वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई

वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई

वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई
वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई

दल्ली राजहरा।
भारत की राष्ट्रीय चेतना और स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा माने जाने वाले “वंदे मातरम्” गीत की 150वीं वर्षगांठ नगर में गरिमामय वातावरण में श्रद्धा और राष्ट्रभक्ति के साथ मनाई गई। कार्यक्रम की शुरुआत सामूहिक रूप से वंदे मातरम् के गान से हुई, जिससे पूरा वातावरण देशभक्ति से ओत-प्रोत हो गया।
कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने वंदे मातरम् के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इस अमर गीत की रचना बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने 19वीं सदी में की थी। यह गीत भारत के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान क्रांतिकारियों और स्वतंत्रता सेनानियों के लिए प्रेरणास्रोत बना। “वंदे मातरम्” केवल एक गीत नहीं, बल्कि मातृभूमि के प्रति सम्मान, समर्पण और आत्मबल का प्रतीक है, जिसने देशवासियों को एक सूत्र में बांधने का कार्य किया।
वक्ताओं ने कहा कि आज के समय में भी वंदे मातरम् का प्रभाव उतना ही प्रासंगिक है। यह गीत नई पीढ़ी को राष्ट्रप्रेम, एकता और सामाजिक सद्भाव का संदेश देता है तथा देश के प्रति कर्तव्यबोध की भावना को मजबूत करता है।
इस अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष तोरन लाल साहू, वार्ड क्रमांक 24 के पार्षद विशाल मोटवानी, तहसील साहू समाज के अध्यक्ष शीतल साहू, सचिव राजेश साहू एवं संरक्षक नवीन साहू, वार्ड क्रमांक 21 के पार्षद भूपेंद्र श्रीवास, चुनाव संचालन समिति के अध्यक्ष शिखरचंद जैन, राजेश अग्रवाल, जयेन्द्र कुमार लाखानी, भूपेंद्र डहरवाल सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
इसके अलावा छत्तीसगढ़ चेंबर ऑफ कॉमर्स इकाई दल्ली राजहरा, बस स्टैंड क्षेत्र से कौशल साहू मस्तान, मोहम्मद इमरान, राकेश शर्मा, रवि यादव, भाऊ तथा बस स्टैंड के व्यापारीगण भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान और देश की एकता एवं अखंडता बनाए रखने के संकल्प के साथ किया गया। यह आयोजन न केवल ऐतिहासिक स्मृति को जीवंत करने वाला रहा, बल्कि समाज में राष्ट्रभक्ति की भावना को और सुदृढ़ करने वाला भी सिद्ध हुआ। 🇮🇳

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