अपनी सुरीली आवाज से संगीत प्रेमियों के दिलों पर राज करने वाली, 'स्वर कोकिला', भारत रत्न से सम्मानित, लता मंगेशकर की पुण्यतिथि पर सादर नमन संगीत प्रेमी समाजसेवी फिल्मफेन्स एनालीस प्रशांत कुमार क्षीरसागर

अपनी सुरीली आवाज से संगीत प्रेमियों के दिलों पर राज करने वाली, 'स्वर कोकिला', भारत रत्न से सम्मानित, लता मंगेशकर की पुण्यतिथि पर सादर नमन संगीत प्रेमी समाजसेवी फिल्मफेन्स एनालीस प्रशांत कुमार क्षीरसागर

अपनी सुरीली आवाज से संगीत प्रेमियों के दिलों पर राज करने वाली, 'स्वर कोकिला', भारत रत्न से सम्मानित, लता मंगेशकर की पुण्यतिथि पर सादर नमन संगीत प्रेमी समाजसेवी फिल्मफेन्स एनालीस प्रशांत कुमार क्षीरसागर
स्वर कोकिला लता मंगेशकर जी को भावभीनी श्रद्धांजलि
6 फरवरी भारतीय संगीत जगत के लिए एक अत्यंत दुःखद दिवस है। इसी दिन देश ने अपनी अनमोल धरोहर, भारत रत्न से सम्मानित, स्वर कोकिला लता मंगेशकर जी को खो दिया। उनका निधन केवल एक महान गायिका का जाना नहीं था, बल्कि भारतीय संस्कृति और संगीत की आत्मा का मौन हो जाना था।
लता मंगेशकर जी का जन्म 28 सितंबर 1929 को हुआ था। उन्होंने बहुत कम उम्र में संगीत की दुनिया में कदम रखा और अपने अद्वितीय, मधुर एवं भावपूर्ण स्वर से करोड़ों दिलों पर राज किया। उनके गाए हुए गीत प्रेम, भक्ति, देशभक्ति और जीवन के हर भाव को अभिव्यक्त करते हैं।
चार दशकों से भी अधिक समय तक उन्होंने हिंदी सहित अनेक भारतीय भाषाओं में हजारों गीत गाए। “ऐ मेरे वतन के लोगों”, “लग जा गले”, “तेरे बिना ज़िंदगी से” जैसे गीत आज भी लोगों की भावनाओं को जीवंत कर देते हैं। उनका स्वर केवल गीत नहीं था, वह एहसास था, स्मृति थी और प्रेरणा भी।
6 फरवरी को उनका निधन भले ही हो गया हो, लेकिन लता दीदी अपने गीतों के माध्यम से सदैव हमारे बीच जीवित रहेंगी। उनका योगदान भारतीय संगीत इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित रहेगा।
इस शोकपूर्ण अवसर पर हम सभी ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और हमें उनके आदर्शों से प्रेरणा लेने की शक्ति दें।
स्वर कोकिला लता मंगेशकर जी को कोटि-कोटि नमन।

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