सीटू ने मनाया 54वां स्थापना दिवस ,निरंकुश सरकार से मुकाबले का किया आह्वान
विगत 30 मई को सीटू के स्थापना दिवस के अवसर पर स्थानीय हिंदुस्तान स्टील एम्पलाइज यूनियन द्वारा हर्षोल्लास के साथ स्थापना दिवस मनाया गया । प्रातः 7:30 बजे यूनियन कार्यालय में वरिष्ठ उपाध्यक्ष विनोद मिश्रा के कर कमलों ध्वजारोहण किया गया । दूसरे चरण में शाम 7:30 बजे यूनियन कार्यालय प्रांगण में 'ट्रेड यूनियन आंदोलन और वर्तमान चुनौतियों" पर विशाल परिचर्चा आयोजित की गई। इस परिचर्चा का संचालन करते हुए यूनियन के अध्यक्ष कामरेड पुरुषोत्तम सिमैया ने कहा कि देश की आजादी में के समय ही ट्रेड यूनियन का गठन हो चुका था ,और ट्रेड यूनियनों ने भी देश की आजादी में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है, लेकिन आजादी के बाद ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस नाम की यूनियन ने वर्ग संघर्ष के रास्ते को छोड़कर सत्ता के साथ सहयोगात्मक रवैया अपनाया जिससे मजदूर वर्ग के नुकसान की आशंका बढ़ गई। इस विचारधारा के विरुद्ध मजदूर हितों को संरक्षित करने के लिए 30 मई 1970 को सेंटर आफ इंडियन ट्रेड यूनियन सीटू का गठन किया गया । तत्कालीन ज्योति बसु, कामरेड बीटी रणदिवे जैसे ईमानदार एवं संघर्षशील नेताओं के नेतृत्व में इस यूनियन का गठन हुआ, और यूनियन ने पूरे देश में समाजवादी व्यवस्था कायम करने की मुहिम के तहत काम करना प्रारंभ किया। आज भी अपने उद्देश्यों के प्रति पूरी सजगता के साथ आगे बढ़ रही है । यूनियन के सचिव कामरेड प्रकाश क्षत्रिय ने कहा कि हमारा देश जिस तरह तमाम संसाधनों से परिपूर्ण है उस हिसाब से देश की आम जनता को राहत नहीं मिल रही है ,सरकार पूंजीवादी व्यवस्था की पोषक बन चुकी है और पूंजीपतियों के इशारे पर चलते हुए मजदूर वर्ग के विरुद्ध नीतियां बनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि 2014 के बाद आई भाजपा सरकार ने तो हद ही कर दी जब हमारे 44 श्रम कानूनों को समाप्त कर 4 संहिताओं में बदल दिया गया । इसी तरह किसानों के लिए तीन काले कानून भी सरकार ने बनाए, जिसे किसानों ने बड़े आंदोलन के जरिये रद्द करवाया। देश में बेरोजगारी की दर जिस तरह से बढ़ रही है उससे ऐसा प्रतीत होता है आगे आने वाले समय में रोजगार का स्तर और गिरेगा। इसलिए ट्रेड यूनियन लगातार सरकार की नीतियों के खिलाफ संघर्षरत है, उन्होंने कहा कि अब तक हमने देश में दर्जनभर से ज्यादा हड़तालें की और सरकार को मजदूर विरोधी नीतियां बनाने से काफी हद तक पीछे धकेला है। लेकिन यह तभी संभव है जब देश का मजदूर वर्ग किसानों की तरह आंदोलन के लिए तत्पर रहें। यूनियन के कार्यकारी अध्यक्ष ज्ञानेन्द्र सिंह ने कहा कि देश में आज जो हालात है वह पूरी तरह तानाशाही वाले हैं । पिछले कई दशकों में ट्रेड यूनियन ने आंदोलन के जरिए मजदूरों की बेहतरी के लिए जो कानून और सुविधाएं हासिल की थी। उन्हें अब पूंजीपतियों के इशारे पर वर्तमान केंद्र सरकार नष्ट कर रही है, यह सरकार न केवल मजदूर वर्ग पर, बल्कि किसानों और आम जनता पर शोषण के नए-नए तरीके लाद रही है। जिस तरह से सार्वजनिक उद्योगों का निजीकरण हो रहा है उससे रोजगार की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
साथ ही देश में रोजगार कम हो रहा है। अब सार्वजनिक उद्योगों के प्रबंधन भी सरकार के इशारे पर पूंजी परस्त नीतियों को आगे बढ़ा रहे हैं। टुकड़ों टुकड़ों में तमाम विभागों में आउटसोर्सिंग के जरिए ठेका प्रथा को बढाकर नियमित रोजगार को समाप्त किया जा रहा है । हालात यह है कि सेल में ही नियमित कर्मचारियों का आधा अधूरा वेतन समझौता विगत कई वर्षों से लंबित है, इसी तरह ठेका मजदूरों को मिलने वाली वेतन बढ़ोतरी पर तो प्रबंधन चर्चा ही नहीं कर रहा है।इन तमाम हालातों से निपटने के लिए तफौलादी एकता की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सरकार पूरे मजदूर वर्ग और आम जनता को जाति, धर्म, क्षेत्र के नाम पर विभाजन कर रही है । यह बिल्कुल उसी नीति पर चल रही है जो नीति अंग्रेजों ने अपनाई थी फूट डालो शासन करो की नीति कहा जाता है । इसलिए तमाम लोगों को इस बात को समझना होगा कि यह सरकार आम जनता की सरकार नहीं है ।
वर्तमान केन्द्र सरकार तानाशाही आधार पर चल रही है। दिल्ली सरकार के एलजी के पावर को सीमित करने वाले सुप्रीम कोर्ट के आदेश को भी सरकार ने अध्यादेश के जरिए समाप्त कर दिया। इसका मतलब कि सरकार सुप्रीम कोर्ट पर भी हावी होकर संविधान और लोकतंत्र की हत्या कर रही है। इसी तरह महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न के मामले में आरोपी बृजभूषण सिंह एवं संदीप सिंह को बचाया जा रहा है।यह सरकार की दोहरी नीति का परिचय है। इसलिए देश की जनता को समझ लेना चाहिए कि वर्तमान सरकार फूट डालो शासन करो की नीति पर चलकर केवल अपनी सत्ता कायम रखने का इंतजाम कर रही है। जिससे देश की आम जनता, और तमाम मजदूर, बेरोजगार नौजवान और महिलाओं को एक साथ आगे आकर एकजुटता के साथ निरंकुश सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद करनी होगी। उपाध्यक्ष विनोद मिश्रा ने कहा कि स्थानीय स्तर पर छोटी छोटी लड़ाइयों के जरिए हम जो सुविधाएं, वेतन भत्ते में बढ़ोतरी हासिल करते हैं, उन पर भी भविष्य में कैंची चलने वाली है । दुर्भाग्य की बात है कि पूरे देश के अंदर में कुछ ऐसी ट्रेड यूनियन कार्यरत हैं जो मजदूर हितैषी होने का मुखौटा पहनकर, सरकार प्रबंधन और ठेकेदारों का समर्थन करती है। उनकी शाखाएं दल्ली राजहरा में भी है और यहां पर भी उनका यह काम निर्बाध रूप से जारी है । इसलिए सबको पूरी सतर्कता और मजबूती के साथ श्रमिक आंदोलन को आगे बढ़ाना होगा, तभी हम मजदूरों की रक्षा में सफल हो पायेंगे। सीटू अपने स्थापना से आज तक लगातार पूरे देश के अंदर ट्रेड यूनियनों, विभिन्न संगठनों, मजदूरों की एकता कायम करने के लिए प्रयासरत है और दिशा में हमें काफी हद तक सफलता भी मिली है। बड़े-बडे राष्ट्रीय आंदोलनों के जरिए सरकार को हमने कई अवसरों पर पीछे धकेलने का काम किया है। यदि हमारी एकता और तेजी के साथ बढ़ती है, तो निश्चित रूप से सरकार से निपटने में सक्षम होंगे।
इस कार्यक्रम में मान सिंह कनवर, उमेश दंडाले, सुजीत मुखर्जी, आलोक श्रीवास्तव, इंद्रदमन,शशि, सुजीत मंडल बृजमोहन, नकुल, भोजराज साहू, जसवंत ,प्रशांत त्रिवेदी, विजय शर्मा सहित सैकड़ों नियमित व ठेका कर्मचारी उपस्थित रहे ।