*दुर्ग में मार्च शुरू होते ही जलसंकट की स्थिति बनना दुर्भाग्यपूर्ण - डॉ. प्रतीक उमरे*

*दुर्ग में मार्च शुरू होते ही जलसंकट की स्थिति बनना दुर्भाग्यपूर्ण - डॉ. प्रतीक उमरे*

*दुर्ग में मार्च शुरू होते ही जलसंकट की स्थिति बनना दुर्भाग्यपूर्ण - डॉ. प्रतीक उमरे*
*दुर्ग में मार्च शुरू होते ही जलसंकट की स्थिति बनना दुर्भाग्यपूर्ण - डॉ. प्रतीक उमरे*
दुर्ग नगर निगम के पूर्व एल्डरमैन भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे ने प्रशासनिक उदासीनता पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि मार्च माह शुरू होते ही दुर्ग में एक बार फिर गंभीर जलसंकट की स्थिति उत्पन्न हो गई है।उन्होंने इसे “निराशाजनक और लज्जास्पद” बताते हुए कहा कि वर्षों से चली आ रही योजनाएं केवल फाइलों और पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन तक सीमित हैं,जबकि आम नागरिक प्यासे रहने को मजबूर हैं।दुर्ग की जनता पिछले कई वर्षों से हर साल मार्च से ही पानी की किल्लत झेल रही है।इस बार भी फरवरी के अंतिम सप्ताह में ही पेयजल आपूर्ति प्रभावित होने लगी और मार्च के पहले सप्ताह में स्थिति पूरी तरह बिगड़ चुकी है।पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को दुरुस्त करने के नाम पर जितनी भी योजनाएं घोषित की गईं,वे सब कागजों पर ही रह गईं।बजट पास होता है,टेंडर निकलते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर काम नाममात्र का भी नहीं दिखता।नतीजा यह है कि दुर्ग के हजारों परिवार रोजाना पानी के लिए त्राहि-त्राहि करते हैं।महिलाएं और बच्चे घंटों लाइन में खड़े रहते हैं।उसके बावजूद प्रशासनिक अधिकारी अभी भी आंखें मूंदे बैठे हुए हैं।उन्होंने ठगड़ा बांध को भी प्रशासनिक लापरवाही का शिकार बताते हुए कहा कि ठगड़ा बांध कभी आसपास के क्षेत्र का जीवन रेखा था,लेकिन प्रशासन की घोर लापरवाही के कारण यह बांध अब सूखने की कगार पर पहुंच गया है।इसके सीधे परिणामस्वरूप आसपास क्षेत्रों में भूजल स्तर तेजी से गिर गया है,जिससे लोगों की पेयजल की समस्या विकराल रूप ले चुकी है।ठगड़ा बांध वर्षों तक आसपास के क्षेत्र का भूजल स्तर बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता रहा।बांध के पानी से रिचार्ज होने के कारण भूजल स्तर सामान्य बना रहता था और नागरिकों को पेयजल की कोई कमी नहीं होती थी।लेकिन पिछले कई वर्षों से प्रशासन द्वारा जल संरक्षण के कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए।परिणामस्वरूप बांध में पानी का स्तर लगातार घटता गया और आज यह सूखने की कगार पर है।

Ads Atas Artikel

Ads Atas Artikel 1

Ads Center 2

Ads Center 3