भोला अरजाल बाबा जयंती धूमधाम से मनाई गई, देवार समाज ने रखा आदिवासी दर्जा देने का मांग पत्र

भोला अरजाल बाबा जयंती धूमधाम से मनाई गई, देवार समाज ने रखा आदिवासी दर्जा देने का मांग पत्र

भोला अरजाल बाबा जयंती धूमधाम से मनाई गई, देवार समाज ने रखा आदिवासी दर्जा देने का मांग पत्र
भोला अरजाल बाबा जयंती धूमधाम से मनाई गई, देवार समाज ने रखा आदिवासी दर्जा देने का मांग पत्र
देवार समाज के आराध्य देव भोला अरजाल बाबा की जयंती 06 अप्रैल, सोमवार को ग्राम अरजाल (जिला बालोद) में हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाई गई। इस अवसर पर न केवल आसपास के गांवों से बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ से श्रद्धालु बाबा के दर्शन के लिए पहुंचे। अड़जाल वाले बाबा, जिन्हें बैग के नाम से भी जाना जाता है, के प्रति लोगों की गहरी आस्था देखने को मिली।
कार्यक्रम का आयोजन भोला बाबा देवार समाज कल्याण समिति, जिला बालोद द्वारा किया गया, जिसमें समस्त नगरवासियों एवं ग्रामीणों को आमंत्रित किया गया था। समारोह के मुख्य अतिथि लाल निवेन्द्र सिंह टेकाम (अध्यक्ष, नगर पंचायत डौण्डी लो.) रहे, जबकि अध्यक्षता प्रितम सिंह मेरावी (शोधार्थी, एम.पी. सौरागढ़) ने की। विशेष अतिथियों में चिरपाल नेताम (अध्यक्ष देवार समाज छत्तीसगढ़), भोला नेताम (जनपद उपाध्यक्ष डौण्डी), तोरण लाल साहू (नगर पालिका अध्यक्ष, दल्ली राजहरा) सहित कई जनप्रतिनिधि एवं समाजसेवी शामिल हुए।
इस दौरान अतिथियों का सम्मान समारोह आयोजित कर समाज के पदाधिकारियों द्वारा मोमेंटो एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया गया। कार्यक्रम के कार्यभारी अध्यक्ष अनुप सोरी के नेतृत्व में आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
समारोह के दौरान समाज के मुखिया द्वारा अतिथियों को मांग पत्र सौंपा गया, जिसमें देवार समाज को आदिवासी समाज में शामिल करने की मांग की गई। उन्होंने बताया कि देवार समाज पहले घुमंतू जीवन शैली में था, लेकिन अब स्थायी रूप से निवास कर समाज के विकास की दिशा में अग्रसर है। इसलिए केंद्र और राज्य सरकार से समाज को संरक्षण देते हुए आदिवासी दर्जा प्रदान करने की मांग की गई।

और उन्होंने कहा कि हम सर्व देवार समाज के लोग है। यह की हमारी जाति के सदस्यों का सरनेम टेकाम, सोरी, नेताम, मंडावी, मरकाम, मरई, सोनवानी, पुड़ो, इत्यादि आदिवासी (गोंड) सरनेम पर आधारित है यहां तक हमारे समाज में विवाह मृत्यु एवं देव कार्य पूर्णतः आदिवासी रीति रिवाज से अब तक संपन्न होते आया है।

कंकालीन बुढीमाई बुढादेव ठाकुर देव हमारे आराध्य देवी देवता की श्रेणी में आते पूर्णतः है आदिवासी संस्कृति का पालन करने के बाद भी हमें शासन द्वारा अनुसुचित जाति की श्रेणी में रख दिया गया है जब की नहार, पारधी, बसोड़ को आदिवासी का दर्जा मिल गया है।

शिक्षा के अभाव में जागरूक नही होने के कारण गरीबी के चलते भीक्षा मांग कर गोदना गोदाकर बंदर नचाकर, नांच गाना कर के घुमन्तु की की जिन्दगी जीते हुये जीवन यापन करते आ रहे थे, किन्तु समय के साथ हमारे समाज के लोग भी शिक्षित और जागरूक हो रहें है।
हम चाहते है, कि उपरोक्त विषय के संबंध में हमारी मांग को संसद सभा एवं राज्य सभा तक पहुंचाने में सहयोग प्रदान करे ताकि हमें आदिवासी का दर्जा मिल सके ।
हमारा समाज सदैव आपका आभारी रहेगा ।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाज के लोग उपस्थित रहे और बाबा के प्रति अपनी आस्था प्रकट करते हुए जयंती को उत्सव के रूप में मनाया।

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