राष्ट्रीय कवि संगम जिला इकाई बालोद द्वारा 4 जनवरी 2026 को पुराना बस स्टैंड स्थित शिव मंदिर परिसर में साहित्य संगोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया।

राष्ट्रीय कवि संगम जिला इकाई बालोद द्वारा 4 जनवरी 2026 को पुराना बस स्टैंड स्थित शिव मंदिर परिसर में साहित्य संगोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया।

राष्ट्रीय कवि संगम जिला इकाई बालोद द्वारा 4 जनवरी 2026 को पुराना बस स्टैंड स्थित शिव मंदिर परिसर में साहित्य संगोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया।
राष्ट्रीय कवि संगम जिला इकाई बालोद द्वारा 4 जनवरी 2026 को पुराना बस स्टैंड स्थित शिव मंदिर परिसर में साहित्य संगोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। 
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि तुलसी मानस प्रतिष्ठान के प्रदेश अध्यक्ष एवं वरिष्ठ साहित्यकार जगदीश देशमुख रहे, जबकि अध्यक्षता राष्ट्रीय कवि संगम के जिला अध्यक्ष भारत बुलंदी ने की। मंच संचालन जिला संयोजक डॉ. अशोक आकाश द्वारा किया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि जगदीश देशमुख ने संगठनात्मक एकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि साहित्यकार समाज का मार्गदर्शक होता है और जब साहित्यकार एक सूत्र में बंधकर कार्य करते हैं, तो उनकी लेखनी और विचारों का प्रभाव समाज पर अधिक व्यापक पड़ता है। उन्होंने राष्ट्रीय कवि संगम के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि जिले के सभी रचनाकारों से सशक्त बनाने राष्ट्रीय कवि संगम का यह प्रयास सराहनीय है इससे जुड़ कर हमें अपनी पहचान बनानी चाहिए, ताकि साहित्यिक मूल्यों का संरक्षण और संवर्धन प्रभावी ढंग से हो सके।
संगोष्ठी के दौरान जिले के वरिष्ठ साहित्यकार शिव कुमार अंगारे, पूरन सिंह माली, पुनूराम गुरूपंच, थानूराम सिन्हा, ताम्रध्वज उमरे, भारत सिन्हा, कामता प्रसाद देसलहरे, श्रीमती गायत्री साहू "शिवांगी", वीरेंद्र अजनबी, योगेश छत्तीसगढ़िया एवं कन्हैयालाल बारले की गरिमामय उपस्थिति रही।
कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान शंकर की पूजा-अर्चना के साथ हुआ। जिला संयोजक डॉ. अशोक आकाश ने वार्षिक कार्ययोजना प्रस्तुत करते हुए कहा-: जो साहित्यकार से निरंतर साहित्य सृजन करेगा वह एक दिन जरूर स्थापित साहित्यकार होगा इसलिये हमें निरंतर साहित्य सृजन करना चाहिये। सचिव डॉ.एस.एल.गंधर्व ने संगठन को सतत सक्रिय रखने का संकल्प लेने की बात कही। अध्यक्षता कर रहे भरत बुलंदी ने कहा कि हम वर्ष भर गीत, कविता और कहानी की विभिन्न विधाओं के माध्यम से साहित्य सृजन जारी रखेंगे।
संगठनात्मक चर्चा के दौरान साहित्यकारों ने लोक पर्वों एवं महापुरुषों की जयंती पर आयोजन करने तथा सभी साहित्य समितियों को साथ लेकर चलने का सुझाव दिया। साथ ही वार्षिक सदस्यता शुल्क का निर्धारण भी किया गया। काव्य सत्र में डॉ. एस.एल. गंधर्व ने 'सुन भोला कहत हव तोला', विरेन्द्र अजनबी ने 'कइसे जीवन धन्य होही', गायत्री शिवॉंगी ने हेलमेट सुरक्षा पर, योगेश छत्तीसगढ़िया ने राष्ट्र विकास पर और ताम्रध्वज उमरे ने 'मां' पर अपनी मर्मस्पर्शी रचनाएं प्रस्तुत कीं। वहीं, भरत सिन्हा ने यात्रा वृत्तांत और कन्हैया लाल बारले ने व्यंग्य के माध्यम से अपनी बात रखी। अंत में जिला अध्यक्ष भरत बुलंदी के आभार प्रदर्शन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

Ads Atas Artikel

Ads Atas Artikel 1

Ads Center 2

Ads Center 3