प्रेस विज्ञप्ति
*संकुल केंद्र मोहरा में पूर्व शिक्षकों का सम्मान समारोह, वर्षों बाद हुआ भावनात्मक पुनर्मिलन*
संकुल केंद्र मोहरा में पूर्व शिक्षकों का गरिमामय सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इस आयोजन का उद्देश्य उन शिक्षकों का सम्मान करना था, जिन्होंने विकासखंड सिमगा के अंतर्गत संकुल केंद्र मोहरा के विभिन्न विद्यालयों में वर्षों तक सेवाएं दीं तथा वर्तमान में अन्य स्थानों पर कार्यरत हैं। यह कार्यक्रम संकुल समन्वयक मारकंडेय कैवर्त, डॉ. हरीश कुमार वर्मा (प्राथमिक विद्यालय मोहरा) तथा प्राचार्य के. पी. राय के संयुक्त प्रयास से सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में ढालसिंह ठाकुर (विकासखंड शिक्षा अधिकारी, सिमगा) तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में नरेंद्र वर्मा (डीएमसी, बलौदा बाजार) उपस्थित रहे। कार्यक्रम की गरिमा को कमलेश्वर प्रसाद राय (प्राचार्य, हायर सेकेंडरी स्कूल मोहरा), मंतराम बंजारे (अध्यक्ष, शाला प्रबंधन समिति मोहरा), बोधराम ध्रुव (संस्था प्रमुख, भालेसुर), चोवाराम वर्मा (प्रधान पाठक, मोहरा), हरिश्चंद्र वर्मा (शिक्षक, मोहरा), जितेंद्र कुमार पटेल (शिक्षक, नेवारी) एवं शीला भारद्वाज (प्राथमिक शाला, बुड़गहन) की उपस्थिति ने और अधिक बढ़ाया। इस अवसर पर शिक्षक धीरेंद्र कुमार वर्मा ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि लगभग 12–13 वर्ष पूर्व हम सभी एक ही विद्यालय समूह में साथ कार्यरत थे। आज का यह पुनर्मिलन ऐसा प्रतीत हो रहा है मानो समय ने हमें पीछे लौटकर उन सुनहरे पलों को पुनः जीने का अवसर प्रदान किया हो।
प्राथमिक विद्यालय मोहरा में कार्यरत डॉ. हरीश कुमार वर्मा ने कहा कि यह कार्यक्रम अत्यंत भावनात्मक और स्मरणीय रहा। वर्षों बाद साथियों से मिलना केवल औपचारिक सम्मान नहीं, बल्कि शिक्षक जीवन की साझा स्मृतियों और संघर्षों का उत्सव था। संकुल समन्वयक मारकंडेय कैवर्त ने आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम शिक्षकों के बीच आपसी संबंधों को सुदृढ़ करते हैं तथा नई पीढ़ी को समर्पण, सहयोग और सेवा-भाव की प्रेरणा देते हैं। कार्यक्रम के दौरान जिन शिक्षकों की गरिमामयी उपस्थिति रही, उनमें जितेंद्र कुमार पटेल, श्रीमती यामीन वर्मा, रुखमणी कुर्रे, अन्नपूर्णा ध्रुव, शीला भारद्वाज, गणपत साहू, टेकराम वर्मा, ऊपेश वर्मा, विजय ध्रुव, टिकेश्वर वर्मा, जगदीश वस्त्रकार एवं प्रदीप दुबे प्रमुख रूप से शामिल रहे। कार्यक्रम का समापन सभी पूर्व शिक्षकों के सम्मान, स्मृति-चिह्न भेंट करने तथा आत्मीय सामूहिक संवाद के साथ हुआ।