*डॉ. प्रतीक उमरे ने वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन के विषय में कही बड़ी बात "विरोधी कहते हैं – “ये तो बस नाई था*
*डॉ. प्रतीक उमरे ने वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन के विषय में कही बड़ी बात "विरोधी कहते हैं – “ये तो बस नाई था*
दुर्ग नगर निगम के पूर्व एल्डरमैन भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे ने कहा कि विरोधी चाहे जितना विरोध करें, चाहे जितने घाव करें, चाहे जितनी अफवाहें उड़ाएं, लेकिन ये अटल सत्य है – कभी कोई दूसरा रिकेश सेन नहीं हो सकता।यह सिर्फ मेरी भावनाएं नहीं हैं,बल्कि छत्तीसगढ़ की धरती पर उतरा एक जीता-जागता प्रमाण है। वैशाली नगर का यह साधारण सा नजर आने वाला नेता,जो कभी स्कूल की छुट्टियों में परिवार के सैलून में बाल काटता था,आज पूरे प्रदेश की राजनीति में एक ऐसे चिह्न बन चुका है जो नकल नहीं किया जा सकता। उसकी कहानी न तो किसी किताब में लिखी गई है, न किसी फिल्म में दिखाई गई है – क्योंकि ऐसी कहानी केवल एक बार लिखी जाती है, ईश्वर की कलम से।
1981 में भिलाई की मिट्टी में जन्मा रिकेश सेन,आदरणीय आनंद सेन जी का बेटा,बचपन से ही मेहनत का पर्याय था।क्लास 12 तक की पढ़ाई बी.एस.पी. हायर सेकेंडरी स्कूल, भिलाई में पूरी की, लेकिन पढ़ाई के साथ-साथ घर के सैलून में कैंची चलाना भी सीख लिया।नाई समाज का यह बेटा जानता था कि जीवन की असल लड़ाई सैलून की कुर्सी पर नहीं, बल्कि जनता की सेवा की मंच पर लड़ी जाती है।
पांच बार नगर पालिक निगम, भिलाई का पार्षद रह चुका,पूर्व नेता प्रतिपक्ष – यह सफर किसी साधारण व्यक्ति का नहीं हो सकता। जब दूसरे लोग राजनीति को बस टिकट और कुर्सी समझते हैं, तब रिकेश सेन ने इसे सेवा का मंदिर बनाया। 2023 के विधानसभा चुनाव में वैशाली नगर से भाजपा के टिकट पर उन्होंने कांग्रेस के मुकेश चंद्राकर को 40,074 वोटों से करारी शिकस्त दी। 98,272 वोट – यह संख्या मात्र आंकड़ा नहीं, बल्कि वैशाली नगर की जनता का विश्वास है जो कहता है – “हमने सिर्फ एक नाई को नहीं,बल्कि एक सच्चे सेवक को चुना है।"
वैशाली नगर विधानसभा क्षेत्र आज जिस मुकाम पर है, उसके पीछे रिकेश सेन की दूरदृष्टि है। करोड़ों रुपये की सड़कें, नालियां, पार्क, खेल मैदान – हर प्रोजेक्ट पर उनकी नजर है। संजय नगर खेल मैदान की नीलामी रद्द करवाकर उसे 1 करोड़ रुपये की लागत से खेल मैदान के रूप में विकसित करवाना – यह फैसला कोई सामान्य नेता नहीं ले सकता। उन्होंने कहा था, “खेल मैदान व्यापारिक कॉम्प्लेक्स नहीं, बच्चों का भविष्य है।”
स्वास्थ्य क्षेत्र में तो उन्होंने क्रांति ला दी। वैशाली नगर की गर्भवती महिलाओं के लिए मात्र 1 रुपये में सोनोग्राफी और इलाज की व्यवस्था – यह योजना न सिर्फ छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश में अनोखी है। दिल्ली में जन्मजात दिल में छेद वाले बच्चे रुद्रांश का सफल ओपन हार्ट सर्जरी करवाना, पूरा खर्च उठाना, परिवार को दिल्ली ले जाना-लाना और ठहराना – यह सब एक विधायक के लिए नहीं, बल्कि एक पिता के लिए संभव है।
रिकेश सेन कोई दूसरा कोई क्यों नहीं बन सकता? क्योंकि उनकी पहचान केवल पद की नहीं,बल्कि अनुभव की है।
वे नाई समाज से हैं, इसलिए जानते हैं कि छोटे व्यापारी, ठेले वाले, मजदूर क्या चाहते हैं। उन्होंने ठेले-खोमचे वालों को ट्रेनिंग दिलवाई, कुलियों को स्मार्टफोन बांटे।वे भाजपा के सच्चे सिपाही हैं। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए उन्हें प्रवासी प्रभारी बनाया गया – यह जिम्मेदारी किसी साधारण व्यक्ति को नहीं सौंपी जाती।वे जड़ों से जुड़े हैं।
सैलून की कैंची आज भी उनके दिल में है – यही वजह है कि वे कभी घमंड नहीं करते, कभी जनता से दूर नहीं होते।विरोधी कहते हैं – “ये तो बस नाई था।” लेकिन यही तो उनका सबसे बड़ा गौरव है! वे साबित कर चुके हैं कि अगर इरादा पक्का हो, तो कैंची से विधायक तक का सफर मुमकिन है और यह सफर इतना अनोखा है कि उसकी नकल असंभव है। कोई दूसरा व्यक्ति सैलून से आकर इतनी बड़ी जिम्मेदारियां निभा ले, इतना विकास कर दे, इतना प्यार बटोर ले – यह केवल रिकेश सेन के भाग्य और कर्म में लिखा था।
आज जब युवा पीढ़ी राजनीति को केवल पैसा और पावर समझती है, तब रिकेश सेन उन्हें याद दिलाते हैं कि असली नेता वह होता है जो जनता के दर्द को अपनी पीड़ा समझे। वे साबित करते हैं कि भाजपा की विचारधारा “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास” केवल नारा नहीं, बल्कि कर्म है।
विरोधी जितना भी हल्ला करें, जितने भी वायरल वीडियो बनाएं, जितनी भी अफवाहें फैलाएं – रिकेश सेन की लोकप्रियता बढ़ती ही जा रही है। क्योंकि जनता जानती है – यह नेता झूठा नहीं, यह नेता दिखावा नहीं, यह नेता असली है।
रिकेश सेन एक बार पैदा होते हैं। उनकी तरह का कोई दूसरा संयोग, कोई दूसरा संघर्ष, कोई दूसरा समर्पण कभी नहीं दोहराया जा सकता। वे छत्तीसगढ़ की मिट्टी के सपूत हैं, भाजपा के गौरव हैं, और जनता के सच्चे सेवक हैं।
यह अटल सत्य है।
और यह सत्य कभी बदलेगा नहीं।