साकेत साहित्य परिषद द्वारा मोखला में सावित्री बाई फुले जयंती का आयोजन
छेरछेरा परब के महत्व पर चर्चा
विनोद कुमार शुक्ल को श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए
योगिता साहू एवं गुरुचरण सिन्हा सम्मानित हुए
राजनांदगांव - जिले की सक्रिय साहित्यिक संस्था साकेत साहित्य परिषद सुरगी द्वारा देश की प्रथम शिक्षिका सावित्री बाई फुले की जयंती का आयोजन शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला मोखला में किया गया। उक्त कार्यक्रम परिषद के पूर्व अध्यक्ष लखनलाल साहू 'लहर' एवं पूर्व सचिव कुलेश्वर दास साहू के संयोजन में आयोजित किया गया।इस अवसर पर वक्ताओं ने सामाजिक चेतना, शिक्षा और क्रांति पर उनके अवदानों को याद करते हुए उन्हें नमन किया। उक्त कार्यक्रम में ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित विनोद कुमार शुक्ल को श्रद्धांजलि देते हुए उनके साहित्यिक अवदानों और उपलब्धियों को साहित्यकारों ने छत्तीसगढ़ के लिए गौरवपूर्ण बताया। संगोष्ठी में लोकपर्व छेरछेरा पर भी चर्चा हुई।
मुख्य अतिथि प्रभात तिवारी ने कहा कि सावित्री बाई फुले ने उन्नीसवीं शताब्दी में शिक्षा का अलख जगाकर समाज में एक नई क्रांति ला दी। इसमें उसके पति एवं समाज सुधारक ज्योतिबा फुले ने उनका भरपूर साथ दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे आत्माराम कोशा अमात्य ने ने कहा कि ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त करने वाले मूर्धन्य साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल जी छंद का बंधन तोड़ने वाले महाप्राण कवि निराला और मुक्ति बोध के अंधेरे की कविताएं वाली शैली के प्रतिनिधि कवि हैं,, उनकी चक्करदार बातें, प्रतीक एवं बिंब,, साहित्य सुधियो को
नई दृष्टि देती है लोक सोचने- समझने को विवश करती है,,
साहित्य मूर्धन्यों की धरा राजनांदगांव को अपने एक हीरा खो जाने का दुःख है।
वरिष्ठ साहित्यकार कुबेर सिंह साहू ने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि सावित्री बाई फुले ने शिक्षा को माध्यम बनाकर दलित, पिछड़े लोगों में जन जागृति फैलाने का एक भागीरथ प्रयास किया। इसके लिए उन्हें कई प्रकार से अपमान का सामना करना पड़ा परन्तु उन्होंने हार नहीं मानी। वरिष्ठ कवि वीरेन्द्र तिवारी वीरू ने कहा कि समाज में सदैव सुधार की गुंजाइश रहती है। भारत वर्ष में अनेक विदुषी महिलाएं हुई है जिन्होंने अपनी बुद्धिमत्ता से समाज में जन जागरण का काम किया।इसी कड़ी में सावित्रीबाई फुले के योगदान को नहीं भुलाया जा सकता। बालोद से पधारे वरिष्ठ साहित्यकार डॉ अशोक आकाश ने कहा कि छेरछेरा परब छत्तीसगढ़ की दानशीलता का प्रतीक है। यह पर्व लोगों को अपनी आय का कुछ हिस्सा दान करने को प्रेरित करती है।
डा. प्रवीण साहू ने कहा कि साकेत साहित्य परिषद सुरगी ने सावित्रीबाई फुले पर परिचर्चा आयोजित कर एक सार्थक पहल की है। सावित्रीबाई फुले शोषित, वंचित वर्ग के लिए दैवीय शक्ति से कम नहीं थी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ शुरू से सामाजिक समरसता की धरती रही है। अन्य प्रांतों की तुलना यहां कट्टरता कम है। अखिलेश्वर प्रसाद मिश्रा ने कहा कि समाज में सामाजिक समरसता, एवं एकता की भावना अत्यावश्यक है। उन्होंने सावित्रीबाई फुले के योगदान को नमन किया जिसके चलते समाज में एवं विशेष कर स्त्री शिक्षा में आमूलचूल परिवर्तन हुआ। मान सिंह मौलिक ने कहा कि सावित्री बाई फुले संघर्ष की प्रतिमूर्ति थी। तरह तरह के उलाहना एवं बाधाओं के बावजूद हार नहीं मानी और दलित, शोषित वर्ग में शिक्षा का प्रचार प्रसार किया। आधार वक्तव्य देते हुए साकेत साहित्य परिषद सुरगी के अध्यक्ष ओमप्रकाश साहू अंकुर ने सावित्रीबाई फुले के योगदान को रेखांकित करते हुए नमन किया। उन्होंने कहा कि साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल ने पूरे भारतवर्ष ही नहीं अपितु विश्व में छत्तीसगढ़ का नाम रोशन किया। संस्कारधानी राजनांदगांव में उनका जन्म हुआ। अपनी विशिष्ट लेखन शैली से साहित्य जगत में अमिट छाप छोड़ने में सफल रहे। वे ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित हिंदी साहित्य के बारहवें एवं छत्तीसगढ़ के प्रथम साहित्यकार हैं।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रुप में वरिष्ठ साहित्यकार प्रभात तिवारी (राजनांदगांव) उपस्थित थे एवं अध्यक्षता आत्माराम कोशा 'अमात्य' जिला समन्वयक राजभाषा आयोग ने की एवं कुबेर सिंह साहू वरिष्ठ साहित्य कार , वीरेंद्र तिवारी वीरु, अखिलेश्वर प्रसाद मिश्रा अध्यक्ष राष्ट्रीय कवि संगम बालोद, अरविंद कुमार लाल वरिष्ठ गीतकार,कवि चिचोला,डा. अशोक आकाश वरिष्ठ साहित्यकार बालोद, डा.प्रवीण साहू, ओमप्रकाश साहू 'अंकुर' अध्यक्ष साकेत साहित्य परिषद सुरगी,तुकजराम साहू ( पूर्व उप सरपंच) सरपंच प्रतिनिधि हेमशंकर साहू , गुरुचरण सिन्हा जी, पवन साहू विशेष अतिथि के रुप से उपस्थित थे
सावित्री बाई फुले जयंती के अवसर पर छत्तीसगढ़ पुलिस के लिए चयनित मोखला की बेटी योगिता साहू पिता घनश्याम साहू को सम्मानित किया गया तथा सुरगी क्षेत्र के सक्रिय युवा गुरुचरण सिन्हा को भी परिषद द्वारा सम्मानित किया गया।
द्वितीय सत्र में वरिष्ठ गीतकार अरविंद कुमार लाल चिचोला की अध्यक्षता में सरस कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया।
उक्त अवसर पर परिषद के सचिव, गजलकार राज कुमार चौधरी रौना,वीरेन्द्र कुमार तिवारी वीरू लखन लाल साहू लहर,मानसिंह मौलिक, कुलेश्वर दास साहू,रोशन लाल साहू,मदन मंडावी, आनंद राम सार्वा, गुमान सिंह साहू,बलराम सिन्हा, पवन यादव पहुना ने काव्य पाठ किया। कार्यक्रम में हरी राम सिन्हा,गैंदलाल साहू,भागवत साहू, जगदीश पटेल, योगिता साहू, किरण साहू, मुरली मनोहर, मिठालाल जैन, दुर्गूनिषाद, मिल्लू साहू एवं ग्रामीणजन उपस्थित थे। दो सत्र में चले कार्यक्रम का संचालन वीरेंद्र तिवारी , पवन यादव पहुना एवं आभार प्रदर्शन परिषद के सचिव राजकुमार चौधरी एवं कुलेश्वर दास साहू ने किया।