*"मन को शक्तिशाली बनाने के लिए आत्मा को ईश्वरीय स्मृति और शक्ति का भोजन दें” – बीके स्वाति दीदी*

*"मन को शक्तिशाली बनाने के लिए आत्मा को ईश्वरीय स्मृति और शक्ति का भोजन दें” – बीके स्वाति दीदी*

*"मन को शक्तिशाली बनाने के लिए आत्मा को ईश्वरीय स्मृति और शक्ति का भोजन दें” – बीके स्वाति दीदी*
*"मन को शक्तिशाली बनाने के लिए आत्मा को ईश्वरीय स्मृति और शक्ति का भोजन दें” – बीके स्वाति दीदी*
14 सितम्बर 2025, बिलासपुर। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, बिलासपुर की मुख्य शाखा टेलीफोन एक्सचेंज रोड स्थित राजयोग भवन में आयोजित पाँच दिवसीय पॉजिटिव थिंकिंग क्लास के दूसरे दिन का सत्र विशेष रूप से प्रेरणादायी और ज्ञानवर्धक रहा। इस अवसर पर सेवाकेंद्र संचालिका बीके स्वाति दीदी ने उपस्थित जन को सकारात्मक चिंतन की गहराई से अवगत कराते हुए कहा कि “मन को शक्तिशाली बनाने के लिए आत्मा को ईश्वरीय स्मृति और शक्ति का भोजन देना आवश्यक है।”
उन्होंने बताया कि जैसे शरीर को स्वस्थ रहने के लिए नियमित और संतुलित आहार की आवश्यकता होती है, वैसे ही आत्मा को भी निरंतर सकारात्मक विचारों, ईश्वरीय ज्ञान और शक्ति से भरपूर याद की ज़रूरत होती है। यदि मन नकारात्मक विचारों, चिंता, तनाव और व्यर्थ भावनाओं से भर जाता है तो आत्मा दुर्बल हो जाती है और जीवन की चुनौतियों का सामना करने में कठिनाई अनुभव करती है।दीदी ने आगे कहा कि हर इंसान की सफलता उसके विचारों और मनोबल पर निर्भर करती है। जब हम स्वयं को आत्मा मानकर परमात्मा की याद में स्थिर होते हैं तो आत्मिक शक्ति का संचार होने लगता है। यह शक्ति हमें न केवल परिस्थितियों को सहज बनाने में मदद करती है, बल्कि जीवन में आने वाले तनाव, असफलता और संबंधों में उत्पन्न गलतफहमियों को भी खत्म करने की क्षमाता रखती है। यदि हम किसी परिस्थिति को सकारात्मक दृष्टिकोण से देखते हैं तो समस्या अपने आप छोटी हो जाती है। नकारात्मकता का अर्थ है – समस्या को बढ़ाना, और सकारात्मकता का अर्थ है – समाधान की राह खोजना। उन्होंने कहा कि हर परिस्थिति में ईश्वर की याद और अपने मूल गुणों को स्मरण करने से हम हल्के और खुशहाल बने रहते हैं।
दीदी ने सभी प्रतिभागियों को यह भी बताया कि आत्मा को तीन प्रकार के आहार की आवश्यकता होती है – पहला ज्ञान का आहार – सही और शुद्ध विचारों का पोषण। दूसरा स्मृति का आहार – स्वयं की पहचान और परमात्मा के स्नेह की याद। तीसरा ध्यान का आहार – मन को स्थिर कर ईश्वरीय शक्ति को आत्मसात करना। जब यह तीनों आहार नियमित रूप से मिलते हैं तो मन स्वतः ही शक्तिशाली और सकारात्मक बन जाता है।
ईश्वरीय सेवा में,
बीके स्वाति
राजयोग भवन, बिलासपुर

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