रिपोर्टर रोहित वर्मा
खरोरा
*श्रीकृष्ण-रूक्मिणी विवाह प्रसंग सुन भावविभोर हुए श्रोता, पुष्पवर्षा कर गाए मंगल गीत*
खरोरा
ग्राम केशला के
प्रभात फेरी चौक में केशलामें समस्त देवांगन परिवार की ओर से आयोजित हो रही भव्य संगीतमय श्रीमद् भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ सप्ताह के छठवें दिवस सोमवार को कथावाचक भागवत पंडित लक्ष्मीकांत उपाध्याय रायपुर वाले ने कथा प्रसंग में पवित्र व्यास गद्दी से द्वारिका प्रवेश , जरासंघ वध, फूल की होली गोपी गीत युगल गीत कंस वध और , रुक्मणी विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा व्यास ने कहा कि, हमारा मन ही मथुरा है और यह तन ही गोकुल है। यदि भगवान को पाना चाहते हो तो मन को मथुरा बना लो।
जिसका मन पवित्र हो जाता है वह मथुरा बन जाता है। कार्यक्रम के दौरान कलाकारों द्वारा कृष्ण-रुक्मणी विवाह से जुड़ी मनोहारी झांकी प्रस्तुत की गई। जिसे देख पूरा पंडाल श्रीकृष्ण के जयकारे से गुंजायमान हो उठा। इस दौरान भजन गीतों के सुरों में सभी श्रोता झूमने लगे। कथा व्यास ने कहा कि भगवान पर अटूट विश्वास होना चाहिए, यदि अटूट विश्वास है तो भगवान हर स्थिति में अपने भक्तों की रक्षा करते हैं। इस दौरान श्रीकृष्ण-रूक्मिणी का वेश धारण किए बाल कलाकारों पर कथा श्रवण करने आए भागवत प्रेमियों ने जमकर पुष्प वर्षा की। साथ ही विवाह के मंगल गीत गाते हुए नृत्य भी किए। इस मौकें पर कृष्ण-रूक्मिणी विवाह की आकर्षक झांकी ने श्रद्वालुओं का मन मोह लिया।
तो वहीं संगीतमय कृष्ण भजनों पर रसिक श्रोताओं ने खूब ठुमके लगाए। कथा के मध्य भगवान श्रीकृष्ण की धूमधाम के साथ बारात निकाली गई। बारात में सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु बाराती बनकर झूमते नाचते हुए कथा पंडाल पहुंचे। इस दौरान भक्त भगवान श्री कृष्ण की महिमा पर आधारित भजनों की मीठी तान पर थिरकते रहे। इस अवसर पर वरमाला धूमधाम से संपन्न हुआ। श्रद्वालुओं ने श्रीकृष्ण और रूक्मिणी के पैर धोकर पूजा-अर्चना की और मंगला आरती गाकर विवाह संपन्न कराया। वहीं भगवान को उपहार भी भेंट किए। इस दौरान श्रद्धालुओं ने नृत्य करते हुए जयकारे लगाए तो माहौल धर्ममय हो गया।
पंडाल में सारा जनमानस भाव विभोर होकर झूम उठे। कथा के दौरान सजीव झांकियां भी सजाई गई थी। जो सभी को खूब आनंदित किया। कथा के दौरान भक्तिमय संगीत ने श्रोताओं को आनंद से परिपूर्ण किया। कृष्ण-रूक्मिणी की वरमाला पर जमकर फूलों की बरसात हुई। कथावाचक पंडित पंडित लक्ष्मीकांत उपाध्याय कृष्ण-रूक्मिणी विवाह प्रसंग पर बोलते हुए कहा कि, श्रीकृष्ण के साथ हमेशा देवी राधा का नाम आता है। भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी लीलाओं में यह दिखाया भी था कि राधा और वह दो नहीं बल्कि एक हैं, लेकिन देवी राधा के साथ श्रीकृष्ण का लौकिक विवाह नहीं हो पाया। देवी राधा के बाद भगवान श्रीकृष्ण की प्रिय देवी रूक्मिणी हुईं। रूक्मिणी और कृष्ण के बीच प्रेम कैसे हुआ इसकी बड़ी अनोखी कहानी है। इसी कहानी से प्रेम की नई परंपरा की शुरुआत भी हुई। देवी रूक्मिणी विदर्भ के राजा भीष्मक की पुत्री थी। रूक्मिणी अपनी बुद्धिमता, सौंदर्य और न्यायप्रिय व्यवहार के लिए प्रसिद्ध थीं। रूक्मिणी का पूरा बचपन श्रीकृष्ण के साहस और वीरता की कहानियां सुनते हुए बीता था। जब विवाह की उम्र हुई तो इनके लिए कई रिश्ते आए लेकिन उन्होंने सभी को मना कर दिया। उनके विवाह को लेकर माता-पिता और भाई चिंतित थे। बाद में रूक्मिणी का श्री कृष्ण से विवाह हुआ। कथा श्रवण करने बड़ी संख्या में रसिक श्रोतागण कथा पंडाल पहुंच धर्म लाभ अर्जित कर रहे हैं 14 जुलाई से 22 जुलाई तक तक आयोजित हो रही भागवत कथा में गांव सहित आसपास गांव से भी बड़ी संख्या में रसिक श्रोता पहुंच रहे हैं। कथा का समय दोपहर 12 से शाम 07बजे तक है। इस भागवत कथा के आयोजनकर्ता भरत लाल देवांगन ,श्रीमती गणेशीय बाई देवांगन विष्णु प्रसाद , छाया देवांगन डंडी राम लता देवांगन, नंदकुमार मधु देवांगन , राजेश गीतांजलि देवांगन ,अशोक मनीष देवांगन , नरेश सोनम देवांगन परिवार है।