*नर्सिंग होम एक्ट का खुलेआम उल्लंघन,मरीजों की जान से हो रहा खिलवाड़ – भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे*
दुर्ग नगर निगम के पूर्व एल्डरमैन भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे ने छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव विकास शील से दुर्ग जिले में नर्सिंग होम एक्ट के व्यापक उल्लंघन पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए तत्काल उच्चस्तरीय जांच एवं कठोर कार्रवाई की मांग की है।उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर जिले में अनेक निजी अस्पताल,नर्सिंग होम,पैथोलॉजी लैब एवं फिजियोथेरेपी सेंटर नियमों को ताक पर रखकर संचालित किए जा रहे हैं,जिससे आम नागरिकों के जीवन एवं स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।डॉ. प्रतीक उमरे ने कहा कि छत्तीसगढ़ में वर्ष 2013 से नर्सिंग होम एक्ट लागू है,जिसका उद्देश्य निजी स्वास्थ्य संस्थानों में आवश्यक सुविधाओं,प्रशिक्षित स्टाफ,सुरक्षा मानकों एवं गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाओं को सुनिश्चित करना है।एक्ट के अनुसार प्रत्येक अस्पताल,नर्सिंग होम, पैथोलॉजी लैब एवं अन्य स्वास्थ्य संस्थानों को निर्धारित मानकों एवं आवश्यक अनुमतियों के आधार पर ही संचालन की अनुमति दी जाती है।इसके बावजूद दुर्ग जिले में अनेक संस्थान बिना पर्याप्त संसाधनों और आवश्यक दस्तावेजों के संचालित हो रहे हैं।उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की उदासीनता एवं कमजोर निगरानी के कारण शहर ही नहीं बल्कि गली-मोहल्लों तक में ऐसे नर्सिंग होम संचालित हो रहे हैं,जहां मरीजों से भारी-भरकम शुल्क तो वसूला जा रहा है,लेकिन उन्हें सुरक्षित एवं मानक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं।कई स्थानों पर अप्रशिक्षित नर्सों और अनुभवहीन कर्मचारियों के भरोसे मरीजों का उपचार एवं देखभाल की जा रही है,जो सीधे तौर पर मरीजों की जान जोखिम में डालने वाला मामला है।अनेक नर्सिंग होम और अस्पतालों के पास अग्निशमन विभाग का वैध अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं है।कई संस्थानों में भवन निर्माण पूर्णता प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं है,जबकि कुछ अस्पतालों में लिफ्ट का संचालन बिना आवश्यक तकनीकी स्वीकृति और सुरक्षा प्रमाणपत्र के किया जा रहा है।इसके अतिरिक्त कई संस्थानों ने जैव-चिकित्सीय अपशिष्ट एवं स्वच्छता संबंधी नियमों का पालन नहीं किया है तथा उनके पास प्रदूषण नियंत्रण मंडल की आवश्यक एनओसी भी उपलब्ध नहीं है।उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य संस्थानों में फायर सेफ्टी,भवन सुरक्षा,आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था,प्रशिक्षित स्टाफ,स्वच्छता एवं अन्य आवश्यक मानकों का पालन नहीं होने से किसी भी समय बड़ी दुर्घटना या जनहानि की आशंका बनी रहती है।लेकिन दुर्ग में संबंधित विभागों द्वारा पर्याप्त सतर्कता नहीं बरती जा रही है।डॉ. प्रतीक उमरे ने कहा कि जब नर्सिंग होम एक्ट के प्रावधानों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है,तब भी स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रभावी निरीक्षण,नियमित जांच और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई नहीं की जा रही है।इससे विभागीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली और मंशा पर भी प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।उन्होंने मुख्य सचिव से मांग किया कि जिले के सभी निजी अस्पतालों,नर्सिंग होम,पैथोलॉजी लैब एवं फिजियोथेरेपी केंद्रों का संयुक्त निरीक्षण स्वास्थ्य विभाग,अग्निशमन विभाग,नगर निगम, प्रदूषण नियंत्रण मंडल एवं अन्य संबंधित एजेंसियों की टीम द्वारा कराया जाए तथा जिन संस्थानों द्वारा नर्सिंग होम एक्ट एवं अन्य आवश्यक नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है,उनके विरुद्ध तत्काल दंडात्मक कार्रवाई करते हुए उनका पंजीयन निरस्त किया जाए तथा गंभीर अनियमितता पाए जाने पर संचालन बंद कराया जाए साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जाए ताकि भविष्य में आम नागरिकों के स्वास्थ्य एवं जीवन से खिलवाड़ करने वालों को संरक्षण न मिल सके।स्वास्थ्य सेवा एक संवेदनशील एवं जनहित से जुड़ा विषय है।इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही या नियमों की अनदेखी स्वीकार्य नहीं हो सकती।राज्य सरकार एवं प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जनता को सुरक्षित,गुणवत्तापूर्ण एवं मानक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हों तथा स्वास्थ्य क्षेत्र में पारदर्शिता एवं जवाबदेही बनी रहे।