ईश्वर प्राप्ति के लिए बोझ रूपी पत्थरों का त्याग आवश्यक - राजयोगिनी सरोज दीदी जी

ईश्वर प्राप्ति के लिए बोझ रूपी पत्थरों का त्याग आवश्यक - राजयोगिनी सरोज दीदी जी

ईश्वर प्राप्ति के लिए बोझ रूपी पत्थरों का त्याग आवश्यक - राजयोगिनी सरोज दीदी जी

ईश्वर प्राप्ति के लिए बोझ रूपी पत्थरों का त्याग आवश्यक - राजयोगिनी सरोज दीदी जी

18 जुलाई 2022, बिलासपुर। पूजा में तीन चीजों का महत्व होता है। फल, फूल और दीपक का। जब हम मंदिर में ईश्वर पर फल चढ़ाते हैं तो वह फल कभी भी कटा, छटा, दागी वाला नहीं चढ़ाते। साफ, स्वस्थ और साबुत फल ही चढ़ाते हैं। तो हमें भी यह चेक करना है कि हम भी भगवान के बगीचे के फल है तो हमें माया रूपी चिड़िया ने झूठा तो नहीं कर दिया है! हमारे अंदर भी कोई लगाव-झुकाव या कोई बुराई तो नहीं है। ईश्वर पर जब फूल चढ़ाते हैं तो फूल भी ताजा, स्वच्छ और जो किसी ने सुंघा भी ना हो ऐसे फूल चढ़ाते हैं। तो हम भी भगवान की फुलवारी के सुन्दर फूल है किसी भी प्रकार से माया का आकर्षण अपनी तरफ आकर्षित न किया हो। 
कोई हमारी विशेषताओं की महिमा करें, कोई हमारे रूप-रंग की महिमा करें और हम उससे प्रभावित हो जाये तो भगवान पर चढ़ने लायक फूल नहीं है। और साथ में ही कभी भी भगवान के सामने बुझा हुआ दीपक नहीं रखते हैं, हमेशा जलता हुआ दीपक रखते हैं तो हमें भी ज्ञान रूपी घृत से आत्म ज्योत जगा कर रखनी है।
उक्त वक्तव्य प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की स्थानीय शाखा टेलीफोन एक्सचेंज रोड स्थित राजयोग भवन में आयोजित एक दिवसीय विशेष योग साधना के अवसर पर उत्तर प्रदेश कासगंज से पधारी राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी सरोज दीदी जी ने कहा। दीदी जी ने बताया कि जब हम ईश्वर को प्राप्त करना चाहते हैं तो हमें अपने मन के सारे बोझ रूपी पत्थर को उतार फेंकना होगा। अगर किसी भी प्रकार का बोझ होगा तो हम ईश्वर के समीप पहुंच नहीं सकते। विशेष चार प्रकार के पत्थर रूपी बोझ लेकर हम निरंतर चलते रहते हैं। पहला अहंकार रूपी पत्थर दूसरा मेरे-मेरे के अभिमान का पत्थर तीसरा पुराने स्वभाव-संस्करों का पत्थर और चौथा इच्छाओं रूपी बोझ का पत्थर। जब तक ये चार पत्थर उतार कर नहीं फेकेंगे तब तक भगवान के मिलन का सुख नहीं पा सकते। हम सब भगवान को तो मानते है पर भगवान की नहीं मानते। भगवान कहते है सब सौप दो प्यारे प्रभु को, सब सरल हो जाएगा।
उससे पहले राजयोग भवन संचालिका बीके स्वाति दीदी ने बताया की कासगंज से पधारी राजयोगिनी सरोज दीदी जी 7 वर्ष की बाल्यावस्था में ही संस्था की प्रथम मुख्य प्रशासिका आदरणीय जगदंबा सरस्वती जी के जीवन को देखकर इतनी प्रभावित हुई थी कि अपना जीवन भी उन जैसा बनाने का संकल्प कर लिया। संस्था के संस्थापक प्रजापिता ब्रह्मा बाबा और मम्मा की पालना में पलते हुए भारत के विभिन्न स्थानों पर सेवाएं प्रदान करते हुए 1980 से कासगंज उत्तर प्रदेश की सेवाएं कर रही है। कासगंज से पधारी करुणा दीदी, सीमा बहन, नीरज बहन ने भी सभी ब्रह्माकुमार भाई बहनों को ज्ञान और योग से भरपूर किया।
ईश्वरीय सेवा में,
बीके स्वाति
राजयोग भवन, बिलासपुर
9827956485

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