*बारिश के साथ बढ़ा सर्पदंश का खतरा, डॉ. टी के सिन्हा की अपील - डरें नहीं, तुरंत अस्पताल पहुंचें*
*दल्ली राजहरा।*
वर्षा ऋतु के आगमन के साथ ही जिले में सर्पदंश की घटनाओं की आशंका बढ़ गई है। इसको लेकर नागरिकों से विशेष सतर्कता बरतने की अपील करते हुए डॉ. टी के सिन्हा(B.A.M.S.{NCISM} ) ने कहा है कि सर्पदंश एक चिकित्सा आपातकाल है। समय पर डॉक्टर से उपचार मिलने पर मरीज की जान बचाई जा सकती है।
डॉ. सिन्हा ने बताया कि मानसून में सांपों के बिलों में पानी भर जाने के कारण वे सुरक्षित स्थान की तलाश में खेत, घर, गोठान, भूसे और लकड़ी के ढेर तथा बस्तियों की ओर आ जाते हैं। धान रोपाई और कृषि कार्य के दौरान इंसानों से संपर्क बढ़ने से भी सर्पदंश की घटनाएं होती हैं।
उन्होंने बताया कि यह समय सांपों के अंडे देने का भी होता है, इसलिए वे सुरक्षित जगह खोजते हैं। इसके अलावा घरों के आसपास कीड़े-मकोड़े, मेंढक और चूहों की संख्या बढ़ने से उन्हें भोजन की तलाश में घरों तक आना पड़ता है।
*सर्पदंश से बचाव के उपाय*
डॉ. सिन्हा ने नागरिकों से कुछ जरूरी सावधानियां बरतने को कहा है:
1. घरों के आसपास सफाई रखें, झाड़ियां और घास हटाएं।
2. लकड़ी, ईंट और भूसे का ढेर घर से दूर रखें और चूहों को नियंत्रित करें।
3. दरवाजे-खिड़कियों की दरारें बंद करें।
4. बाहर निकलते समय खासकर रात में गमबूट और दस्ताने पहनें।
5. घास या लकड़ी उठाने से पहले डंडे से जांच लें, झाड़ियों में बिना देखे हाथ न डालें।
6. रात में टॉर्च लेकर चलें और नंगे पैर न निकलें।
7. बच्चों को अंधेरे में अकेला न भेजें।
8. जमीन पर सोने से बचें और मच्छरदानी का उपयोग करें।
*सर्पदंश होने पर क्या करें और क्या न करें*
डॉ. सिन्हा ने कहा कि सर्पदंश होने पर घबराएं नहीं। मरीज को शांत रखें और उसे चलने-फिरने से रोकें। काटे गए अंग को हृदय से नीचे और स्थिर रखें। यदि संभव हो तो सांप का रंग और आकार याद रखें, लेकिन उसे पकड़ने या मारने का प्रयास बिल्कुल न करें।
उन्होंने अंधविश्वास से बचने की सलाह देते हुए कहा कि झाड़-फूंक में समय बर्बाद न करें। काटे गए स्थान को ब्लेड से न काटें, न ही जहर चूसने का प्रयास करें। घाव पर बहुत कसकर रस्सी न बांधें और न ही मिट्टी, हल्दी, गोबर, तेल या कोई रसायन लगाएं। मरीज को शराब या कोई नशा भी न दें। बिना एक पल गंवाए डॉक्टर से संपर्क करें।
*पहचानें ये लक्षण*
डॉ. सिन्हा ने सर्पदंश के सामान्य लक्षण भी बताए। इनमें काटे स्थान पर दर्द और सूजन, दो दांतों के निशान, पलकों का झुकना, बोलने-निगलने में कठिनाई, सांस लेने में परेशानी, उल्टी, चक्कर, कमजोरी, रक्तस्राव या बेहोशी शामिल हैं। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि मरीज को सोने न दें और लगातार उससे बात करते रहें।
डॉ सिन्हा ने नागरिकों से अपील की है कि बरसात के मौसम में अतिरिक्त सावधानी बरतें और किसी भी संदिग्ध स्थिति में तुरंत नजदीकी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र पहुंचें