साहित्य, लोकसंस्कृति, पारिवारिक संस्कार और आत्मीयता से ओतप्रोत इस आयोजन ने छोटे से गाँव सोंहपुर को एक दिन के लिए साहित्यिक उत्सव की राजधानी में परिवर्तित कर दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ *माँ भगवती की पूजा-अर्चना एवं दीप प्रज्ज्वलन* के साथ हुआ। हिरवानी परिवार के बच्चों द्वारा प्रस्तुत संगीतमय स्वागत-गान, वंदना एवं भजन ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। अतिथियों का *चंदन-तिलक, बैच, शाल, श्रीफल एवं स्मृति-चिह्न* भेंट कर आत्मीय एवं गरिमापूर्ण स्वागत-सम्मान किया गया।
समारोह के *मुख्य अतिथि राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित सेवानिवृत्त प्राचार्य, वरिष्ठ साहित्यकार एवं कवि श्री सीताराम साहू ‘श्याम’* थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता *श्री जगदीश देशमुख*, वरिष्ठ साहित्यकार एवं प्रदेश अध्यक्ष, श्री तुलसी मानस प्रतिष्ठान, छत्तीसगढ़ ने की।
समारोह में विशिष्ट अतिथियों के रूप में *डॉ. अशोक आकाश*, पूर्व जिला समन्वयक, छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग एवं अध्यक्ष, मधुर साहित्य परिषद, जिला बालोद; *सुप्रसिद्ध लोक गायिका सुश्री कविता वासनिक*, अनुराग धारा, राजनांदगाँव; *श्री जी.के. साहू*, सेवानिवृत्त प्राचार्य, अध्यक्ष पेंशनर समाज, जिला बालोद एवं उपाध्यक्ष, रचना साहित्य समिति, गुरूर; *श्री डी.आर. गजेन्द्र*, सेवानिवृत्त विकासखंड शिक्षा अधिकारी एवं अध्यक्ष, रचना साहित्य समिति, गुरूर तथा *श्रीमती सीमा साहू*, सरपंच, ग्राम पंचायत सोंहपुर उपस्थित रहीं।
कार्यक्रम में अंचल की विभिन्न साहित्यिक संस्थाओं की उल्लेखनीय सहभागिता रही। इनमें *रचना साहित्य समिति–गुरूर, चिन्हारी साहित्य समिति–गुरूर, प्रेरणा साहित्य समिति–बालोद, सरस साहित्य समिति–गुंडरदेही, मधुर साहित्य परिषद–डौंडीलोहारा, हस्ताक्षर साहित्य समिति–दल्लीराजहरा, राष्ट्रीय कवि संगम जिला–बालोद, जिला हिंदी साहित्य समिति–धमतरी, नवदीप साहित्य समिति–अर्जुन्दा, शारदा साहित्य समिति–निकुम तथा वनांचल साहित्य समिति–मोहला-मानपुर* के साहित्यकारों की उपस्थिति ने समारोह को व्यापक साहित्यिक आयाम प्रदान किया।
अतिथियों के स्वागत एवं सम्मान के पश्चात वरिष्ठ साहित्यकार *श्री पंचराम हिरवानी की काव्य-कृति ‘भाव तरंगिणी’ का विधिवत विमोचन* किया गया। काव्य-संग्रह की रचनात्मक विशेषताओं और भाव-संपदा पर प्रकाश डालते हुए मुख्य अतिथि *श्री सीताराम साहू ‘श्याम’* ने कृति की विविध रचनाओं की सार्थक व्याख्या की। उन्होंने अपनी चर्चित गीत-रचना *बूझो-बूझो गोरखना अमृत बानी* की सुमधुर प्रस्तुति देकर श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया।
वरिष्ठ साहित्यकार *डॉ. अशोक आकाश* ने ‘भाव तरंगिणी’ की साहित्यिक समीक्षा करते हुए कहा कि पिता *श्री पंचराम हिरवानी* की रचनाओं को उनके पुत्र *श्री हेमंत राम हिरवानी* द्वारा संकलित एवं प्रकाशित कराना केवल साहित्यिक संरक्षण का कार्य नहीं, बल्कि पिता के प्रति पुत्र के प्रेम, सम्मान और कर्तव्यबोध की *अनुकरणीय अभिव्यक्ति* है।
कार्यक्रम के अध्यक्ष *श्री जगदीश देशमुख जी* ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में ‘भाव तरंगिणी’ की पंक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज के समय में जब परिवारों में बिखराव और टकराव की स्थितियाँ दिखाई देती हैं, ऐसे दौर में भी किसी परिवार का संगठित रहना, संस्कारों को जीवित रखना और संस्कृति का संवाहक बनकर समाज के समक्ष उदाहरण प्रस्तुत करना अत्यंत सराहनीय है। उन्होंने हिरवानी परिवार के इस प्रयास को सामाजिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया।
समारोह में उपस्थित सभी अतिथियों एवं साहित्यकारों के उद्बोधन *सारगर्भित, समाजोपयोगी एवं प्रेरणादायी* रहे। सुप्रसिद्ध लोक गायिका *सुश्री कविता वासनिक* ने अपने सुमधुर छत्तीसगढ़ी लोकगीत *अइसन भोले बाबा ला कैसे मनाओं मेहं* की प्रस्तुति से समूचे वातावरण को लोकमय कर दिया। उनकी गायकी पर श्रोता भाव-विभोर हो उठे और यह संगीतमय संध्या सोंहपुर के लिए एक अविस्मरणीय स्मृति बन गई।
कार्यक्रम का प्रभावी एवं सरस संचालन *राष्ट्रीय कवि संगम, जिला बालोद के अध्यक्ष एवं कवि श्री भारत बुलंदी* ने किया। भोजन के पश्चात अंचल के विभिन्न साहित्यिक संस्थाओं से पधारे कवियों एवं साहित्यकारों ने जन्मदिन के अवसर पर *श्री पंचराम हिरवानी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ* प्रेषित करते हुए अपनी श्रेष्ठ रचनाओं का काव्य-पाठ किया। कविता, गीत, गजल एवं साहित्यिक प्रस्तुतियों का यह क्रम देर शाम से रात्रि तक चलता रहा और श्रोताओं ने देर रात तक साहित्यिक रसास्वादन किया।
कार्यक्रम का समापन *रचना साहित्य समिति, गुरूर के अध्यक्ष श्री डी.आर. गजेन्द्र* के सारगर्भित अंतिम उद्बोधन एवं आभार प्रदर्शन के साथ हुआ।
*विद्यार्थियों को साहित्य से जोड़ने की अभिनव पहल*
इस साहित्यिक आयोजन की एक और उल्लेखनीय पहल यह रही कि *08 अगस्त की सुबह सोंहपुर स्थित हाई स्कूल, माध्यमिक विद्यालय, प्राथमिक विद्यालय एवं सरस्वती शिशु विद्यालय* में सपरिवार पहुँचकर विद्यार्थियों को *कापी, पेन एवं बालोपयोगी साहित्य* भेंट किया गया तथा उन्हें कवि सम्मेलन में सहभागिता के लिए आमंत्रित किया गया। साहित्यकार श्री पंचराम हिरवानी की इस पहल ने जन्मदिन समारोह को सामाजिक सरोकार और भावी पीढ़ी में साहित्यिक चेतना के संवर्धन से जोड़ दिया।
इस प्रकार ‘भाव तरंगिणी’ का विमोचन समारोह केवल एक काव्य-कृति के प्रकाशन का अवसर न रहकर साहित्य, संस्कार, लोककला, पारिवारिक एकजुटता और सामाजिक सरोकारों का सुंदर संगम बन गया। सोंहपुर की धरती पर सम्पन्न यह साहित्यिक आयोजन लंबे समय तक साहित्यप्रेमियों और ग्रामवासियों की स्मृतियों में अंकित रहेगा।