*डाँट से नहीं, प्यार से संवरता है बच्चे का भविष्य — बीके स्वाति दीदी*

*डाँट से नहीं, प्यार से संवरता है बच्चे का भविष्य — बीके स्वाति दीदी*

*डाँट से नहीं, प्यार से संवरता है बच्चे का भविष्य — बीके स्वाति दीदी*
प्रेस विज्ञप्ति।

*डाँट से नहीं, प्यार से संवरता है बच्चे का भविष्य — बीके स्वाति दीदी*
03 मई 2026, बिलासपुर। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की मुख्य शाखा, टेलीफोन एक्सचेंज रोड स्थित राजयोग भवन में आयोजित सात दिवसीय 'पेरेंटिंग विथ वैल्यूज' कार्यशाला के दूसरे दिन अभिभावकों को संबोधित करते हुए सेवाकेंद्र संचालिका बीके स्वाति दीदी ने "प्रेम का जादू" विषय पर गहन प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि किस प्रकार प्रेम के माध्यम से बच्चों के व्यक्तित्व को निखारा जा सकता है और उनके भविष्य को सुरक्षित किया जा सकता है।
दूसरे दिन के सत्र की शुरुआत करते हुए बीके स्वाति दीदी ने कहा कि बच्चे मिट्टी के कच्चे घड़े के समान होते हैं। उन्हें आकार देने के लिए दबाव की नहीं, बल्कि प्रेम रूपी शीतल स्पर्श की आवश्यकता होती है। जब हम बच्चों को यह महसूस कराते हैं कि हम उनसे निस्वार्थ प्रेम करते हैं, तो वे हमारी बात को अनसुना नहीं करते।
स्वाति दीदी ने आधुनिक पेरेंटिंग की एक बड़ी कमी की ओर इशारा करते हुए कहा कि आज माता-पिता का प्रेम शर्तों पर टिका होता है। यदि बच्चा अच्छे अंक लाता है या कहना मानता है, तभी उसे प्यार दिया जाता है। उन्होंने अभिभावकों को सलाह दी कि बच्चों को यह विश्वास दिलाएं कि उनकी सफलता या विफलता से परे, माता-पिता का प्रेम उनके लिए स्थिर है। यह सुरक्षा की भावना बच्चों के आत्मविश्वास को कई गुना बढ़ा देती है और उन्हें गलत रास्तों पर जाने से रोकती है।
कार्यशाला में उपस्थित अभिभावकों के प्रश्नों का उत्तर देते हुए उन्होंने बताया कि क्रोध केवल क्षणिक समाधान देता है, जबकि प्रेम स्थाई परिवर्तन लाता है। जब बच्चा कोई गलती करे, तो उसे डांटने या मारने के बजाय, उसे अपने पास बिठाकर प्रेम से उस गलती के परिणामों के बारे में समझाएं। दीदी ने कहा, क्रोध बच्चों के मन में प्रतिरोध पैदा करता है, जबकि प्रेम उनके भीतर पश्चाताप और सुधार की भावना जगाता है।
आज के दौर में मोबाइल और सोशल मीडिया के कारण परिवारों के बीच बढ़ती दूरियों पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि घर में प्रेम का वातावरण ही बच्चों को गैजेट्स की आभासी दुनिया से बाहर ला सकता है। माता-पिता को चाहिए कि वे प्रतिदिन कम से कम एक घंटा बिना किसी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण के बच्चों के साथ बिताएं, उनकी बातें सुनें और उनके साथ खेलें। जब बच्चों को घर में पर्याप्त प्रेम और ध्यान मिलता है, तो उनकी बाहरी आकर्षणों के प्रति निर्भरता स्वतः कम हो जाती है।
राजयोग से प्रेम की शक्ति का अनुभव
बीके स्वाति दीदी ने बताया कि प्रेम देने के लिए स्वयं का प्रेम से भरपूर होना आवश्यक है। उन्होंने राजयोग मेडिटेशन के माध्यम से परमात्मा से प्रेम की शक्ति प्राप्त करने की विधि सिखाई। उन्होंने कहा कि जो माता-पिता स्वयं शांत और प्रेम स्वरूप होते हैं, उनके वाइब्रेशन मात्र से ही बच्चे शांत और आज्ञाकारी बनने लगते हैं।
ईश्वरीय सेवा में
बीके स्वाति
राजयोग भवन, बिलासपुर

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