सादर प्रकाशनार्थ प्रेस विज्ञप्ति
*सकारात्मक सोच और आध्यात्मिक जागरण का प्रतीक है बसंत पंचमी – बीके संतोषी दीदी*
23 जनवरी 2026, बिलासपुर। बसंत पंचमी केवल ऋतु परिवर्तन का पर्व नहीं, बल्कि यह आत्मिक चेतना के नवजागरण और जीवन में सकारात्मकता के संचार का दिव्य संदेश लेकर आता है। उक्त विचार ब्रह्मा कुमारीज बिलासपुर की मुख्य शाखा, टेलीफोन एक्सचेंज रोड स्थित राजयोग भवन की वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका बीके संतोषी दीदी ने बसंत पंचमी के अवसर पर आयोजित आध्यात्मिक कार्यक्रम में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि जैसे प्रकृति में बसंत का आगमन हरियाली, पुष्पों और मधुर सुगंध से वातावरण को उल्लासमय बना देता है, वैसे ही मानव जीवन में आध्यात्मिक ज्ञान का उदय आत्मा को शांति, पवित्रता और प्रेम से परिपूर्ण कर देता है।
बीके संतोषी दीदी ने बताया कि भारतीय संस्कृति में बसंत पंचमी को विद्या और ज्ञान की देवी मां सरस्वती की आराधना का विशेष दिन माना जाता है। यह पर्व हमें यह स्मरण कराता है कि सच्चा ज्ञान केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं है, बल्कि आत्म-परिचय और ईश्वर-परिचय के माध्यम से ही जीवन में वास्तविक परिवर्तन आता है। उन्होंने कहा, “जब हम स्वयं को शरीर नहीं, बल्कि एक शांत, पवित्र और शक्तिशाली आत्मा के रूप में पहचानते हैं, तभी हमारे विचार, बोल और कर्म में मधुरता और संतुलन स्वतः प्रकट होने लगता है।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बसंत पंचमी का पीला रंग केवल उत्सव का प्रतीक नहीं, बल्कि यह आशा, उत्साह और आत्मिक प्रकाश का संकेत है। पीला रंग हमें यह प्रेरणा देता है कि हम अपने जीवन में नकारात्मकता, निराशा और अज्ञान के अंधकार को त्याग कर ज्ञान, सद्भाव और सकारात्मक दृष्टिकोण को अपनाएं। यह पर्व हमें नई शुरुआत करने, पुराने संस्कारों को परिष्कृत करने और आत्मिक उन्नति के पथ पर आगे बढ़ने का संदेश देता है।
उन्होंने यह भी कहा कि बसंत पंचमी हमें प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करने की प्रेरणा देती है। जिस प्रकार प्रकृति हमें निस्वार्थ भाव से सब कुछ देती है, उसी प्रकार हमें भी अपने जीवन में सेवा और परोपकार को प्राथमिकता देनी चाहिए। सेवा के माध्यम से ही आत्मा का वास्तविक विकास होता है और समाज में सौहार्द और शांति का वातावरण निर्मित होता है।
अंत में बीके संतोषी दीदी ने सभी को बसंत पंचमी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में नई ऊर्जा, नई सोच और नई दिशा लेकर आए।
ईश्वरीय सेवा में,
बीके स्वाति
राजयोग भवन, बिलासपुर