बेमेतरा:-एनजीटी के आदेशों की उड़ रही धज्जियाँ: कंडरका में लाइसेंस खत्म, फिर भी धुआँ उगल रहे ईंट भट्टे — प्रशासन मौन
बेमेतरा:-एनजीटी के आदेशों की उड़ रही धज्जियाँ: कंडरका में लाइसेंस खत्म, फिर भी धुआँ उगल रहे ईंट भट्टे — प्रशासन मौन
मेघू राणा बेमेतरा | विशेष संवाददाता
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) द्वारा देशभर में अवैध ईंट भट्टों और वायु प्रदूषण पर सख्त रुख अपनाने के बावजूद बेमेतरा जिले के बेरला विकासखंड अंतर्गत ग्राम कंडरका में पर्यावरण कानूनों की खुलेआम धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं। यहाँ तीन मिट्टी ईंट चिमनी भट्टे अपनी अनुज्ञप्ति (लाइसेंस) की अवधि समाप्त होने के बाद भी बेखौफ होकर संचालित किए जा रहे हैं।
एक्सपायरी डेट के बाद भी 'धुआंधार' कारोबार
प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार, ग्राम कंडरका में संचालित इन प्रमुख भट्टों की वैधता काफी पहले समाप्त हो चुकी है:
हरेश कुमार बड़वानी: चिमनी ईंट भट्टा वैधता (09 अक्टूबर 2025 को समाप्त)
मुकेश बड़वानी: चिमनी ईंट भट्टा वैधता (25 दिसंबर 2025 को समाप्त)
सुरेश कुमार बड़वानी: चिमनी ईंट भट्टा वैधता (24 दिसंबर 2025 को समाप्त)
इसके बावजूद, तीनों भट्टों में प्रतिदिन बड़े पैमाने पर ईंट निर्माण जारी है। चिमनियों से निकल रहा घना काला धुआँ पूरे क्षेत्र को प्रदूषण की चादर में ढक रहा है, जो सीधे तौर पर कानून को चुनौती दे रहा है।
एनजीटी के स्पष्ट निर्देशों का उल्लंघन
NGT कई बार स्पष्ट कर चुका है कि बिना वैध पर्यावरण अनुमति और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सहमति के ईंट भट्टों का संचालन दंडनीय अपराध है। कंडरका का यह मामला पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 और वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम का गंभीर उल्लंघन है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह न केवल अवैध खनन की श्रेणी में आता है, बल्कि राजस्व की भी बड़ी हानि है।
स्वास्थ्य और खेती पर मंडराता संकट
भट्टों से निकलने वाली जहरीली गैसों और राख के कारण ग्रामीणों, विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों में सांस संबंधी बीमारियां बढ़ रही हैं। वहीं, खेतों में गिर रही राख फसलों की गुणवत्ता को नष्ट कर रही है, जिससे किसानों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
"प्रशासनिक चुप्पी पर सवाल"
चौंकाने वाली बात यह है कि इस अवैध संचालन की जानकारी संबंधित विभागों को होने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। प्रशासनिक निष्क्रियता के कारण भट्टा संचालक नियमों को ठेंगा दिखा रहे हैं। पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो मामला सीधे NGT में ले जाया जाएगा और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की जाएगी।
प्रस्तावित हेडलाइन्स (विकल्प):
“NGT की चेतावनी बेअसर: कंडरका में अवैध ईंट भट्टों का राज, प्रशासन बना मूकदर्शक”
“लाइसेंस खत्म, कानून ध्वस्त: बेमेतरा में अवैध भट्टों से ज़हर उगलता धुआँ”
“पर्यावरण कानूनों की हत्या: कंडरका में खुलेआम चल रहे अवैध ईंट भट्टे”।