*दल्ली राजहरा में माथुर बहू नेहा ने जगाई कला की अलख, 5 दिवसीय फ्री समर कैंप में बच्चे-बड़े सीख रहे रेजिन से मिरर आर्ट तक*

*दल्ली राजहरा में माथुर बहू नेहा ने जगाई कला की अलख, 5 दिवसीय फ्री समर कैंप में बच्चे-बड़े सीख रहे रेजिन से मिरर आर्ट तक*

*दल्ली राजहरा में माथुर बहू नेहा ने जगाई कला की अलख, 5 दिवसीय फ्री समर कैंप में बच्चे-बड़े सीख रहे रेजिन से मिरर आर्ट तक*
*दल्ली राजहरा में माथुर बहू नेहा ने जगाई कला की अलख, 5 दिवसीय फ्री समर कैंप में बच्चे-बड़े सीख रहे रेजिन से मिरर आर्ट तक*
– सेवा और सहयोग के लिए मशहूर माथुर परिवार ने एक बार फिर मिसाल पेश की है। परिवार की बहू नेहा माथुर द्वारा 20 मई से 24 मई तक पांच दिवसीय निशुल्क समर कैंप का आयोजन किया जा रहा है, जहाँ चार साल के नन्हे बच्चों से लेकर महिलाएं तक कैंडल आर्ट, बॉटल आर्ट, पेन होल्डर, क्ले आर्ट, रेजिन आर्ट और मिरर आर्ट जैसी बेशकीमती कलाएं सीख रही हैं।
नेहा माथुर ने बताया कि उन्होंने ये सभी कलाएं सात-आठ साल की कड़ी मेहनत से खुद सीखी हैं, उन्हें किसी ने नहीं सिखाया। उनका मकसद है कि गर्मी की छुट्टियों में बच्चे खाली समय व्यर्थ न गंवाएं बल्कि अपनी पसंद की कला में महारत हासिल करें। उन्होंने कहा कि बच्चों को सिर्फ सही रास्ता दिखाने की जरूरत होती है, उसके बाद वे बेहतर से बेहतर करके दिखा सकते हैं। कैंप में कई बच्चे ऐसे हैं जिन्होंने पहले कभी आर्ट नहीं किया, लेकिन आज उनकी कलाकृतियां देखकर लगता है कि वे मुझसे भी आगे निकल गए हैं।
इस कैंप की खास बात यह है कि यहां सिखाई जा रही रेजिन आर्ट की फीस बाहर दो से तीन हजार रुपये तक है और बॉटल आर्ट में भी दो से तीन सौ रुपये की लागत आती है। मगर नेहा माथुर न केवल निशुल्क प्रशिक्षण दे रही हैं बल्कि कला सामग्री भी अपनी ओर से मुफ्त उपलब्ध करा रही हैं। बच्चे अपनी बनाई कलाकृतियों को घर भी ले जा सकते हैं ताकि परिवार को दिखा सकें कि उन्होंने क्या सीखा है। इस पूरे आयोजन में माथुर परिवार का भरपूर सहयोग मिल रहा है। नेहा द्वारा बनाई गई कलाकृतियों को देखकर हर कोई उनकी प्रतिभा की प्रशंसा किए बिना नहीं रह पाता।
राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. शिरोमणि माथुर ने कहा कि माथुर परिवार अब तक सामाजिक, साहित्यिक और मनोरंजन के क्षेत्र में सक्रिय रहा है। आज पुत्रवधू नेहा माथुर शिक्षा और कला के जरिए सेवा कर रही हैं। हमारा उद्देश्य यही है कि बच्चे गर्मी की छुट्टियों में इधर-उधर न भटकें और कुछ नया सीखें। माथुर परिवार की ओर से यह एक छोटा सा प्रयास है ताकि बच्चों का भविष्य उज्ज्वल हो सके।

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