*"सीटू का डेलिगेट्स सम्मेलन" संगठन को मजबूत बनाने और श्रम कानून के विरोध में 12 फरवरी को देशव्यापी हड़ताल का मुद्दा छाया रहा ।*

*"सीटू का डेलिगेट्स सम्मेलन" संगठन को मजबूत बनाने और श्रम कानून के विरोध में 12 फरवरी को देशव्यापी हड़ताल का मुद्दा छाया रहा ।*

*"सीटू का डेलिगेट्स सम्मेलन" संगठन को मजबूत बनाने और श्रम कानून के विरोध में 12 फरवरी को देशव्यापी हड़ताल का मुद्दा छाया रहा ।*
*"सीटू का डेलिगेट्स सम्मेलन" संगठन को मजबूत बनाने और श्रम कानून के विरोध में 12 फरवरी को देशव्यापी हड़ताल का मुद्दा छाया रहा ।
सेंटर आफ इंडिया ट्रेड यूनियन (सीटू ) का आठवां छत्तीसगढ़ राज्य स्तरीय सम्मेलन का आज लौह नगरी दल्ली राजहरा के सिंधु भवन में चल रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य के विभिन्न क्षेत्र से आए डेलीगेट यहां संगठन को मजबूत बनाने, व वंचित वर्ग के हितों की रक्षा हेतु रणनीति बनाएंगे। उपस्थित प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए सीटू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व स्टील वर्कस फेडरेशन आफ इंडिया के अध्यक्ष कामरेड तपन सेन ने कहा कि जिस तरह से किसान भाईयो ने सरकार द्वारा थोपे गए कृषि कानून के खिलाफ आंदोलन कर सरकार को घुटने टेक कर कृषि कानून वापस लेने के लिए मजबूर कर दिया, उसी तरह हम सभी को नये श्रम कानूनों के खिलाफ एक होकर आंदोलन करना पड़ेगा । हमें सरकार को मजबूर करना है इस श्रम कानून को वापस लिया जाये।
इसलिए 12 फरवरी की हड़ताल के लिए मजदूर किसान और समाज के दूसरे हिस्सों को भी इस हड़ताल से जोड़ना चाहिए। सीटू का आठवां सम्मेलन विशेष कर इसी विषय को फोकस कर रहा हैं ।
 वनांचल एवं खदान बाहुल्य राज्यों में सरकार ज्यादा हमला कर रही है , जिससे छत्तीसगढ़ भी अछूता नहीं है । इस बजट में सरकार ने पूंजी पतियों को और अधिक मजबूत किया है। जो जमीन सरकार उद्योगों के लिए दे रही है ज्यादातर वे गरीब और आदिवासियों की है । जहां पर वे अपने पुरखों के जमाने से खेती करते हुए आ रहे हैं। हमारा खदान बढ़ेगा यह बहुत अच्छी बात है लेकिन किसी का घर उजाड़ना हमें मंजूर नहीं है।, इसे हमें रोकना है । खदान का विस्तार बाद में होगा पहले प्रभावितों का बंदोबस्त होना चाहिए, इनको उचित मुआवजा और रोजगार की व्यवस्था करनी चाहिए। छत्तीसगढ़ में लड़ते हुए हमारे लाल झंडे वाले कामरेड ने आदिवासियों 148 लोगों के लिए पट्टा दिलवाया है ।उन्होंने कहा कि केवल मजदूर वर्ग के लिए नहीं, बल्कि सभी वंचित वर्ग के लिए हमें संघर्ष करना है।
 *कामरेड महा पात्रा* ने कहा कि सरकार श्रम कानून इसलिए बना रहे हैं कि उन्हें कोई भी काम का विरोध नहीं चाहिए । वह मनमानी कर सके उन्हें यूनियन नहीं चाहिए । श्रम संहिता बुनियादी रूप से एक मजदूर के रूप में हमें खत्म करने के लिए बनी है। जो अधिकार हम कुर्बानियों से हासिल किए हैं उसे पूरी तरह से समाप्त करने के लिए अपने मनमर्जी के साथ गुलाम बनाने की दिशा में कदम है । श्रम संहिता का मूल आधार यही है की मालिकों को पूरे अधिकार दो और मजदूरों पर शासन कर उसे गुलाम बना कर रखो तथा उनके अधिकार को छीन लो । 12 फरवरी की हड़ताल की अहमियत को समझिए । 12 फरवरी की हड़ताल सरकार के खिलाफ हमारी आर पार की लड़ाई है।
 हिंदुस्तान के मजदूरों को हड़ताल जो एक जनवादी अधिकार है वह पूरी तरह से खत्म कर दिया जाएंगा । छत्तीसगढ़ में पूरे क्षेत्र में जहां मजदूर संगठन नहीं है उन तक पहुंचना है, यदि हम सभी मुद्दे को उन सभी मजदूर तक ला दिए तो मैं समझता हूं कि 9 जुलाई की हड़ताल से 12 फरवरी की हड़ताल बड़ी होगी ।
सम्मेलन के दूसरे दिन विभिन्न क्षेत्र से आए प्रतिनिधियों ने अपने विचार रखे। श्रम कानून के संबंध में डेलिगेट्स के द्वारा विचार रखा गया कि सरकार का कहना है कि श्रम कानून महिलाओं के हित में है। हम महिलाओं को बराबर का अधिकार दे रहे हैं। क्या श्रम कानून महिलाओं को सुरक्षा दे पाएगी? महिलाओं को घर से बाहर रात में निकलने के लिए मजबूर करने के लिए कानून बनाया गया है ।

 यूनियन को मजबूत बनाए रखने के लिए डेलिगेट्स ने विचार रखे उन्होंने कहा कि सम्मेलन में महिलाओं की भागीदारी के लिए अधिक से अधिक
होनी चाहिए।
सीमेंट उद्योग , एन एम डी सी, रेहड़ी पटरी, मध्यान भोजन, इत्यादि में यूनियन को मजबूत बनाने का लक्ष्य लिया गया।
   सम्मेलन में प्रतिनिधियों ने सभी बिषयों पर खुलकर अपने विचार रखे। शाम को शहीद अस्पताल की टीम द्वारा निर्मित नाटक का मंचन किया गया, जिसे खूब सराहना मिली।
  आज पुनः सुबह से सत्र प्रारंभ है ,जिसमें सभी चर्चित बिषयों का सारांश निकाला जायेगा और नई राज्य समिति का गठन किया जायेगा।

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