अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च 2026: 'देने से बढ़ती है ताकत' के संदेश के साथ मनाया जाएगा महिला सशक्तिकरण का वैश्विक पर्व हर वर्ष 8 मार्च को मनाया जाने वाला अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस महिलाओं की उपलब्धियों का सम्मान और समान अधिकारों की लड़ाई की याद दिलाता है. मास्टर ऑफ सोशल वर्क उषा क्षीरसागर

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च 2026: 'देने से बढ़ती है ताकत' के संदेश के साथ मनाया जाएगा महिला सशक्तिकरण का वैश्विक पर्व हर वर्ष 8 मार्च को मनाया जाने वाला अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस महिलाओं की उपलब्धियों का सम्मान और समान अधिकारों की लड़ाई की याद दिलाता है. मास्टर ऑफ सोशल वर्क उषा क्षीरसागर

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च 2026: 'देने से बढ़ती है ताकत' के संदेश के साथ मनाया जाएगा महिला सशक्तिकरण का वैश्विक पर्व हर वर्ष 8 मार्च को मनाया जाने वाला अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस महिलाओं की उपलब्धियों का सम्मान और समान अधिकारों की लड़ाई की याद दिलाता है. मास्टर ऑफ सोशल वर्क उषा क्षीरसागर
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च 2026: 'देने से बढ़ती है ताकत' के संदेश के साथ मनाया जाएगा महिला सशक्तिकरण का वैश्विक पर्व हर वर्ष 8 मार्च को मनाया जाने वाला अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस महिलाओं की उपलब्धियों का सम्मान और समान अधिकारों की लड़ाई की याद दिलाता है. मास्टर ऑफ सोशल वर्क उषा क्षीरसागर

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2026: 'देने से बढ़ती है ताकत' के संदेश के साथ मनाया जाएगा महिला सशक्तिकरण का वैश्विक पर्व हर वर्ष 8 मार्च को मनाया जाने वाला अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस महिलाओं की उपलब्धियों का सम्मान और समान अधिकारों की लड़ाई की याद दिलाता हैपूरी दुनिया में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस हर साल 8 मार्च को मनाया जाता है. यह दिन महिलाओं की उपलब्धियों और उनके जज्बे को समर्पित होता है. अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस महिलाओं के अधिकारों, समानता, सम्मान और उनके सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक तथा राजनीतिक योगदान को सम्मान देने के लिए मनाया जाता है. मास्टर ऑफ सोशल वर्क उषा क्षीरसागर अपने विचार साझा करते हुए बताया

इंटरनेशनल विमेंस डे की हर साल एक थीम होती है. अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2026 की थीम यांनी दान से लाभ है. साल आठ मार्च . 2026 में थीम थी- सभी महिलाओं और लड़कियों के लिए: अधिकार, समानता सशक्तिकरण. अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के दिन जगह-जगह कार्यक्रम, जागरूकता अभियान, सेमिनार और सम्मान समारोह का आयोजन किया जाता है. इसका उद्देश्य महिलाओं को सशक्त बनाना और समाज में लैंगिक समानता को बढ़ावा देना है.

कैसे हुई अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की शुरुआत 
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की शुरुआत साल 1908 में 15000 कामकाजी महिलाओं ने अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में एक विशाल जुलूस निकाल कर की थी. इन महिलाओं ने अपने काम करने के घंटों को कम करने, बेहतर तनख्वाह और वोट डालने जैसे अपने अधिकारों के लिए अपनी लड़ाई शुरू की थी. उस समय इस आंदोलन से समाजिक दौर की सभ्य समाज में महिलाओं की हकीकत सामने आई थी. आज भी महिलाओं की उसी समाजिक स्थिती को सुधारने और महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए यह दिवस मनाया जाता है.

इस दिन मनाया गया था सबसे पहले अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 
सबसे पहले अमेरिका में सोशलिस्ट पार्टी के आह्वान पर महिला दिवस को 28 फरवरी 1909 को मनाया गया था. बाद में 1910 में सोशलिस्ट इंटरनेशनल के कोपेनहेगन सम्मेलन में इसे अंतरराष्ट्रीय दर्जा दिया गया. महिलाओं के इस आंदोलन को बड़ी कामयाबी मिली.

इस दिवस को अंतरराष्ट्रीय बनाने का आइडिया कहां से आया 
महिला दिवस को अंतरराष्ट्रीय बनाने का आइडिया एक महिला का ही था. क्लारा जेटकिन ने 1910 में कोपेनहेगन में कामकाजी महिलाओं की एक इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस के दौरान अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाने का सुझाव दिया. उस समय कॉन्फ्रेंस में 17 देशों की 100 महिलाएं मौजूद थीं. उन सभी ने इस सुझाव का समर्थन किया. इसके बाद साल 1911 में ऑस्ट्रिया, डेनमार्क, जर्मनी और स्विट्जरलैंड में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया था. 1975 में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस को आधिकारिक मान्यता उस वक्त दी गई थी जब संयुक्त राष्ट्र ने इसे सलाना तौर पर एक थीम के साथ मनाना शुरू किया. अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की पहली थीम थी 'सेलीब्रेटिंग द पास्ट, प्लानिंग फ़ॉर द फ्यूचर.'

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