रिपोर्टर रोहित वर्मा
खरोरा
*वटसावित्री एवं शनिजयंती का संयोग*
खरोरा
सौभाग्यवती महिलाओं की पति को लंबी उम्र दिलाने वाले वटसावित्री का व्रत और शनिदेव जयंती का पर्व संयोग इस वर्ष 16मई दिन शनिवार को एक साथ बन रहा है।शनिवार के दिन शनि जयंती होने से यह और अत्यंत ही शुभदायक है। अमावस्या तिथि सूर्योदय से लेकर पूरे दिन तक होने के कारण वटसावित्री का व्रत का संयोग भी अति उत्तम है।दोपहर में महिलाएं सोलह सिंगार करके बटवृक्ष के पास जाकर पति की लंबी उम्र की कामना हेतु पूजा करते हैं। गणेशजी की पूजा करके बटवृक्ष में कच्चे धागे से 108 बार वेष्टित करके श्रृंगार की सामग्री अर्पित किया जाता है,और बांस के पात्र में अनाज तथा श्रृंगार की वस्तु फल और मिष्ठान,छतरी,पंखा,पददान द्रव्य दक्षिणा के साथ अपने पुरोहित ब्राह्मण को दान करने से व्रत करने वाले को विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।शनि जयंती हेतु शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए शनिदेव मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा तथा शनि व्रत,तेल और तिल तथा काले वस्त्र लोहे का पात्र दान करना आज के दिन सर्वोत्तम होता है। जिससे न्याय के देवता शनि देव प्रसन्न हो जाते हैं।
भगवान की सच्ची भक्ति करने से भगवान इस धरा धाम में आकरके भक्तों की कामना को पूर्ण करते हैं।सावित्री की पतिव्रता धर्म के कारण स्वयं भगवान धर्मराज सत्यवान को ले जाने के लिए आए। सावित्री अपने तपोबल के कारण धर्मराज को पहचान गई,और उनसे अपने पति की लंबी आयु की कामना की। धर्मराजजी उनको तीन वरदान दिए पति को 100 वर्ष की आयु, ससुर को नेत्र ज्योति की प्राप्ति, और बिछड़े राज्य की प्राप्ति ,धर्म मार्ग में कदम रखने पर और व्रत पूर्ण होने पर भगवान अवश्य प्रसन्न होते हैं,तथा ब्रति की मनोकामना को अवश्य पूरा करते हैं।