*ईश्वर को मित्र बनाकर लिखें अपने मन की बात - बीके स्वाति दीदी*

*ईश्वर को मित्र बनाकर लिखें अपने मन की बात - बीके स्वाति दीदी*

*ईश्वर को मित्र बनाकर लिखें अपने मन की बात - बीके स्वाति दीदी*
प्रेस विज्ञप्ति
*ईश्वर को मित्र बनाकर लिखें अपने मन की बात - बीके स्वाति दीदी*

29 अप्रैल 2026, बिलासपुर। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की मुख्य शाखा, टेलीफोन एक्सचेंज रोड स्थित राजयोग भवन में आयोजित सात दिवसीय 'बाल संस्कार शिविर' अपने अंतिम पड़ाव की ओर है। शिविर के छठवें दिन बच्चों को एक बेहद अनूठा और भावनात्मक अनुभव कराया गया। सेवाकेंद्र संचालिका बीके स्वाति दीदी ने शिविर में शामिल बच्चों को 'परमात्मा को पत्र' लिखना सिखाया। यह सत्र बच्चों के लिए न केवल लेखन का अभ्यास था, बल्कि अपने भीतर की भावनाओं को ईश्वर के समक्ष व्यक्त करने का एक सशक्त माध्यम बना। इसके साथ ही बच्चों को राजयोग भवन में स्थित 250 मूर्तियों से सुसज्जित भव्य आध्यात्मिक संग्रहालय का अवलोकन भी कराया गया।
शिविर के छठे दिन की शुरुआत योगाभ्यास और मधुर संगीत के साथ हुई। इसके पश्चात बीके स्वाति दीदी ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि परमात्मा हमारा परम पिता, शिक्षक और सच्चा मित्र है। जिस तरह हम अपने माता-पिता या मित्रों को पत्र लिखकर अपनी बातें बताते हैं, ठीक वैसे ही हम ईश्वर को भी अपने दिल की बात लिखकर बता सकते हैं। उन्होंने बच्चों को समझाया कि जब हम कागज पर अपनी गलतियां, अपनी इच्छाएं और अपनी कृतज्ञता लिखते हैं, तो हमारा मन हल्का हो जाता है और हमें सही मार्ग पर चलने की शक्ति मिलती है।
राजयोग भवन का शांत वातावरण उस समय और भी गंभीर हो गया जब नन्हें हाथों ने पूरी तन्मयता के साथ लिखना शुरू किया। किसी बच्चे ने अपनी बुरी आदतों को छोड़ने का संकल्प पत्र लिखा, तो किसी ने अपनी पढ़ाई में सफलता के लिए परमात्मा से मदद मांगी। कई बच्चों ने अपने माता-पिता के अच्छे स्वास्थ्य और सुखद भविष्य की कामना करते हुए ईश्वर का धन्यवाद किया।
बीके स्वाति दीदी ने बच्चों को प्रेरित करते हुए कहा परमात्मा को लिखा गया पत्र आपके और ईश्वर के बीच का एक गुप्त और पवित्र संवाद है। जब आप अपनी कमियों को पत्र में लिखकर ईश्वर को समर्पित कर देते हैं, तो वह बोझ आपसे हट जाता है और आप स्वयं को हल्का महसूस करते हैं।
शिविर का मुख्य आकर्षण राजयोग भवन में बना अद्वितीय आध्यात्मिक संग्रहालय रहा। बच्चों को इस संग्रहालय का अवलोकन कराया गया, जिसमें 250 सजीव व सुंदर मूर्तियों के माध्यम से जीवन के सत्यों को दर्शाया गया है। मूर्तियों की दिव्यता और शांति ने बच्चों के कोमल मन को गहराई तक छू लिया, जिससे वे अपार शांति और ख़ुशी का अनुभव किये। बीके संतोषी दीदी ने मूर्तियों के माध्यम से बच्चों को कर्मों की गति, आत्मा का स्वरूप और जीवन जीने की कला के बारे में विस्तार से समझाया। बच्चों ने इस भ्रमण के दौरान न केवल कला का आनंद लिया, बल्कि गहरे आध्यात्मिक रहस्यों को भी आसानी से समझा।
बीके स्वाति दीदी ने बताया कि 24 अप्रैल से शुरू हुए इस शिविर में बिलासपुर शहर के विभिन्न क्षेत्रों से आए बच्चे हिस्सा ले रहे हैं। शिविर का उद्देश्य बच्चों में नैतिक मूल्यों, अनुशासन और एकाग्रता का विकास करना है। पिछले छह दिनों में बच्चों ने राजयोग मेडिटेशन, समय का प्रबंधन, बड़ों का सम्मान और सात्विक आहार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर शिक्षा प्राप्त की। यह सात दिवसीय बाल संस्कार शिविर 30 अप्रैल को एक भव्य समारोह के साथ संपन्न होगा। समापन अवसर पर बच्चों द्वारा शिविर में सीखी गई बातों की प्रस्तुति दी जाएगी। सेवाकेंद्र की ओर से अभिभावकों को भी आमंत्रित किया गया है ताकि वे देख सकें कि इन सात दिनों में बच्चों के व्यवहार और सोच में क्या सकारात्मक परिवर्तन आए हैं।
राजयोग भवन में आयोजित इस शिविर ने बच्चों को तकनीकी दुनिया से दूर, अपनी जड़ों और आध्यात्मिक मूल्यों से जुड़ने का एक सुनहरा अवसर प्रदान किया है। परमात्मा को पत्र लिखने के इस सत्र ने बच्चों के कोमल मन पर अमिट छाप छोड़ी है, जो उनके भविष्य निर्माण में सहायक सिद्ध होगी।
ईश्वरीय सेवा में,
बीके स्वाति
ब्रह्माकुमारीज़, बिलासपुर

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