प्रेस विज्ञप्ति।
*तुलना नहीं, प्रोत्साहन से बढ़ता है बच्चों का आत्मविश्वास — बीके स्वाति दीदी*
07 मई 2026, बिलासपुर।
आज के प्रतिस्पर्धात्मक दौर में बच्चों पर पढ़ाई, प्रदर्शन और हर क्षेत्र में आगे बढ़ने का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। ऐसे समय में बच्चों का आत्मविश्वास बनाए रखना अभिभावकों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी बन गई है। इसी उद्देश्य को लेकर प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय बिलासपुर की मुख्य शाखा टेलीफोन एक्सचेंज रोड स्थित राजयोग भवन में आयोजित “पेरेंटिंग विथ वैल्यूज़” शिविर में सेवाकेंद्र संचालिका बीके स्वाति दीदी ने “बच्चों में आत्मविश्वास कैसे बढ़ाएं” विषय पर गहराई से मार्गदर्शन दिया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बीके स्वाति दीदी ने कहा कि हर बच्चा अपने आप में विशेष होता है। सभी बच्चों की क्षमता, रुचि और सीखने का तरीका अलग होता है, इसलिए बच्चों की तुलना दूसरों से करना उनके आत्मविश्वास को कमजोर कर देता है। जब माता-पिता बार-बार यह कहते हैं कि देखो दूसरा बच्चा कितना अच्छा है या तुम ऐसा क्यों नहीं कर सकते, तब बच्चे धीरे-धीरे खुद को कमज़ोर और असफल समझने लगते हैं।
उन्होंने कहा कि बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाने का सबसे आसान तरीका है उन्हें स्वीकार करना और उनकी छोटी-छोटी कोशिशों की भी सराहना करना। यदि बच्चा कोई छोटा कार्य भी अच्छी तरह करता है, तो उसकी प्रशंसा अवश्य करें। माता-पिता के दो सकारात्मक शब्द बच्चों के मन में नई ऊर्जा भर देते हैं। बच्चे वही बनते हैं, जैसा वे अपने बारे में बार-बार सुनते हैं। यदि घर में उन्हें यह महसूस कराया जाए कि वे योग्य, अच्छे और सक्षम हैं, तो वे हर चुनौती का सामना करने का साहस विकसित कर लेते हैं।
बीके स्वाति दीदी ने कहा कि कई बार माता-पिता अनजाने में बच्चों की गलतियों को इतना बड़ा बना देते हैं कि बच्चा डरने लगता है। गलती होने पर डांटने या अपमानित करने के बजाय शांत रहकर समझाना अधिक प्रभावी होता है। जब बच्चे को यह विश्वास होता है कि माता-पिता उसका साथ देंगे, तब उसके भीतर आत्मविश्वास मजबूत होता है।
बीके स्वाति दीदी ने यह भी कहा कि बच्चों को केवल पढ़ाई में अच्छा बनने के लिए प्रेरित न करें, बल्कि उन्हें जीवन में अच्छे संस्कार, अच्छे व्यवहार और सकारात्मक सोच का महत्व भी सिखाएं। हर बच्चा पढ़ाई, खेल, कला, संगीत या किसी अन्य क्षेत्र में विशेष प्रतिभा लेकर आता है। माता-पिता का कार्य उस प्रतिभा को पहचानकर उसे आगे बढ़ाना है, न कि अपनी इच्छाएँ बच्चों पर थोपना।
शिविर में उपस्थित अभिभावकों को संबोधित करते हुए बीके स्वाति दीदी ने कहा कि बच्चों के सामने माता-पिता का व्यवहार भी बहुत महत्वपूर्ण होता है। यदि माता-पिता छोटी-छोटी बातों में घबरा जाते हैं, नकारात्मक बातें करते हैं या स्वयं आत्मविश्वास की कमी महसूस करते हैं, तो उसका सीधा असर बच्चों पर पड़ता है। इसलिए बच्चों को आत्मविश्वासी बनाने के लिए पहले माता-पिता को स्वयं सकारात्मक और मजबूत बनना होगा।
उन्होंने राजयोग मेडिटेशन के महत्व को बताते हुए कहा कि ध्यान के अभ्यास से मन शांत और स्थिर बनता है। जब माता-पिता स्वयं तनावमुक्त और सकारात्मक रहते हैं, तो वही ऊर्जा बच्चों तक भी पहुँचती है। प्रतिदिन कुछ मिनट का मेडिटेशन बच्चों के मन से डर, चिंता और हीन भावना को कम करने में बहुत सहायक होता है।
कार्यक्रम में शामिल अभिभावकों ने भी अपने अनुभव साझा किए और बताया कि शिविर में बताई जा रही बातें उनके पारिवारिक जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। कई पालकों ने कहा कि वे अब बच्चों की कमियों पर ध्यान देने के बजाय उनकी अच्छाइयों को पहचानने और प्रोत्साहित करने का प्रयास कर रहे हैं।
ईश्वरीय सेवा में,
बीके स्वाति
राजयोग भवन, बिलासपुर