*बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए 'संस्कार' और 'समय' सबसे बड़े उपहार: बीके स्वाति दीदी*

*बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए 'संस्कार' और 'समय' सबसे बड़े उपहार: बीके स्वाति दीदी*

*बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए 'संस्कार' और 'समय' सबसे बड़े उपहार: बीके स्वाति दीदी*
प्रेस विज्ञप्ति

*बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए 'संस्कार' और 'समय' सबसे बड़े उपहार: बीके स्वाति दीदी*


30अप्रैल 2026, बिलासपुर। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय बिलासपुर की मुख्य शाखा टेलीफोन एक्सचेंज रोड स्थित राजयोग भवन में सात दिवसीय "बाल संस्कार शिविर" का आज भव्य समापन समारोह संपन्न हुआ। 
इस अवसर पर सेवाकेंद्र संचालिका ब्रह्माकुमारी स्वाति दीदी ने उपस्थित अभिभावकों को संबोधित करते हुए कहा कि आज के चुनौतीपूर्ण दौर में बच्चों को 'प्राइस' नहीं 'प्राइज' (समय) दें। वर्तमान समय में माता-पिता अपनी व्यस्तता के कारण बच्चों को महंगे खिलौने और गैजेट्स तो दे देते हैं, लेकिन अपना कीमती समय नहीं दे पाते। उन्होंने स्पष्ट किया कि बच्चों के लिए माता-पिता का साथ किसी भी महंगे उपहार से बड़ा होता है। बच्चों को आपसे वस्तुओं की नहीं, बल्कि आपके प्रेम, ध्यान और समय की अपेक्षा होती है। 
स्वाति दीदी ने जोर देकर कहा कि बच्चे वह नहीं करते जो हम उन्हें सिखाते हैं, बल्कि वे वह करते हैं जो हमें करते हुए देखते हैं। यदि हम चाहते हैं कि बच्चे मोबाइल का कम उपयोग करें या बड़ों का सम्मान करें, तो पहले हमें स्वयं के आचरण में वह बदलाव लाना होगा। 2. तुलना करने से बचें। हर बच्चा अपने आप में अद्वितीय है। दूसरों के बच्चों के साथ अपने बच्चे की तुलना करना उनके आत्मविश्वास को खत्म कर देता है। हमें उनकी छोटी-छोटी उपलब्धियों पर उन्हें प्रोत्साहित करना चाहिए। 3. संस्कारों का बीजारोपण का समय अभी है। बचपन वह समय है जब बच्चों की नींव रखी जाती है। उन्हें बचपन से ही मेडिटेशन, परोपकार और नैतिक मूल्यों की शिक्षा देनी चाहिए। 4. सकारात्मक भाषा का प्रयोग करें। बच्चों से बात करते समय 'तुमसे नहीं होगा' या 'तुम गलत हो' जैसे नकारात्मक शब्दों के बजाय 'तुम प्रयास करो' या 'तुम बहुत अच्छा कर सकते हो' जैसे शब्दों का प्रयोग करें।
आज के दौर में बच्चों में बढ़ती मोबाइल और इंटरनेट की लत पर चिंता व्यक्त करते हुए स्वाति दीदी ने कहा कि हमें बच्चों को तकनीक का गुलाम नहीं, बल्कि मालिक बनाना सिखाना होगा। उन्होंने अभिभावकों को सलाह दी कि वे घर में एक 'डिजिटल फास्टिंग' समय तय करें, जहां पूरा परिवार मोबाइल छोड़कर एक-दूसरे से संवाद करे।
कैंप की गतिविधियों का प्रदर्शन
समारोह के दौरान समर कैंप में भाग लेने वाले बच्चों ने नृत्य, कविता, श्लोक, मंत्र, योग, कहानियों आदि का शानदार प्रदर्शन किया। बच्चों के भीतर आए सकारात्मक बदलाव को देखकर अभिभावकों ने भी अपने अनुभव साझा किए और संस्थान के प्रति आभार व्यक्त किया।
सत्र के अंत में बीके स्वाति दीदी ने सभी माता-पिता को राजयोग मेडिटेशन का अभ्यास कराया और संकल्प कराया कि वे अपने घर में शांति और प्रेम का वातावरण बनाए रखेंगे, ताकि बच्चों का विकास एक स्वस्थ परिवेश में हो सके। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अभिभावक, प्रबुद्ध नागरिक और संस्थान के सदस्य उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में सभी बच्चों को प्रमाण पत्र एवं गिफ्ट्स प्रदान की गई। शिविर में 100 से अधिक बच्चों ने भाग लिया।
ईश्वरीय सेवा में
बीके स्वाति 
राजयोग भवन, बिलासपुर

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