*सिकलिन पीड़ित युवती की मौत अत्यंत दुखद, दोषियों पर हो कठोर कार्रवाई – डॉ. प्रतीक उमरे*

*सिकलिन पीड़ित युवती की मौत अत्यंत दुखद, दोषियों पर हो कठोर कार्रवाई – डॉ. प्रतीक उमरे*

*सिकलिन पीड़ित युवती की मौत अत्यंत दुखद, दोषियों पर हो कठोर कार्रवाई – डॉ. प्रतीक उमरे*
*सिकलिन पीड़ित युवती की मौत अत्यंत दुखद, दोषियों पर हो कठोर कार्रवाई – डॉ. प्रतीक उमरे*
दुर्ग नगर निगम के पूर्व एल्डरमैन भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे ने जिला अस्पताल दुर्ग में सिकलिन पीड़ित युवती की कथित लापरवाही के चलते हुई मौत को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण एवं चिंताजनक बताते हुए प्रदेश के मुख्य सचिव विकासशील से मामले की उच्चस्तरीय जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर कठोर कार्रवाई करने की मांग की है।डॉ. प्रतीक उमरे ने कहा कि दुर्ग जिला अस्पताल आज मरीजों के उपचार का केंद्र कम और रेफरल सेंटर अधिक बनकर रह गया है। यहां उपचार के लिए पहुंचने वाले मरीजों को उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के बजाय बिना समुचित इलाज के बड़े अस्पतालों के लिए रेफर कर दिया जाता है। इसका खामियाजा गरीब एवं मध्यमवर्गीय परिवारों को भुगतना पड़ता है, जो आर्थिक एवं मानसिक रूप से परेशान हो जाते हैं।उन्होंने कहा कि वर्षों से जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं।अनेक कलेक्टरों एवं वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा समय-समय पर निरीक्षण भी किया गया,लेकिन जमीनी स्तर पर सुधार दिखाई नहीं देता।अस्पताल में डॉक्टरों की उपलब्धता,आपातकालीन सेवाओं की गुणवत्ता,मरीजों के प्रति संवेदनशीलता तथा जवाबदेही जैसे मुद्दे आज भी गंभीर चिंता का विषय बने हुए हैं।डॉ. प्रतीक उमरे ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा व्यवस्था सुधार के नाम पर केवल कागजी औपचारिकताएं पूरी की जाती हैं,जबकि वास्तविक स्थिति जस की तस बनी हुई है।अस्पताल में लगातार स्टाफ की लापरवाही और मरीजों के साथ दुर्व्यवहार की शिकायतें सामने आने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होना गंभीर प्रश्न खड़े करता है।उन्होंने कहा कि जिला अस्पताल के सिविल सर्जन की जिम्मेदारी बनती है कि वे अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सतत निगरानी रखें,लेकिन शिकायतों के बाद भी कार्रवाई का अभाव प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाता है।डॉ. प्रतीक उमरे ने मांग किया कि सिकलिन पीड़ित युवती की मौत की निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कराई जाए,जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए तथा दोषी पाए जाने वाले चिकित्सकों,कर्मचारियों एवं अधिकारियों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में किसी अन्य परिवार को ऐसी पीड़ा का सामना न करना पड़े।उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकती। जनता को गुणवत्तापूर्ण और समय पर उपचार उपलब्ध कराना शासन एवं प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। यदि जिला अस्पताल में व्यवस्थाएं नहीं सुधरीं तो आम जनता का सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था से विश्वास पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।डॉ. प्रतीक उमरे ने राज्य सरकार से जिला अस्पताल दुर्ग की समस्त स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की व्यापक समीक्षा कर आवश्यक संसाधन, विशेषज्ञ चिकित्सक एवं जवाबदेह प्रशासनिक व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है,ताकि मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें और ऐसी दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

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