*INTUC के प्रदेश उपाध्यक्ष पिंकू लाल बहादुर सोनवानी ने कोरबा पावर लिमिटेड के विस्तार परियोजना के खिलाफ औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई*
*INTUC के प्रदेश उपाध्यक्ष पिंकू लाल बहादुर सोनवानी ने कोरबा पावर लिमिटेड के विस्तार परियोजना के खिलाफ औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई*
कोरबा | 27 फरवरी 2026
यूथ INTUC के प्रदेश उपाध्यक्ष लाल बहादुर सोनवानी ने आज कोरबा पावर लिमिटेड (KPL) की प्रस्तावित 2×800 मेगावाट (1600 मेगावाट) फेज-III विस्तार परियोजना के विरुद्ध विस्तृत लिखित आपत्ति प्रस्तुत की। यह परियोजना Adani Power Limited की सहायक कंपनी द्वारा संचालित की जा रही है।
आपत्ति निम्न प्राधिकरणों को सौंपी गई:
(1). कलेक्टर, जिला कोरबा
(2). Ministry of Environment, Forest and Climate Change (भारत सरकार)
(3). Chhattisgarh Environment Conservation Board
यह आपत्ति 27 फरवरी 2026 को आयोजित जनसुनवाई की वैधता को चुनौती देती है, जो ग्राम सरगबुंदिया, ढनढनी, खोड़डल, पहंदा , पताड़ी, सैंडल, अखरापाली, बरपाली, बारीडीह , कटबितला,उरगा, तिलकेजा के तहसील करतला, जिला कोरबा में प्रस्तावित विस्तार के संबंध में आयोजित की गई हैं।
मुख्य आपत्तियाँ
1. कलेक्टर कोरबा के आदेश दिनांक 11.11.2022 का उल्लंघन
जिला कलेक्टर, कोरबा द्वारा दिनांक 11.11.2022 को भूमि विस्थापित व्यक्तियों को रोजगार प्रदान करने हेतु स्पष्ट निर्देश जारी किया गया था। इसके बावजूद कंपनी द्वारा अब तक रोजगार उपलब्ध नहीं कराया गया है।
2. पुनर्वास एवं औद्योगिक नीति का उल्लंघन
वर्ष 2007 तथा 2012–2013 में जिन परिवारों की भूमि अधिग्रहित की गई, उन्हें रोजगार देने का वादा किया गया था। कंपनी द्वारा इस दायित्व का पालन नहीं किया गया, जो राज्य की औद्योगिक नीति एवं पुनर्वास प्रावधानों का उल्लंघन है।
3. ड्राफ्ट EIA रिपोर्ट में महत्वपूर्ण तथ्यों का दमन
ड्राफ्ट पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) रिपोर्ट में निम्नलिखित विषयों का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है:
(a). SO₂, NOx एवं Mercury उत्सर्जन नियंत्रण की तकनीक
(b). अतिरिक्त भूमि आवश्यकता का स्पष्ट विवरण
(c).पुनर्वास दायित्वों की स्थिति
4. रोजगार सृजन के दावे भ्रामक
प्रस्तावित फेज-III परियोजना में स्थायी रोजगार की संख्या वर्तमान कार्यबल की तुलना में अत्यंत कम है, जो जनहित के दावों के विपरीत है।
मांग
(1). INTUC ने मांग की है कि:
27 फरवरी 2026 को आयोजित जनसुनवाई को निरस्त किया जाए।
(2). पर्यावरण स्वीकृति (Environmental Clearance) को अस्वीकार किया जाए।
(3). जब तक कंपनी कलेक्टर के आदेश दिनांक 11.11.2022 एवं पुनर्वास दायित्वों का पूर्ण पालन नहीं करती, तब तक विस्तार की अनुमति न दी जाए।
इंटक के प्रदेश उपाध्यक्ष (पिंकू) लाल बहादुर सोनवानी ने कहा कि औद्योगिक विकास के नाम पर पर्यावरण और भूमि विस्थापित परिवारों के अधिकारों की अनदेखी स्वीकार्य नहीं है। कानून का पालन सुनिश्चित किए बिना किसी भी प्रकार की पर्यावरण स्वीकृति प्रदान नहीं की जानी चाहिए।
जारीकर्ता:
लाल बहादुर सोनवानी
प्रदेश उपाध्यक्ष, INTUC
कोरबा, छत्तीसगढ़