आस्था और चमत्कार का संगम: भिलाई के नारधा धाम में 350 वर्षों से अक्षुण्ण है गोबर से बनी हनुमान प्रतिमा

आस्था और चमत्कार का संगम: भिलाई के नारधा धाम में 350 वर्षों से अक्षुण्ण है गोबर से बनी हनुमान प्रतिमा

आस्था और चमत्कार का संगम: भिलाई के नारधा धाम में 350 वर्षों से अक्षुण्ण है गोबर से बनी हनुमान प्रतिमा
आस्था और चमत्कार का संगम: भिलाई के नारधा धाम में 350 वर्षों से अक्षुण्ण है गोबर से बनी हनुमान प्रतिमा

दुर्ग (छत्तीसगढ़): छत्तीसगढ़ की पावन धरा अपने आँचल में कई रहस्य और आध्यात्मिक चमत्कार समेटे हुए है। इन्ही में से एक अनूठा केंद्र है दुर्ग-भिंभौरी मार्ग पर स्थित नारधा गांव का बाबा रुक्खड़नाथ धाम। यहाँ स्थापित हनुमान जी की प्रतिमा न केवल श्रद्धा का केंद्र है, बल्कि विज्ञान और तर्क से परे एक जीवंत चमत्कार भी है।
सुरहीन गाय के गोबर से निर्मित है प्रतिमा
इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहाँ के हनुमान जी का स्वरूप है। पुजारी सुरेंद्र गिरी गोस्वामी के अनुसार, यह प्रतिमा किसी पत्थर या धातु की नहीं, बल्कि सुरहीन गाय के गोबर से बनी है। आश्चर्य की बात यह है कि लगभग 350 वर्षों से यह प्रतिमा जस की तस बनी हुई है। समय की मार और मौसम के बदलाव का इस गोबर से बनी मूरत पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है, जो अपने आप में एक ईश्वरीय चमत्कार माना जाता है।

बाबा रुक्खड़नाथ की तपोभूमि और सिद्धियाँ
मान्यता है कि औघड़ बाबा रुक्खड़नाथ एक महान तपस्वी थे। उन्होंने ही सदियों पहले इस प्रतिमा का निर्माण किया था। बाबा की सिद्धियों की गाथा आज भी जनमानस में जीवित है। कहा जाता है कि एक बार बाबा ने अपनी देह ग्राम की समाधि में रखी और उसी क्षण 150 किलोमीटर दूर खैरागढ़ में प्रकट हो गए। आज भी खैरागढ़ में बाबा की भभूती और पिंड जागृत अवस्था में पूजे जाते हैं।
कुंड के जल से दूर होते हैं रोग
मंदिर परिसर में एक पवित्र कुंड स्थित है, जिसके जल को ग्रामीण 'अमृत' के समान मानते हैं। भक्तों का अटूट विश्वास है कि इस कुंड में स्नान करने से चर्म रोग (Skin diseases) जैसे विकार स्वतः समाप्त हो जाते हैं। मंदिर में एक प्राचीन चूल्हा और नगाड़ा भी मौजूद है, जिसकी गूंज पहले मीलों दूर तक सुनाई देती थी।
हनुमान जन्मोत्सव पर उमड़ा जनसैलाब
हाल ही में श्री हनुमान जन्मोत्सव के पावन अवसर पर मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना, अभिषेक और भव्य श्रृंगार किया गया। इस अवसर पर हनुमान भक्त प्रशांत कुमार शिरसागर ने बताया कि यह क्षेत्र का सबसे सिद्ध हनुमान मंदिर है, जहाँ आने वाले हर भक्त की मनोकामना पूर्ण होती है।
कार्यक्रम के दौरान प्रशांत कुमार शिरसागर के साथ अरुण बेरी, ओम, पीयूष शिरसागर, दत्ता सर और ब्रह्मानंद राव सहित बड़ी संख्या में हनुमान भक्त उपस्थित रहे और धर्म लाभ लिया।

"जय हनुमान! गाय की पूंछ में हनुमान जी का वास माना जाता है, और गोबर से बनी यह दिव्य प्रतिमा उसी अटूट आस्था का प्रमाण है।"

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