राष्ट्रीय पत्रिका तथागत् संदेश द्वाराडॉ. परदेशीराम वर्मा को प्रेमचंद सम्मान 2026

राष्ट्रीय पत्रिका तथागत् संदेश द्वाराडॉ. परदेशीराम वर्मा को प्रेमचंद सम्मान 2026

राष्ट्रीय पत्रिका तथागत् संदेश द्वाराडॉ. परदेशीराम वर्मा को प्रेमचंद सम्मान 2026
राष्ट्रीय पत्रिका तथागत् संदेश द्वारा
डॉ. परदेशीराम वर्मा को प्रेमचंद सम्मान 2026


     राष्ट्रीय पत्रिका तथागत् संदेश द्वारा रायपुर के वृंदावन हाल में 08-03-26 को सम्मान समारोह एवं वैचारिक संगोष्ठी का आयोजन हुआ । समारोह में भिलाई नगर के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. परदेशीराम वर्मा को उपन्यास सम्राट प्रेमचंद सम्मान 2026 प्रदान किया गया । छत्तीसगढ़ तर्कशील परिषद रायपुर के तत्वावधान मं आयोजित इस समारोह के मुख्य अतिथि रायपुर के कमिश्नर तथा एम.डी. कांवरे थे । उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि छत्तीसगढ़ के समाजों की विशेषता स्वरूप और आंतरिक शक्ति को हम साहित्यकार डॉ. परदेशीराम वर्मा की रचनाओं में पाते हैं । सम्मान समारोह के अतिथि पूर्व अध्यक्ष छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग बी.एल. ठाकुर ने कहा कि डॉ. परदेशीराम वर्मा छत्तीसगढ़ के ऐसे लेखक हैं जिनकी रचनाओं को समाज विज्ञान और इतिहास में रूचि रखने वाले भी सहेज कर रखते हैं । बहुत बारीकी से वे छत्तीसगढ़ी समाज का शब्दांकन करते हैं । 


  वे आदिवासी समाज पर जो काम कर रहे हैं वह बाद में इतिहास में मूल्यांकित होगा । पूर्व आई.ए.एस. दिलीप वासनीकर ने कहा कि पत्र पत्रिकाओं में लगातार लेखन और संस्था, संगठन संचालन की सक्रियता डॉ. परदेशीराम वर्मा से सीखा जाना चाहिए । डॉ. जे.आर. सोनी ने कहा कि सतनामी समाज के गौरवशाली व्यक्त्तित्व देवदास बंजारे पर डॉ. परदेशीराम वर्मा लिखित जीवनी आरूगफूल मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग से पुरस्कृत है । इन्हें लगातार जो सम्मान मिला वह इनकी ईमानदारी और लेखन की श्रेष्ठता के कारण ही मिला । हमारे वरिष्ठ साहित्यकार हैं । हमने भी इनसे बहुत कुछ सीखा है ।
  इस अवसर पर दिल्ली विश्वविविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. रतनलाल, शत्रुहन साहू, सुनील रामटेके का वक्तव्य भी उल्लेखनीय रहा । 
  इस अवसर पर डॉ. आर.के. सुखदेवे लिखित पुस्तक संत गुरू घासीदास और उनका दर्शन पुस्तक का विमोचन हुआ । डॉ. परदेशीराम वर्मा ने विमोचन समारोह के बाद अपने वक्तव्य में कहा कि गुरू बाबा घासीदास पर यह दुर्लब शोधग्रंथ है । डॉ. सुखदेवे बालोद के पास जुंगेरा गांव में जन्में । उनके पास विशेष दृष्टि है । वे आडंबर दिखावा और समाज में मतभेद करने वालों के विरूद्ध आजीवन काम करते रहे । गहन शोध के बाद इस दुर्लभ ग्रंथ की रचना हुई जो नई पीढ़ी के लिए राह दिखाने वाली है । समारोह में भिलाई से शिक्षाविद्ध स्मिता वर्मा, नीतीश कुमार भी शामिल हुए । 
  सम्मान स्वरूप विशेष पगड़ी पहनाकर तथा स्मृति चिन्ह - अभिनंदन पत्र और नकद राशि प्रदान कर डॉ. आर.के. सुखदेवे एवं अतिथियों ने डॉ. परदेशीराम वर्मा को सम्मानित किया । 

डॉ. परदेशीराम वर्मा

Ads Atas Artikel

Ads Atas Artikel 1

Ads Center 2

Ads Center 3