*भागवत कथा: कृष्ण-सुदामा प्रसंग सुन भावविभोर हुए श्रोता, आंखों से आंसू छलक आए*
खरोरा
हम सभी माया में बंधे हुए है। सुख के लिए हम जो साधन जुटाते हैं एक दिन वही दुख का कारण बन जाता है। जो इन्द्रियों को वश में करता है, शरीर को वश में करता है वह सदैव कृष्ण का हो जाता है। मनुष्य को मोह-माया का त्याग कर भगवत भजन में मन लगाना चाहिए। उक्त बातें पुराना रामलीला मंच के पास बस्ती पारा माठ श्रीमती दुलारी सुरेंद्र वर्मा उपाध्यक्ष जनपद पंचायत तिल्दा अपने पोते के जन्मोत्सव के उपलक्ष में रखा गया है। की ओर से आयोजित हो रही संगीतमय श्रीमद् भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ सप्ताह के आठवें दिन बुधवार को कथावाचक भागवत मर्मज्ञा पंडित राजेश कृष्ण महाराज ने कही। कथा प्रसंग में पवित्र व्यास गद्दी से उन्होंने कृष्ण लीला, जरासंध सुदामा चरित्र, 24 गुरू कथा, परीक्षित मोक्ष कथा को विस्तार से बताया। सुदामा चरित्र का मार्मिक वर्णन करते हुए कथा व्यास ने कहा कि, मित्रता कैसे निभाई जाए यह भगवान श्री कृष्ण-सुदामा जी से समझ सकते हैं। उन्होंने कहा कि सुदामा अपनी पत्नी के आग्रह पर अपने मित्र (सखा) से सुदामा मिलने के लिए द्वारिका पहुंचे। उन्होंने कहा कि सुदामा द्वारिकाधीश के महल का पता पूछा और महल की ओर बढ़ने लगे द्वार पर द्वारपालों ने सुदामा को भिक्षा मांगने वाला समझकर रोक दिया। तब उन्होंने कहा कि वह कृष्ण के मित्र हैं। इस पर द्वारपाल महल में गए और प्रभु से कहा कि कोई उनसे मिलने आया है। अपना नाम सुदामा बता रहा है। जैसे ही द्वारपाल के मुंह से उन्होंने सुदामा का नाम सुना प्रभु सुदामा-सुदामा कहते हुए तेजी से द्वार की तरफ भागे सामने सुदामा सखा को देखकर उन्होंने उसे अपने सीने से लगा लिया। सुदामा ने भी कन्हैया-कन्हैया कहकर उन्हें गले लगाया और सुदामा को अपने महल में ले गए और उनका अभिनंदन किया। इस मार्मिक दृश्य को देखकर श्रोता भाव विभोर हो गए और आंखों से आंसू छलक आए। उन्होंने सुदामा और कृष्ण की झांकी पर फूलों की वर्षा की। कथा श्रवण करने बड़ी संख्या में रसिक श्रोतागण कथा पंडाल पहुंच धर्म लाभ अर्जित कर रहे हैं। 19मार्च से 27मार्च तक आयोजित हो रही भागवत कथा में गांव सहित आसपास गांव से भी बड़ी संख्या में रसिक श्रोता पहुंच रहे हैं। कथा का समय दोपहर 2 से शाम 6बजे तक है।
श्री रोहित वर्मा जी की खबर