महिला दिवस विशेष: "आज की नारी के हाथों में दुनिया की डोर", समाज सेविका द्रौपदी साहू ने उठाई सुरक्षा की आवाज
महिला दिवस विशेष: "आज की नारी के हाथों में दुनिया की डोर", समाज सेविका द्रौपदी साहू ने उठाई सुरक्षा की आवाज
आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के पावन अवसर पर प्रखर समाज सेविका द्रौपदी साहू ने नारी शक्ति को नमन करते हुए समाज और सरकार के सामने महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण का एक सशक्त खाका पेश किया।
नारी के अस्तित्व को परिभाषित करते हुए उन्होंने कहा, "नारी केवल शक्ति नहीं, बल्कि प्रेम, करुणा और धैर्य का साक्षात प्रतीक है।" उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जब तक महिलाएं सुरक्षित महसूस नहीं करेंगी, तब तक राष्ट्र का सर्वांगीण विकास संभव नहीं है।
सुरक्षा के लिए 'फास्ट ट्रैक' समाधान की मांग
द्रौपदी साहू ने महिला सुरक्षा के प्रति गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए सरकार से कुछ ठोस कदम उठाने की अपील की है:
त्वरित न्याय: महिलाओं के खिलाफ अपराधों के निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक अदालतों की संख्या बढ़ाई जाए ताकि दोषियों को जल्द से जल्द सजा मिल सके।
पुलिस बल में सुधार: पुलिस महकमे में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और पुलिसकर्मियों को 'जेंडर सेंसिटिव' (लिंग संवेदनशील) बनाने की आवश्यकता है।
मजबूत बुनियादी ढांचा: सार्वजनिक स्थानों पर CCTV कैमरों की सघन निगरानी, पर्याप्त स्ट्रीट लाइट्स और कामकाजी महिलाओं के लिए सुरक्षित हॉस्टल की सुविधा अनिवार्य हो।
24/7 सहायता: हेल्पलाइन नंबरों (181/112) को और अधिक सुदृढ़ बनाने और सुरक्षा ऐप्स के व्यापक प्रचार-प्रसार पर उन्होंने बल दिया।
प्रेरक संदेश के साथ समापन
कार्यक्रम के अंत में उन्होंने अपनी पंक्तियों के माध्यम से महिलाओं के भीतर सोई हुई शक्ति को जगाते हुए कहा:
"कौन कहता है, दुनिया की नारी कमजोर है। > आज की नारी के हाथों में, दुनिया चलाने की डोर है।।"
द्रौपदी साहू का यह आह्वान सोशल मीडिया और स्थानीय हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।