*ग्राम रेंगबोड़ में दयावंत साहू की पुण्यस्मृति में भव्य श्रद्धांजलि सभा आयोजित*
खरोरा
ग्राम रेंगबोड़ में स्वर्गीय दयावंत साहू की पुण्यस्मृति में जिला मानस संगठन एवं ब्लॉक मानस संगठन सिमगा के संयुक्त तत्वावधान में विनम्र श्रद्धांजलि सभा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम ग्राम रेंगबोड़ के हृदय स्थल रामायण चौक में आयोजित हुआ, जो पूरे अंचल में चर्चा का विषय बना रहा।
कार्यक्रम का आयोजन श्रीमती प्यारी बाई साहू एवं पांच भैया परिवार, ग्राम रेंगबोड़ द्वारा किया गया। श्रद्धांजलि सभा में आकाशवाणी एवं दूरदर्शन से जुड़े लोक कलाकारों ने रामायण, पंडवानी एवं लोकगीतों की मनमोहक प्रस्तुतियों के माध्यम से स्वर्गीय दयावंत साहू को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में हजारों की संख्या में ग्रामीण एवं दर्शक उपस्थित रहे तथा साहू परिवार को सांत्वना प्रदान की।
स्वर्गीय दयावंत साहू अंचल के प्रसिद्ध तबला वादक थे। वे आकाशवाणी एवं दूरदर्शन से जुड़े रहे और जीवनभर संगीत एवं तबला वादन के क्षेत्र में सक्रिय योगदान देते रहे। उनके निधन से संगीत जगत एवं साहू परिवार में शोक की लहर व्याप्त है।
कार्यक्रम में लेखचंद साहू एवं मेघनाथ साहू ने कहा कि श्रद्धांजलि सभा का उद्देश्य दिवंगत व्यक्तित्व के कार्यों को याद करना तथा उनकी स्मृतियों को संजोना है। उन्होंने कहा कि मानस संगठन परिवार एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ खड़े रहने का संदेश देता है तथा दिवंगत आत्मा की शांति के लिए सामूहिक प्रार्थना करना ही इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य रहा।
मंच संचालन आकाशवाणी एवं दूरदर्शन के लोक कलाकार तथा जिला मानस संगठन बलौदाबाजार के सचिव लीलूराम मरावी द्वारा किया गया। उन्होंने श्रद्धांजलि सभा की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि कार्यक्रम में गरिमा एवं सम्मान का विशेष ध्यान रखा गया तथा सभी लोक कलाकारों एवं जनप्रतिनिधियों ने स्वर्गीय दयावंत साहू को भावपूर्ण विदाई दी।
कार्यक्रम में विशेष सहयोग मेघनाथ साहू, अध्यक्ष मानस संगठन जनपद पंचायत सिमगा, ध्वनि तरंग रघुवीर टेंट एवं सुपर साउंड सिस्टम का रहा। श्रद्धांजलि कार्यक्रम में लगभग 21 कलाकारों एवं 20 मानस मंडलियों ने अपनी प्रस्तुतियां दीं। तरेगा, खरगढ़ीह, मलदी, देवरी, मुड़पार, सुहेला, टिकुलिया, भाटापारा, नेवधा सहित विभिन्न ग्रामों की मंडलियों ने भक्ति एवं लोकसंगीत से वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
कार्यक्रम के अंत में कलाकारों द्वारा प्रस्तुत भजन —
“तोला जाना पड़ेगा, कायाल छोड़ के हंसा जाना पड़ेगा,
रूप छोड़ रानी, चाहे राज्य छोड़ के राजा...”
ने उपस्थित लोगों को भावुक कर दिया।
सभा का समापन “जय श्रीराम” के उद्घोष के साथ हुआ।
श्री रोहित वर्मा जी की खबर