वातावरण में सिगरेट के 250 से ज्यादा घातक रसायन स्मोकिंग करने के कई घंटो तक रहते है - बीके स्वाति
31 मई 2023, बिलासपुर। आज समाज में बहुत सारी गलत मान्यताएं नशे के साथ जुड़ी हुई है। जिससे लोग नशा करना शुरू करते हैं। खास करके कहा जाता है कि हमारे पूर्वज देवताये भी इसका सेवन करते थे। परंतु तंबाकू, गुटखा, शराब जैसी अपवित्र नशीली चीजों को तीर्थ स्थानों पर नहीं ले जाया जाता, मंदिरों में ले जाया नहीं जाता तो यह मानना कि देवताये भी इनका सेवन करते थे यह समाज में गलत मान्यता है।
उपरोक्त वक्तव्य प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय राजयोग भवन टेलिफोन एक्सचेंज रोड बिलासपुर द्वारा शनिचरी बिलासा चौक में "नशा मुक्त भारत" अभियान के तहत बीके संतोषी दीदी ने कही। आगे संतोषी दीदी ने कहा की व्यक्ति उत्सुकता वश मित्रों के साथ उनके दबाव में आकर उनके बुरे संगति में आकर नशे का सेवन शुरू करता है। जिससे उसे आनंद मिले लगता है। इसकी मात्रा बढ़ती जाती है। जो व्यक्ति बार-बार इसका सेवन करता हैं। उनका शरीर मादक पदार्थ का आदि हो जाता है और फिर वह उसको छोड़ नहीं पाते छोड़ने से कई प्रकार के लक्षण जैसे बेचैनी घबराहट होने लगती है इस कारण लोग इसके आदि हो जाते हैं उसी प्रकार जैसे लोग शराब या अन्य पदार्थों के आदि हो जाते हैं और जब कोई किसी पदार्थ का आदी हो जाए तो उसका नियमित सेवन करने के लिए व्यक्ति बाध्य हो जाता है। यदि कोई नशे को छोड़ना चाहे तो उसे स्वयं को स्वयं की इच्छा शक्ति द्वारा नशे से मुक्ति पा सकते हैं।
तम्बाकू निषेध दिवस के उपलक्ष्य में राजयोग भवन सेवाकेन्द्र संचालिका बीके स्वाति दीदी ने बताया कि व्यसन वर्तमान समय में दुनिया भर में हर साल 70 लाख से अधिक मौतों का कारण बनता जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के सदस्य राज्यों ने 1987 में विश्व तंबाकू निषेध दिवस की शुरुआत की थी।
कई लोग सोचते है कि जो लोग धूम्रपान करते उन्हीं को कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी होती है लेकिन आप ये बात नहीं जानते है कि उनके साथ बैठने से हर साल लाखों लोगों की मौत धुएं के कारण होती है। इतना ही नहीं वातावरण में सिगरेट के अवशेषों में 250 से ज्यादा घातक रसायन स्मोकिंग करने के कई घंटो तक रहते है।
आम तौर पर सिगरेट पीने वाले और धुएं के सीधे संपर्क में आने वाले लोगों को धूम्रपान के दुष्प्रभाव का सामना करने वालों की श्रेणी में रखा जाता है, लेकिन अब नुकसान का यह दायरा बढ़ गया है। इसमें एक तीसरी कड़ी जुड़ गई है और यह तीसरी श्रेणी है, ‘थर्ड हैंड स्मोकर्स’ की। थर्ड हैंड स्मोकिंग दरअसल सिगरेट के अवशेष हैं, जैसे बची राख, सिगरेट बट, और जिस जगह तंबाकू सेवन किया गया है, वहां के वातावरण में उपस्थित धुंए के रसायन। बंद कार, घर, आफिस का कमरा और वहां मौजूद फर्नीचर, आदि धूम्रपान के थर्ड हैंड स्मोकिंग एरिया बन जाते हैं।
वहीं स्मोकिंग करने के बाद जो राख एशट्रे में रखते है और सिगरेट खत्म हो जाने के बाद जो बट बड़ी शान से कुचल देते है। जो कि सेहत के लिए बिल्कुल भी अच्छा नहीं है। इसलिए स्मोकिंग नहीं करें । ऐसा करने से हमारे बच्चों के अंदर भी यही संस्कार पड़ते है।
बीके स्वाति दीदी ने बताया कि प्रजापिता ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय बिलासपुर की मुख्य शाखा टेलीफोन एक्सचेंज रेड स्थित राजयोग भवन के तत्वावधान में आज 31 मई को विश्व तंबाकू निषेध दिवस के उपलक्ष्य में “नशा मुक्त भारत" कार्यक्रम का आयोजन शनिचरी स्थित बिलासा चौक में किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य लोगों को तंबाकू से होने वाले स्वस्थ्य नुकसान के विषय में सचेत करना था । साथ ही, इसके नकारात्मक स्वास्थ्य प्रभावों की ओर ध्यान आकर्षित कराया गया।
पुलिस अधीक्षक भ्राता संतोष कुमार सिंह जी एवं पुलिस प्रशासन के सहयोग से ब्रह्माकुमारीज़ द्वारा जिले के अलग-अलग स्थानों पर निरंतर निजात अभियान चलाया जा रहा है। आज विश्व तम्बाकू निषेध दिवस के उपलक्ष्य में रतनपुर किला, सीपत, राजकिशोर नगर स्थित अटल आवास में नशा मुक्ति कार्यक्रम किया गया।