*पर्यावरण संरक्षण गतिविधि द्वारा कार्यशाला आयोजन*

*पर्यावरण संरक्षण गतिविधि द्वारा कार्यशाला आयोजन*

*पर्यावरण संरक्षण गतिविधि द्वारा कार्यशाला आयोजन*
*पर्यावरण संरक्षण गतिविधि द्वारा कार्यशाला आयोजन*


 पर्यावरण संरक्षण गतिविधि, बालोद द्वारा बालोद नगर के कपिलेश्वर मंदिर में एक सराहनीय कार्यशाला और बीजारोपण सीटबॉल निर्माण कार्यक्रम रखा गया इस कार्यक्रम के मुख्यवक्ता छगन यादव नगर कार्यवाह ने कहां कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपनी स्थापना के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए 'पंच परिवर्तन' का आह्वान किया है। यह अवधारणा समाज के सर्वांगीण विकास, राष्ट्रीय चेतना के पुनर्जागरण और भारतीय मूल्यों की पुनर्स्थापना पर आधारित है।
 पाँच प्रमुख स्तंभ है
पंच परिवर्तन के पाँच आयाम:
सामाजिक समरसता-
इसका उद्देश्य समाज से जाति, भाषा, क्षेत्र और संप्रदाय के आधार पर फैले भेदभाव को मिटाना है। संघ का मानना है कि विविधता में एकता ही भारत की शक्ति है। इसका अर्थ सभी के साथ समानता का व्यवहार करना और वंचित वर्गों को समाज की मुख्यधारा में सम्मानपूर्वक लाना है।
कुटुंब प्रबोधन :
परिवार को समाज की प्राथमिक पाठशाला माना जाता है। इस परिवर्तन के माध्यम से परिवार में संस्कारों, बुजुर्गों के सम्मान, आपसी प्रेम और अनुशासन को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि एक स्वस्थ और संस्कारित समाज का निर्माण हो सके।
पर्यावरण संरक्षण :
प्रकृति को 'माता' मानकर उसके प्रति जिम्मेदारी का भाव विकसित करना। इसमें जल संरक्षण, प्लास्टिक का उपयोग कम करना, पेड़ लगाना और टिकाऊ जीवनशैली अपनाना शामिल है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए पृथ्वी सुरक्षित रहे।
'स्व' आधारित जीवनशैली :
'स्व' का अर्थ है अपनी भारतीय पहचान, संस्कृति, भाषा और परंपराओं पर गर्व करना। यह आत्मनिर्भरता (आत्मनिर्भर भारत) की दिशा में एक कदम है, जिसमें स्थानीय उत्पादों (वोकल फॉर लोकल), हस्तशिल्प और स्वदेशी उद्योगों को प्रोत्साहन देने पर बल दिया जाता है।
नागरिक कर्तव्य :
अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहना। एक जागरूक नागरिक के रूप में नियमों का पालन करना, मतदान करना, सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देना इस परिवर्तन का मुख्य लक्ष्य है।
निष्कर्ष: संघ का यह मानना है कि ये पाँच परिवर्तन केवल वैचारिक नहीं हैं, बल्कि ये जीवन जीने का एक व्यवहारिक तरीका हैं। जब प्रत्येक व्यक्ति इन पाँच बिंदुओं को अपने दैनिक जीवन में अपनाएगा, तभी भारत एक विकसित, शक्तिशाली और समर्थ राष्ट्र के रूप में स्थापित होगा। कार्याशाला में विनोद कुमार साहू जिला सहकार्यवाह ,कमलकृष्णाकांत साहू ने प्रशिक्षण में पर्यावरण संरक्षण के लिए बीजारोपण और सीड बॉल तकनीक एक अत्यंत प्रभावी, कम लागत वाली और सफल विधि है। यहाँ इसका विस्तृत प्रशिक्षण और प्रक्रिया दी गई है:
1. सीड बॉल क्या है?
सीड बॉल मिट्टी, खाद और बीजों का एक गोला होता है। यह बीज को पक्षियों, कीटों और कठोर मौसम से बचाता है और सही समय (बारिश) आने पर स्वतः अंकुरित होने के लिए तैयार रहता है।
2. सीड बॉल बनाने की सामग्री
मिट्टी: लाल मिट्टी या उपजाऊ दोमट मिट्टी।
खाद: वर्मी कंपोस्ट (केंचुआ खाद) या गोबर की पुरानी खाद।
बीज: स्थानीय जलवायु के अनुकूल पेड़-पौधों के बीज (जैसे- नीम, बरगद, जामुन, अमलतास आदि)।
पानी: गूंथने के लिए।
3. सीड बॉल निर्माण प्रक्रिया (स्टेप-बाय-स्टेप)
मिश्रण तैयार करना: 5 भाग मिट्टी और 1 भाग खाद को अच्छी तरह मिला लें।
गोलियां बनाना: इस मिश्रण में थोड़ा-थोड़ा पानी डालकर छोटी गेंद (नींबू के आकार की) बनाएं।
बीज डालना: गेंद के केंद्र में 2-3 बीज दबाएं और उसे अच्छी तरह बंद कर दें। (बीज ज्यादा गहरे न हों)।
सुखाना: बनी हुई सीड बॉल्स को छाया में 24 से 48 घंटे तक सूखने दें। इन्हें धूप में न सुखाएं, वरना बीज मर सकते हैं।
4. बीजारोपण (सीड बॉलिंग) की विधि
समय: मानसून (बारिश) के आने से ठीक पहले या शुरुआत में सीड बॉल्स का छिड़काव करना सबसे उत्तम है।
स्थान का चुनाव: बंजर भूमि, पहाड़ियों, सड़क के किनारे या खाली पड़ी सरकारी जमीनों पर इनका उपयोग करें।
तरीका: इन गेंदों को जमीन पर बस फेंक देना होता है। इन्हें गड्ढा खोदकर लगाने की जरूरत नहीं होती, क्योंकि बारिश के पानी से मिट्टी पिघलकर बीज को नमी प्रदान करती है और वह स्वतः उग जाता है।
5. पर्यावरण संरक्षण में महत्व
वनीकरण: दुर्गम इलाकों (जहाँ इंसान नहीं पहुँच सकते) में जंगल बनाने का सबसे आसान तरीका है।
उच्च उत्तरजीविता दर : मिट्टी की परत बीज को सुरक्षित रखती है, जिससे अंकुरण की संभावना सामान्य बीजारोपण से कहीं अधिक होती है।
न्यूनतम देखभाल: इसमें खाद और पानी डालने के लिए किसी माली की आवश्यकता नहीं पड़ती।
प्रभावी बीजारोपण के लिए सुझाव
स्वदेशी बीजों का उपयोग करें: जो पौधे आपके क्षेत्र के वातावरण में प्राकृतिक रूप से उगते हैं, उन्हीं के बीजों का चयन करें।
विविधता रखें: केवल एक प्रकार के नहीं, बल्कि 5-6 प्रकार के औषधीय और छायादार वृक्षों के बीजों का मिश्रण उपयोग करें।
सामुदायिक सहभागिता: इस गतिविधि को स्कूल, कॉलेज या स्थानीय युवाओं के साथ मिलकर एक 'कैंपेन' की तरह चलाएं।
क्या आप चाहते हैं कि मैं आपकी स्थानीय जलवायु के अनुसार कुछ प्रमुख पेड़ों की सूची तैयार करूँ जिन्हें आप सीड बॉल बनाने के लिए उपयोग कर सकते हैं इस कार्यक्रम में नगर पर्यावरण संयोजक रूपेश सोनकर ,कादंबिनी यादव समाज सेविका, पूजा जैन मातृशक्ति विश्व हिन्दू परिषद् बालोद व नगर के सभी भैया बहन उपस्थित रहे ।

Ads Atas Artikel

Ads Atas Artikel 1

Ads Center 2

Ads Center 3