प्रकृति से प्रेम करें,, प्रकृति का संवर्धन करें,, और वर्षा ऋतु में प्रकृति के नए सृष्टि का स्वागत करें ,,यही है सावन में झूला झूलने की परंपरा,, संत श्री राम बालक दास,,
प्रकृति से प्रेम करें,, प्रकृति का संवर्धन करें,, और वर्षा ऋतु में प्रकृति के नए सृष्टि का स्वागत करें ,,यही है सावन में झूला झूलने की परंपरा,, संत श्री राम बालक दास,,
प्रतिदिन की भांति आज भी ऑनलाइन सत्संग का आयोजन संत श्री राम बालक दास जी के द्वारा उनके व्हाट्सएप ग्रुप में किया गया जिसमें संत श्री के द्वारा उनके भक्त जनों की जिज्ञासाओं का समाधान प्रस्तुत किया गया
आज के सत्संग परिचर्चा में डुबोवती यादव कुनकुरी ने जिज्ञासा रखी की
नाना भांति राम अवतारा।
रामायण सतकोटि अपारा।।
कलप भेद हरिचरित सुहाए।
भांति अनेक मुनी सन्हगाए।।
देव देव महादेव लोकस्यास्य हितेरत।
सुराणां प्रतिपातेन प्रसाद कर्तुमहसि ।। इस प्रसंग पर प्रकाश डालने की कृपा हो भगवन, बाबा जी ने बताया कि गोस्वामी तुलसीदास जी किसी भी तरह का भ्रम नहीं पालना चाहते हैं क्योंकि रामचरितमानस की इतनी कथाएं प्रचलित है और कई तरह से उसे लिखा भी गया है रामायण भी कई प्रकार से उपलब्ध है, जैसे कम्ब रामायण,आनंद रामायण, कन्नड़ रामायण,वाल्मीकि रामायण, जैन रामायण, वशिष्ठ रामायण, आध्यात्म रामायण, तुलसीकृत रामायण इन सभी रामायण में कई प्रसंगों में मतभेद दिखाई देता है
इसीलिए भगवान के चरित्र अपार है ऐसा सोच कर हमें किसी प्रसंग पर शंका नहीं करना चाहिए क्योंकि रामायण 100 करोड़ मंत्रों का है भगवान शंकर ने इसे बांट दिया था कई कल्प में कई तरह की लीलाएं भगवान ने अपने भक्तों को प्रसन्न करने के लिए की इसलिए उनकी लीला विभिन्न है और उनकी कथाएं भी, कहीं-कहीं तो हम देखते हैं कि संत महात्मा भी अपने आनंद के अनुसार भगवान के कथा का पठन-पाठन करते हैं
प्रेमचंद्र जी ने जिज्ञासा रखी की भगवान कृष्ण और राधा रानी के सावन झूला लीला के महत्व पर प्रकाश डालने की कृपा हो,बाबा जी ने बताया कि जिस तरह से हमारे घर में कोई शिशु आता है और हम उत्साह मनाते हैं तो सोचिए जब सृष्टि में नभचर, जलचर, बीज,फूल,पुष्प पत्ते अंकुरित होकर निकलते हैं और नवीन सृष्टि का निर्माण होता है तो वह कितने प्रसन्न होती होगी,और इस नवजीवन के संचार से पूरी प्रकृति आनंदित हो जाती है, ऐसे आनंद के अवसर पर भगवान श्री कृष्ण ने झूला उत्सव को प्रारंभ कर बताया कि प्रकृति के साथ ही घुलो मिलो, बगीचे में जाओ हरियाली का दर्शन करो बागों में जाओ उनके लिए भी समय निकाल और उनके साथ समय व्यतीत करो इस तरह से हम अपने जीवन में प्रकृति का आनंद लेते हैं और जीवन भी प्रकृतिमय बना लेते है और सुंदर आनंदित जीवन का अनुभव कर मन मस्तिष्क को स्वस्थ बनाते हैं और बाबा जी की सु मधुर भजन "चन्दन का पलना...." के साथ आज के सत्संग संपन्न हुआ
जिन्हें भी प्रतिदिन ऑनलाइन सत्संग में जुड़ने की इच्छा हो तो वह पाटेश्वर धाम के मोबाइल नंबर
94255 10729 पर अपना नाम पता लिखकर भेजें सत्संग में उनका नंबर जोड़ दिया जाएगा
जय गौमाता जय गोपाल जय सियाराम