*साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं के संपादकों का राष्ट्रीय सम्मेलन इंदौर में संपन्न*
*‘वीणा की वाणी’ अंतर्गत दो दिवसीय आयोजन में साहित्य, पत्रकारिता और तकनीक पर हुआ गंभीर विमर्श*
साहित्यिक चेतना के प्रमुख केंद्र इंदौर में ‘वीणा की वाणी’ शीर्षक के अंतर्गत देशभर से आए साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं के संपादकों का दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन सफलतापूर्वक आयोजित हुआ। मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी एवं संस्कृति परिषद द्वारा देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित इस सम्मेलन ने साहित्य, पत्रकारिता और तकनीकी के त्रिकोणीय संबंधों पर गंभीर एवं बहुआयामी दृष्टिकोण प्रस्तुत किया।
सम्मेलन का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ, जिसमें अनेक विशिष्ट साहित्यकारों, संपादकों एवं शिक्षाविदों की गरिमामयी उपस्थिति रही। स्वागत उद्बोधन में मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी के निदेशक डॉ. विकास दवे ने कहा कि साहित्य के क्षेत्र में सार्थक कार्य हेतु प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि समरसता और सहयोग की भावना आवश्यक है। उन्होंने इस सम्मेलन को विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं को एक सूत्र में पिरोने और उन्हें ‘एक परिवार’ के रूप में स्थापित करने का महत्वपूर्ण प्रयास बताया।
इस अवसर पर आदरणीय डॉ. परमजोत सिंह ‘येशू’ की गरिमामयी उपस्थिति एवं उद्बोधन विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। उन्होंने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मेलन साहित्यिक पत्रिकाओं को प्रतिस्पर्धा से बाहर निकालकर एक परिवार में रूपांतरित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने आगे कहा कि यह विचारधारा युगधारा में निरंतर प्रवाहित होती रहेगी बोधि विहार साहित्यिक यात्रा सम्पादिका के साथ यहाँ उपस्थित प्रत्येक पत्रिका उनके लिए अपनी ही पत्रिका के समान है। सम्मेलन के दौरान विभिन्न सत्रों में साहित्यिक पत्रकारिता की वर्तमान चुनौतियों, तकनीकी परिवर्तन और पत्र-पत्रिकाओं की भूमिका पर सार्थक चर्चा हुई। इस आयोजन ने साहित्यिक जगत में संवाद, सहयोग और समन्वय की नई संभावनाओं को सुदृढ़ किया।
यह राष्ट्रीय सम्मेलन साहित्यिक एकता, संवाद और रचनात्मक सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हुआ, जो भविष्य में साहित्यिक गतिविधियों को नई दिशा प्रदान करेगा। प्रतिभागियों ने इसे वर्तमान परिप्रेक्ष्य में जरूरी आयोजन कहा जिससे साहित्यिक पत्र पत्रिकाओं के प्रति पाठकों मोम जागरुकता का संदेश जायेगा।