मानव उत्थान सेवा समिति- बेमेतरा के तत्त्वावधान में गायत्री मंदिर, कबीर कुटी मैदान में दो दिवसीय सद्भावना सत्संग समारोह
प्रेस विज्ञप्ति
अब मोही भा भरोस हनुमंता
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म. भुवनेश्वरी बाई जी
मानव उत्थान सेवा समिति- बेमेतरा के तत्त्वावधान में गायत्री मंदिर, कबीर कुटी मैदान में दो दिवसीय सद्भावना सत्संग समारोह का आयोजन किया गया है जिसमें सद्गुरुदेव श्री सतपाल जी महाराज के आत्मानुभवि संत महात्मा गणों के द्वारा गीता, रामायण, वेद-पुराण, उपनिषद आदि धर्मग्रंथों पर आधारित सारगर्भित आध्यात्मिक प्रवचन किया गया। हरिद्वार से पधारे महात्मा निहालानंद जी ने कहा- भगवान जिस पर कृपा करते हैं उसी को सत्संग की प्राप्ति होती है। जब सत्संग की प्राप्ति होती है तो कौवे वृत्ति वाला व्यक्ति कोयल वृत्ति वाले हो जाते हैं तथा बगुले के तरह के व्यक्ति हंस वृत्ति वाला हो जाता है।
बड़े भाग्य पाइब सत्संगा। बिनहिं प्रयास होत भव भंगा।।
मज्जन फल पेखिअ तत्काला।
काक होई पिक बकउ मराला।।
सच्चे संत ही व्यक्ति को सद्गुरु तक पहूंचाते हैं और सद्गुरुदेव जी भगवान से मिला देते हैं इसलिए जीवन में सच्चे सद्गुरुदेव की खोज करना आवश्यक है। बिना गुरु के जीव का कल्याण असम्भव है।
गुरु बिन भव निधि तरइ न कोई। जौं बिरंची शंकर सम होई।।
मथुरा वृन्दावन से पधारे महात्मा भुवनेश्वरी बाई जी ने अपने सत्संग विचार रखते हुए कहा- श्रीमद्भागवत गीता में भगवान कृष्ण ने अर्जुन को उपदेश करते हुए कहते हैं कि हे अर्जुन तुम जो मुझे देख रहे हो ये मेरा वास्तविक स्वरूप नहीं है। मेरे वास्तविक स्वरूप को तुम इन नेत्रों से नहीं देख सकते हो। मैं तुम्हें दिव्य नेत्र प्रदान करता हूँ, और दिव्य नेत्र देकर अपने वास्तविक विराट स्वरूप का दर्शन कराया।
अर्जुन के माध्यम से भगवान ने समस्त मनुष्यों को ये संदेश दिया कि हे मानव तुम मेरे वास्तविक स्वरूप को इन नेत्रों से नहीं देख सकते। समय के सद्गुरु दिव्य चक्षु प्रदान कर भगवान के वास्तविक स्वरूप का दर्शन कराते हैं और जीते जी मोक्ष अवस्था तक पहुंचा देते हैं।
इसीलिए सभी धर्मग्रंथों में सद्गुरु की महिमा अनंत बताया गया है और सद्गुरु को भगवान से भी बड़ा माना गया है।
प्रयागराज से पधारे महात्मा अनंता बाई जी ने कहा- भगवान का ये वचन है भक्तों के लिए कि जब जब धर्म की हानि होगी, अत्याचार, पापाचार, भ्रष्टाचार बढ़ जाएगा, संत और भक्तों कष्ट होने लगेगा तब तब इस धरती पर अवतार धारण करुंगा और दुष्टों का विनाश तथा संतों, भक्तों की रक्षा करुंगा।
भगवान हर युग में अवतार धारण करते हैं किंतु बिना ज्ञाननेत्र के व्यक्ति उन्हें पहचान नहीं सकते।
हरिद्वार से पधारे ज्योति बहन जी ने कहा- कोटि नाम संसार में, ताते मुक्ति न होय।
आदि नाम जो गुप्त जप, बुझे बिरला कोय।।
----------संत कबीर दास जी
संत कबीर दास जी कहते हैं कि गुण और कर्म के आधार पर भगवान के करोड़ों नाम है लेकिन उससे मुक्ति नहीं होगी। भगवान का आदि नाम जो शब्दों में नहीं आता जो अजपा है जो श्वांसों में रमण कर रहे हैं जो गुप्त है उसे निरंतर चल रहे श्वांसों में स्मरण करता है वही व्यक्ति मोक्ष अवस्था को प्राप्त करता है। कोई बिरला व्यक्ति ही सद्गुरु की खोज कर उस गुप्त ज्ञान को पुछता है।
अवसर पर मानव उत्थान समिति के सदस्य नारायण निषाद, श्रीतुलसी मानस प्रतिष्ठान बेमेतरा जिला अध्यक्ष अनिल रजक, तहसील बेमेतरा अध्यक्ष देवराम साहू, बेरला पंचराम यादव, दाढ़ी अशोक साहू, नवागढ़ मनहरण साहू,साजा नेहरू श्रीवास्तव,भिंभौरी विनोद साहू एवं दालचंद साहू सहित अनेक सदस्य उपस्थित थे।