*मेडिटेशन से जीवन में सकारात्मक दृष्टिकोण - बीके जीतू भाई जी*
बिलासपुर, 11 जून 2026: प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय बिलासपुर टेलीफोन एक्सचेंज रोड स्थित मुख्य सेवाकेंद्र 'राजयोग भवन' में युवाओं के उज्ज्वल भविष्य और तनावमुक्त जीवन को लेकर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में माउंट आबू, राजस्थान स्थित ब्रह्माकुमारीज़ के अंतर्राष्ट्रीय मुख्यालय से युवा प्रभाग के राष्ट्रीय संयोजक आदरणीय बीके जीतू भाई जी मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित हुए। सेवाकेंद्र पर गरिमामयी आगमन होने पर राजयोग भवन की मुख्य संचालिका स्वाति दीदी ने जीतू भाई जी का आत्मीय स्वागत व अभिनंदन किया। कार्यक्रम की शुरुआत में स्वाति दीदी ने उपस्थित सभी स्थानीय युवाओं को प्रेरित करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए विशेष शुभभावनाएं और मंगल आशीर्वाद वचन दिए।
बिलासपुर के स्थानीय युवाओं को विशेष रूप से संबोधित करते हुए जीतू भाई जी ने कहा कि आज भारत की लगभग 65 प्रतिशत जनसंख्या युवा है, जो देश की सबसे बड़ी ताकत है। हालांकि, आज के इस आधुनिक और प्रतिस्पर्धी युग में युवा वर्ग मानसिक तनाव, चिंता और भटकाव जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है। वर्तमान समय में युवाओं के बीच मानसिक तनाव एक महामारी का रूप लेता जा रहा है, जिसका सबसे बड़ा और मुख्य कारण सोशल मीडिया की लत है। आज का युवा सुबह सोकर उठने से लेकर रात को सोने तक अपना अधिकांश समय मोबाइल स्क्रीन पर रील्स, शॉर्ट्स और पोस्ट स्क्रॉल करने में बिता रहा है। इस आभासी दुनिया में लोग केवल अपने जीवन के सबसे अच्छे और चमकीले पलों को ही साझा करते हैं, जिसे देखकर आम युवा अनजाने में ही अपने वास्तविक जीवन की तुलना दूसरों के उस दिखावटी जीवन से करने लगता है। इस अवास्तविक तुलना के कारण युवाओं के मन में यह हीन भावना घर कर जाती है कि उनका अपना जीवन दूसरों की अपेक्षा बहुत पीछे या बेकार है। इसी सोच से एक नया मानसिक विकार पैदा हुआ है जिसे 'फोमो' यानी कुछ छूट जाने का डर कहते हैं। जो युवाओं को हर समय बेचैन और तनावग्रस्त रखता है। देर रात तक स्क्रीन देखने की इस आदत के कारण उनकी नींद का चक्र पूरी तरह बिगड़ जाता है, जिससे मस्तिष्क को पर्याप्त आराम नहीं मिलता और दिनभर चिड़चिड़ापन, थकान तथा एकाग्रता की कमी बनी रहती है। लगातार छोटे वीडियो देखने की आदत से उनकी सोचने और गहराई से ध्यान केंद्रित करने की क्षमता भी तेजी से घट रही है, जिसका सीधा असर उनकी पढ़ाई और करियर पर पड़ रहा है। इस गंभीर दलदल से निकलने के लिए युवाओं को सबसे पहले अपने स्क्रीन टाइम पर सख्त नियंत्रण लगाना होगा। इसके लिए उन्हें हर दिन कुछ घंटे या सप्ताह में एक दिन 'डिजिटल डिटॉक्स' अपनाना चाहिए, जिसमें वे सोशल मीडिया से पूरी तरह दूरी बना लें। युवाओं को यह समझना होगा कि सोशल मीडिया पर दिखने वाली हर चीज सच नहीं होती, इसलिए आभासी दुनिया के अकाउंट्स को फिल्टर करें और केवल सकारात्मक सामग्री को ही देखें। फोन की लत को छोड़ने के लिए खाली समय में रचनात्मक शौक जैसे किताबें पढ़ना, संगीत, पेंटिंग या खेलकूद और योग जैसी शारीरिक गतिविधियों को अपने जीवन का हिस्सा बनाना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही, आभासी दोस्तों के जाल से बाहर निकलकर परिवार और वास्तविक दोस्तों के साथ आमने-सामने बैठकर बातचीत करने की आदत डालें। राजयोग मेडिटेशन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि राजयोग मेडिटेशन हमारे मन को परमात्मा की सकारात्मक ऊर्जा से जोड़ने का एक बेहद सरल और प्रभावी माध्यम है। इसके नियमित अभ्यास से मन को गहरी शांति मिलती है, जिससे मानसिक तनाव और अवसाद पूरी तरह समाप्त हो जाते हैं। ध्यान करने से युवाओं की एकाग्रता और निर्णय लेने की क्षमता में तेजी से वृद्धि होती है, जो उनके करियर को संवारने में मददगार साबित होती है। इसके अलावा, मेडिटेशन जीवन में सकारात्मक दृष्टिकोण जगाता है, जिससे युवा बुरी आदतों और व्यसनों से दूर रहकर नैतिक मूल्यों को अपनाते हैं। अंत में उन्होंने सभी युवाओं से दैनिक जीवन में नियमित ध्यान लगाने का संकल्प लेने का आह्वान किया ताकि वे एक स्वस्थ और सशक्त समाज का निर्माण कर सकें।
ईश्वरीय सेवा में
बीके स्वाति दीदी
राजयोग भवन, बिलासपुर