दल्ली राजहरा में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया ईद-उल-अजहा का त्योहार, दी गई देश में अमन-चैन की दुआ
दल्ली राजहरा।
लौह नगरी दल्ली राजहरा में गुरुवार को मुस्लिम समाज द्वारा त्याग, समर्पण और अमली इबादत का त्योहार ईद-उल-अजहा (बकरीद) पारंपरिक अकीदत और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस मुबारक मौके पर जामा मस्जिद में विशेष नमाज अदा की गई, जिसमें बड़ी संख्या में समाज जनों ने हिस्सा लिया और देश में अमन-चैन, तरक्की व भाईचारे के लिए दुआएं मांगी।
नमाज से पूर्व जामा मस्जिद के ईमाम हाफिज अब्दुल बशीर साहब ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित (खिताब) करते हुए कहा कि कुर्बानी का असल मकसद अल्लाह की नजदीकी हासिल करना है। उन्होंने इस्लाम की शिक्षाओं पर प्रकाश डालते हुए त्योहार के महत्व को रेखांकित किया।
सिर्फ जानवर की नहीं, अपने अंदर की बुराइयों की कुर्बानी दें: मुश्ताक अहमद
मुस्लिम समाज के अध्यक्ष (सदर) मुश्ताक अहमद अंसारी ने समाज को संबोधित करते हुए ईद-उल-अजहा की मुबारकबाद दी। उन्होंने अपने संदेश में कहा:
"ईद-उल-अजहा मुसलमानों का दूसरा सबसे बड़ा मजहबी त्योहार है। यह हमें हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम और हजरत इस्माइल अलैहिस्सलाम की उस महान कुर्बानी की याद दिलाता है, जो उन्होंने अल्लाह के हुक्म पर दी थी। इस्लाम एक मुकम्मल जीवन शैली है जो हमें मोहब्बत, भाईचारे और त्याग का संदेश देती है।"
अध्यक्ष मुश्ताक अहमद ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि ईद-उल-अजहा सिर्फ जानवर जबहा (कुर्बान) करने का नाम नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर इंसान अपने भीतर के गुरूर, हसद (जलन), झूठ, लालच और नफरत जैसी बुराइयों को खत्म नहीं करता, तो कुर्बानी का असल मकसद पूरा नहीं होता। कुरआने पाक का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि अल्लाह तक न तो गोश्त पहुंचता है और न खून, बल्कि सिर्फ इंसान की नीयत और तकवा (परहेजगारी) पहुंचती है।
गरीबों की मदद और भाईचारे का संदेश
प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि यह त्योहार समाज के गरीब और जरूरतमंद तबके का ख्याल रखने की सीख देता है। इसी मंतव्य से कुर्बानी के गोश्त का एक हिस्सा गरीबों में बांटा जाता है ताकि वे भी ईद की खुशियों में बराबर शरीक हो सकें। उन्होंने समाज से अपील की कि आज हमारा मुआशरा (समाज) नफरत और खुदगर्जी जैसी समस्याओं से जूझ रहा है, ऐसे में अगर हम इस त्योहार के सच्चे संदेश को अपना लें, तो चारों ओर मोहब्बत और शांति का माहौल बन सकता है।
नमाज के बाद गले मिलकर दी मुबारकबाद
ईद के इस पावन मौके पर मुस्लिम समाज के लोग नए वस्त्र पहनकर मस्जिद पहुंचे। नमाज के बाद सभी ने एक-दूसरे को गले लगाकर ईद की मुबारकबाद दी और खुशियां बांटीं।
इस अवसर पर मुख्य रूप से उपस्थित रहे:
मस्जिद के ईमाम जनाब अब्दुल बशीर साहब, नायाब ईमाम जनाब अकीक नूरी साहब, शेख नय्यूम, सऊद आलम, शेख असलम, नवाब बड़गुजर, अंसार भाई, हाफिज मुन्नवर साहब, हाजी मजीद, गुलाम शिमनानी, अशरफ मेमन, इजराइल शाह (वकील), शफी बक्श, नदीम बड़गुजर, निजामुद्दीन फौजी, सुहैल फारूकी, एस. अंसारी, जाहिर भाई, जुबैर अहमद, आरिफ भाई, निजाम भाई, कादिर भाई, इकराम रहमानी, राजा पठान, न्याज भाई, गुड्डू भाई, मोहम्मद फिरोज, मोहम्मद फरीद, मोहम्मद कलीम बड़गुजर, असलम कुरैशी, राजा हसन, अकरम हुसैन, आलम भाई फौजी, नूर आलम अंसारी, मोहम्मद फारूक, आजाद भाई, शह नवाज भाई, इमरान ईम्मू, फराज हुसैन, मोहसिन, अक्की सलामत, नफीस बड़गुजर, याशीर फारूकी, मुस्तकीम अली, अरहम शेख, साहिल अन्सारी, अरशद बक्श, इरफान मंसूरी, मोहम्मद आमिर, गुड्डन भाई, जुगनू भाई सहित भारी संख्या में मुस्लिम समाज के गणमान्य नागरिक और युवा उपस्थित थे।