*घर-घर पहुंचा गायत्री यज्ञ: दल्ली राजहरा, करू टोला व चिकला कसा में सुख-शांति के लिए निःशुल्क अनुष्ठान संपन्न*

*घर-घर पहुंचा गायत्री यज्ञ: दल्ली राजहरा, करू टोला व चिकला कसा में सुख-शांति के लिए निःशुल्क अनुष्ठान संपन्न*

*घर-घर पहुंचा गायत्री यज्ञ: दल्ली राजहरा, करू टोला व चिकला कसा में सुख-शांति के लिए निःशुल्क अनुष्ठान संपन्न*
*घर-घर पहुंचा गायत्री यज्ञ: दल्ली राजहरा, करू टोला व चिकला कसा में सुख-शांति के लिए निःशुल्क अनुष्ठान संपन्न*

मनुष्य में देवत्व का उदय और धरती पर स्वर्ग की कामना को लेकर अखिल विश्व गायत्री शक्तिपीठ शांतिकुंज हरिद्वार के आदेश पर 3 दिवसीय गृहे गृहे यज्ञ का आयोजन 1 मई से 3 मई तक किया जा रहा है जिसका आज समापन होगा।

  देव आर्य , संतोष कोरटीया, सोन साय लटियारे ,दमयंती पवार ,रेणुका गंजीर सहित 5 गायत्री शक्तिपीठ दल्ली राजहरा के आचार्यों द्वारा घर-घर जाकर पूर्णतः निःशुल्क यज्ञ संपन्न कराया गया। 
गायत्री परिवार के व्यवस्थापक हीरालाल पवार ने बताया कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक परिवार में सुख, शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करना है। शास्त्रों में मानव में बढ़ते तनाव, बीमारी और गृह क्लेश को दूर करने के लिए यज्ञ को सबसे शक्तिशाली वैज्ञानिक माध्यम माना गया है। इसलिए यह आयोजन किया जा रहा है । आचार्यों की टोली सुबह 9 बजे से 11 बजे तक घर-घर पहुंचकर विधि-विधान से गायत्री महामंत्र की आहुतियों के साथ यज्ञ संपन्न करा रहे हैं ।
आचार्य देव आर्य ने कहा "परम पूज्य गुरुदेव पं. श्रीराम शर्मा
 आचार्य जी का संदेश है – 'हम बदलेंगे, युग बदलेगा'। यज्ञ से घर का वातावरण शुद्ध होता है, नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं और परिवार में प्रेम बढ़ता है। हरिद्वार शक्तिपीठ के आदेश पर हम हर साल मई माह में यह अभियान चलाते हैं।"
ग्रामीणों में उत्साह करू टोला निवासी सावित्री ग्वाल ने बताया – "आचार्य जी खुद घर आए, मंत्रों से यज्ञ कराया और परिवार के लिए मंगलकामना की। ऐसे आयोजन से गांव में धार्मिक माहौल बनता है।" चिखला कसा की इंदु सोनी ने कहा कि यज्ञ के बाद घर में अद्भुत शांति महसूस हो रही है।
: गायत्री परिवार के अनुसार यह तीन दिवसीय " गृहे गृहे यज्ञ" अभियान प्रतिवर्ष मई माह में चलाया जाता है, जिसका आज विधिवत समापन हुआ। इस दौरान सैकड़ों घरों में यज्ञ संपन्न हुए।
 गायत्री शक्तिपीठ ने सभी नागरिकों से आह्वान किया है कि वे नियमित गायत्री मंत्र जाप, यज्ञ और सेवा कार्यों से जुड़कर व्यक्ति निर्माण, परिवार निर्माण और समाज निर्माण में भागीदार बनें।

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