अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज हरिद्वार के तत्वावधान एवं गायत्री शक्तिपीठ डौंडीलोहारा के मार्गदर्शन में आज वनांचल ग्राम रेंगाडबरी में एक दिवसीय व्यक्तित्व निर्माण युवा शिविर का आयोजन किया गया।
अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज हरिद्वार के तत्वावधान एवं गायत्री शक्तिपीठ डौंडीलोहारा के मार्गदर्शन में आज वनांचल ग्राम रेंगाडबरी में एक दिवसीय व्यक्तित्व निर्माण युवा शिविर का आयोजन किया गया।
शिविर में 30 युवाओं की भागीदारी रही। कार्यक्रम की शुरुआत मां गायत्री के पूजन अर्चन एवं दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। युवा वक्ता विरेंद्र कुमार बघेल ने कहा कि आज राष्ट्र में सामाजिक, राजनीतिक, धार्मिक क्षेत्र में नैतिकता चारित्रिकता की कमियां दिखाई देती है जिससे अनाचार,भ्रष्टाचार, वैमनस्य एवं राष्ट्र के विकास में बाधा उत्पन्न होती है। इतिहास में चाहे सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक जितने भी क्रांतियां हुई उन क्रांतियां में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही। आज भी समाज के नवनिर्माण में युवाओं की आवश्यकता महत्वपूर्ण हो गई है। इसलिए आज के युवाओं में विवेकानंद, महर्षि दयानंद, अरविंद, गुरु गोविंद सिंह, महाराणा प्रताप, सुभाष, गांधी, राजगुरु, सुखदेव, अब्दुल कलाम जैसे व्यक्तित्व गढ़ने की आवश्यकता है। हमारी मां भारती फिर से जगतगुरु के गौरव गरिमा को प्राप्त कर सके,इसलिए अपने अंदर की सोई हुई शक्ति को जागृत कर समाज के नव निर्माण में आगे आए। इस तरह युवाओं का आवाहन किया गया।
युवा वक्ता पीलू राम साहू ने कहा की व्यक्तित्व के निर्माण के लिए हमें सूत्रों की आवश्यकता होती है। हमारा व्यक्तित्व बाह्य और आंतरिक दोनों तरीके से लोगों को प्रेरित और प्रेरणा प्रदान करती है। इसलिए अपने चिंतन, चरित्र, व्यवहार को मधुर एवं कुशल बनाएं। इसके लिए हमें साधना, स्वाध्याय, संयम, सेवा जैसे आवश्यक तत्वों से जोड़ने की आवश्यकता है, इसके बगैर संपूर्ण व्यक्तित्व परिष्कार की कोई गुंजाइश नहीं है।
वरिष्ठ प्रज्ञा पुत्र कैलाश नाथ साहू ने युवाओं का राष्ट्र के जागरण में भूमिका के संदर्भ में कहा कि स्वच्छता, पर्यावरण, जल संरक्षण, नारी जागरण, कुरीति उन्मूलन, व्यसन मुक्ति आंदोलन में बढ़-चढ़कर भाग लेने की बात कही। अपना सुधार संसार की सबसे बड़ी सेवा है ।हम सुधरेंगे- युग सुधरेगा, हम बदलेंगे- युग बदलेगा इस तथ्य पर हमारा परिपूर्ण विश्वास है और इसी के आधार पर राष्ट्र के नवनिर्माण की संकल्पना जा सकती है।
इस कार्यक्रम को सफल बनाने में गायत्री परिवार के युवा कार्यकर्ता डोमार सिंह नायक, मन्नू लाल प्रधान, मंगल सिंह लारिया, शंकर लाल भुआर्य, चिंताराम साहू, शिवप्रसाद घोड़ा पटिया आदि परिजनों का विशेष योगदान रहा है।