*सकारात्मक शब्द बच्चों के लिए आशीर्वाद बनते हैं — बीके स्वाति दीदी*

*सकारात्मक शब्द बच्चों के लिए आशीर्वाद बनते हैं — बीके स्वाति दीदी*

*सकारात्मक शब्द बच्चों के लिए आशीर्वाद बनते हैं — बीके स्वाति दीदी*
प्रेस विज्ञप्ति।

*सकारात्मक शब्द बच्चों के लिए आशीर्वाद बनते हैं — बीके स्वाति दीदी*
06 मई 2026,बिलासपुर। आज के आधुनिक और तनावपूर्ण दौर में बच्चों को नैतिक मूल्यों से ओतप्रोत करना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। इस समस्या के समाधान और अभिभावकों को सही दिशा दिखाने के उद्देश्य से प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की मुख्य शाखा टेलीफोन एक्सचेंज रोड स्थित राजयोग भवन में आयोजित "पेरेंटिंग विथ वैल्यूज" शिविर में सेवाकेंद्र संचालिका बीके स्वाति दीदी ने कहा कि आज एकाकी परिवारों के बढ़ने और सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग के कारण बच्चे अंदर से खालीपन महसूस कर रहे हैं। यदि घर का माहौल नकारात्मक होगा, तो यह खालीपन और गहरा हो जाएगा। संस्था का मुख्य उद्देश्य "स्व परिवर्तन से विश्व परिवर्तन" है। इसका अर्थ यही है कि जब माता-पिता अपने भीतर के खालीपन को सकारात्मक विचारों से भरेंगे, तभी वे बच्चों को एक सुरक्षित और खुशहाल माहौल दे पाएंगे। घर में होने वाले आपसी विवादों और नकारात्मक बातचीत पर पूरी तरह विराम लगाना होगा, क्योंकि बच्चे हमारे कहे को नहीं, बल्कि हमारे किए को आत्मसात करते हैं। बच्चे की कमियों को बार-बार बताने के बजाय, उसकी छोटी-छोटी अच्छाइयों को सराहें। सकारात्मक प्रोत्साहन से बच्चों का आत्मविश्वास कई गुना बढ़ जाता है। माता-पिता को बच्चों से बात करते समय क्रोध या चिड़चिड़ाहट के शब्दों के प्रयोग से बचना चाहिए। हमारे मुख से निकले सकारात्मक शब्द बच्चों के लिए आशीर्वाद का काम करते हैं। जब बच्चा कोई गलती करे, तो उस पर चिल्लाने के बजाय बेहद शांत मन से संवाद करें। उसे समझाएं कि गलती सुधारकर आगे कैसे बढ़ना है। सकारात्मकता एक अभ्यास है। इसके परिणाम तुरंत नहीं दिखते, इसलिए पालकों को बिना विचलित हुए लगातार धैर्य बनाए रखना होगा।
बीके स्वाति दीदी ने कहा कि बिना आत्मिक शक्ति के हर समय सकारात्मक बने रहना बेहद कठिन है। इसके समाधान के रूप में उन्होंने उपस्थित सभी पालकों को प्रतिदिन सहज राजयोग मेडिटेशन अपनाने का संकल्प दिलाया। उन्होंने समझाया कि ध्यान के माध्यम से हम सीधे परमात्मा से शांति, प्रेम और पवित्रता की किरणें प्राप्त करते हैं। जब माता-पिता स्वयं को इस ईश्वरीय ऊर्जा से चार्ज करेंगे, तो उनके स्वभाव का तनाव स्वतः समाप्त हो जाएगा। शांत और सशक्त माता-पिता ही एक सकारात्मक परिवेश का निर्माण कर सकते हैं, जिससे बच्चों का मानसिक और आध्यात्मिक विकास तेजी से होता है।
बीके स्वाति दीदी ने कहा कि बच्चों को अच्छा इंसान बनाने के लिए सबसे पहले माता-पिता का संतुलित रहना बहुत ज़रूरी है। बच्चों को सिर्फ़ पढ़ाई या सुविधाएँ ही नहीं चाहिए, बल्कि उनका सुना जाना और समझा जाना भी उतना ही ज़रूरी है। जब माता-पिता प्यार और धैर्य से बच्चों की बात सुनते हैं, तो बच्चे भी खुलकर अपनी भावनाएँ साझा करते हैं।
शिविर में अभिभावकों को आसान अभ्यास और सकारात्मक सोच के छोटे-छोटे तरीके बताए जा रहे हैं, जिन्हें वे घर जाकर आसानी से अपना सकते हैं। अभिभावकों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम आज के समय में बहुत आवश्यक हैं, जो परिवारों में आपसी समझ और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की नींव मजबूत करते हैं। कार्यक्रम में शामिल अभिभावकों ने बताया कि यहाँ बताई गई छोटी-छोटी बातें उन्हें अपने बच्चों को समझने में मदद कर रही हैं। कई पालकों ने कहा कि वे अब बच्चों की गलतियों पर तुरंत डांटने के बजाय पहले शांत होकर बात करने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे घर का माहौल पहले से बेहतर हो रहा है।
ईश्वरीय सेवा में,
बीके स्वाति
राजयोग भवन, बिलासपुर

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