रायपुर: जिला सैनिक कल्याण कार्यालय के कर्मचारी का फूटा दर्द; गंभीर आरोप लगा की निष्पक्ष जांच की मांग
रायपुर: जिला सैनिक कल्याण कार्यालय के कर्मचारी का फूटा दर्द; गंभीर आरोप लगा की निष्पक्ष जांच की मांग
रायपुर: राजधानी के जिला सैनिक कल्याण कार्यालय में कामकाजी माहौल और नियमों की अनदेखी का एक बड़ा मामला सामने आया है। कार्यालय में पदस्थ कर्मचारी देवेन्द्र कुमार गंगबेर ने एक प्रेस वार्ता आयोजित कर विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने अत्यधिक कार्यभार, निर्धारित समय से ज्यादा ड्यूटी और साप्ताहिक अवकाश न मिलने जैसे संगीन आरोप लगाते हुए शासन से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
देवेन्द्र कुमार गंगबेर के अनुसार, उनकी नियुक्ति मूल रूप से जिला सैनिक कल्याण कार्यालय के पदीय दायित्वों के लिए हुई थी। लेकिन वर्तमान में उनसे कार्यालयीन कार्यों के अलावा सैनिक विश्राम गृह के लगभग 10 से 12 कमरों की देखरेख, अतिथियों के ठहरने की व्यवस्था और अन्य अतिरिक्त काम भी जबरन कराए जा रहे हैं। इन अतिरिक्त जिम्मेदारियों के चलते उन पर कार्यभार असहनीय रूप से बढ़ गया है।
कर्मचारी ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कार्य समय को लेकर बेहद चौंकाने वाले आरोप लगाए:
- तय समय का अभाव: नवंबर माह में अंबिकापुर से रायपुर स्थानांतरण होने के बाद से ही वे लगातार तय कार्य समय और साप्ताहिक अवकाश की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक प्रबंधन द्वारा उनकी ड्यूटी का कोई स्पष्ट समय निर्धारित नहीं किया गया।
- मैराथन ड्यूटी: आरोप है कि उन्हें कई मौकों पर लगातार 17, 18, 24, 48 और यहां तक कि 96 घंटे तक बिना किसी विश्राम के ड्यूटी पर तैनात रहने के निर्देश दिए गए।
- अवकाश में कटौती: शासकीय अवकाश (Government Holidays) के दिनों में भी काम लिया जाता है, जिसके बदले नियमानुसार मिलने वाला प्रतिपूरक अवकाश (Compensatory Leave) भी उन्हें नहीं दिया जा रहा है।
गंगबेर ने भावुक होते हुए कहा कि लगातार कई दिनों तक बिना सोए और बिना पर्याप्त आराम के काम करने के कारण वे गंभीर शारीरिक और मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं। उनका मानना है कि इस तरह की दमनकारी कार्य परिस्थितियां किसी भी कर्मचारी के स्वास्थ्य और उसकी कार्यक्षमता को पूरी तरह से नष्ट कर सकती हैं।
पीड़ित कर्मचारी ने छत्तीसगढ़ शासन के सेवा नियमों का हवाला देते हुए निम्नलिखित मांगें रखी हैं:
- प्रतिदिन 8 घंटे का निर्धारित कार्य समय तत्काल लागू किया जाए।
- नियमित साप्ताहिक अवकाश और शासकीय छुट्टियों के बदले प्रतिपूरक अवकाश की व्यवस्था सुनिश्चित हो।
- इस पूरे मामले की किसी उच्च स्तरीय समिति से निष्पक्ष जांच कराई जाए और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाए।