*श्रीलक्ष्मी नारायण यज्ञयोत्सव 9 फ़रवरी से **

*श्रीलक्ष्मी नारायण यज्ञयोत्सव 9 फ़रवरी से **

*श्रीलक्ष्मी नारायण यज्ञयोत्सव 9 फ़रवरी से **
*श्रीलक्ष्मी नारायण यज्ञयोत्सव 9 फ़रवरी से **
खरोरा :-क्षेत्र में आध्यात्मिक चेतना और धार्मिक वातावरण के निर्माण हेतु 9 फरवरी से 13 फरवरी तकश्रीलक्ष्मी नारायण मंदिर के तत्वाधान मे अग्रवाल सभा के द्वारा श्रीलक्ष्मी नारायण यज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। इस पावन यज्ञ में श्रद्धालुओं की भारी सहभागिता देखने को मिल रही है। यज्ञ के माध्यम से भगवान श्रीलक्ष्मी नारायण की विधिवत पूजा-अर्चना, मंत्रोच्चारण एवं हवन का आयोजन किया जा रहा है।
यज्ञाचार्य पं धनंजय शर्मा एवं विद्वान आचार्यों के निर्देशन में वैदिक मंत्रों के साथ हवन संपन्न होगा जिससे संपूर्ण वातावरण भक्तिमय बनेगा। यज्ञ के दौरान प्रवचन, भजन-कीर्तन एवं धार्मिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं, जिससे श्रद्धालुओं में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हो रहा है।
आयोजकों के अनुसार इस यज्ञ का उद्देश्य समाज में धर्म, संस्कृति, सद्भाव और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाना है। क्षेत्रवासियों ने इस आयोजन की सराहना करते हुए इसे सामाजिक एवं आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।पंडित धनंजय शर्मा ने यज्ञ कि महिमा बताते हुए कहा कि यज्ञ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह प्रकृति और मानव जीवन के बीच संतुलन स्थापित करने की एक वैदिक प्रक्रिया है। यज्ञ के माध्यम से वातावरण की शुद्धि, मानसिक शांति और सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा मिलता है।
वायु की शुद्धियज्ञ में प्रयुक्त सामग्री जैसे—घीहवन समिधा (लकड़ी)
औषधीय जड़ी-बूटियाँकपूर, लौंग, इलायची, गुग्गुल आदि
इनके दहन से उत्पन्न धुआँ वायु में उपस्थित हानिकारक जीवाणुओं और विषैले तत्वों को कम करने में सहायक माना जाता है। कई वैज्ञानिक शोधों में यह पाया गया है कि कुछ औषधीय धुएँ में जीवाणुनाशक गुण होते हैं।
 वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा
वैदिक मंत्रों का उच्चारण ध्वनि तरंगें उत्पन्न करता है, जो वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती हैं। इससे मानसिक तनाव कम होता है और वातावरण शांत एवं पवित्र बनता है।
 प्रकृति के प्रति सम्मान की भावना
यज्ञ हमें प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और संरक्षण का संदेश देता है। अग्नि, वायु, जल और पृथ्वी—इन पंचतत्वों का सम्मान यज्ञ की मूल भावना है।
 सामाजिक और मानसिक शुद्धि
यज्ञ सामूहिक सहभागिता का माध्यम है, जिससे समाज में एकता, सहयोग और सद्भाव की भावना विकसित होती है। जब मनुष्य का मन शुद्ध होता है, तो उसका व्यवहार और समाज भी शुद्ध होता है।पर्यावरण संरक्षण का संदेश यज्ञ हमें यह सिखाता है कि प्रकृति का संतुलन बनाए रखना मानव का कर्तव्य है। यदि हम वृक्षारोपण, जल संरक्षण और स्वच्छता जैसे कार्यों को यज्ञ की भावना से जोड़ें, तो वास्तविक पर्यावरण शुद्धि
यज्ञ के समापन अवसर पर प्रसाद वितरण कि व्यवस्था है।

श्री रोहित वर्मा जी कीखबर

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