मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम समदर्शी एवं न्याय सील राजा होने के साथ-साथ एक आदर्श मित्र : संतराम बालक दास
*मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम समदर्शी एवं न्याय सील राजा होने के साथ-साथ एक आदर्श मित्र : संतराम बालक दास*
प्रतिदिन की भांति ऑनलाइन सत्संग का आयोजन आज भी पाटेश्वर धाम के संत श्री बाल योगेश्वर राम बालक दास जी के द्वारा उनके व्हाट्सएप ग्रुप सीता रसोई ,,मे किया गया।
आज के सत्संग में बाबा जी ने बताया कि भगवान और भक्त की कथा अपार है, जिसे कितने भी बार सुनो आनंद ही आनंद आता है,साथ ही साथ भक्त और भगवान की कथा कहने और सुनने में आनंद दुगना ही होता है इसलिए प्रतिदिन हमें गीता और रामायण का पाठ करना ही चाहिए जिसमें आज के सत्संग परिचर्चा में डुबोवती यादव जी ने जिज्ञासा रखी थी
पद पखारि जलु पान
करि आपु सहित परिवार।
पितर पारु करि प्रभुही
पुनि मुदित गयउ लेइ पार
इस प्रसंग पर प्रकाश डालने की कृपा हो, बाबा जी ने बताया कि यहां श्री राम के परम भक्त निषाद राज केवट का प्रसंग है, जिसमें मुख्य रुप से दो तीन बातें हैं वैसे तो केवट जी का प्रसंग इतना मनोरम आनंददायक है जिसे सुनना और सुनाना चाहिए,लेकिन हां संक्षिप्त वर्णन है जब केवट जी ने श्री राम जी के चरण धो लिए और सबको बुलाकर चरणामृत पान कराया, तो उनके मन में एक इच्छा जगी की यह जो पूण्य प्रताप है वह क्या मेरे कर्मों के कारण है,इसमें कुछ ना कुछ तो प्रारब्ध होगा, मेरे पुरखों का भी योगदान होगा,जिनके पुण्य कर्मों के कारण मुझे आज यहां सब कुछ प्राप्त हुआ है, और भविष्य में शिक्षा भी प्रदान करनी थी कि हम पितृ ऋण, मातृ ऋण, पीतर ऋण को भी मुक्ति प्रदान करनी है, तब केवट ने भगवान श्रीराम से विनती की कि हम छोटी जाति के होने के कारण कोई हमारे पितरों का तर्पण करने नहीं आता, आप तो सर्व ज्ञानी परमपिता परमात्मा है आप हमारे पितरों का तर्पण करिए तब भगवान श्री राम और लक्ष्मण ने स्वयं मंत्र बोले और निषाद राज ने अपने पितरों का तर्पण किया।
रामफल जी ने जिज्ञासा रखी की, "ब्रह्मानंद मगन कपि सब के प्रभु पद प्रीति। जात न जाने दिवस तिन्ह।गये मास षट बीति।। "इस पर प्रकाश डालने की कृपा हो, बाबा जी ने भाव को स्पष्ट करते हुए बताया कि बालकांड में भगवान श्रीराम ने अपने माता पिता अपने भाई बहनों और नगर वासियों को वही प्रेम और ब्रह्मानंद दिया जो आज वह वानर भालू को दे रहे हैं,भगवान राम जब लंका विजय होकर लौटते हैं तो वानर भालूयों से ऋषि वशिष्ठ को मिलाया,और उनका परिचय कराते हुए भगवान श्रीराम ने कहा कि हे गुरुदेव यह वही वानर भालू है जिनके बल से मैंने लंका नरेश रावण को हराया, भगवान ने हनुमान हो सुग्रीव हो या वानर भालू सभी के लिए रहने खाने की सुंदर व्यवस्था कराई और 6 महीने तक वे इस तरह से ब्रह्ममानंद में रमकर अयोध्या में समय व्यतीत किए वह समय कैसे बीता उन्हें भी ज्ञात नहीं हुआ सुबह सरयू में स्नान करना, शोभायमान वस्त्र और सुंदर स्वादिष्ट भोजन की व्यवस्था फिर दरबार में उनके लिए सुनियोजित स्थान हमेशा ही होता था,और वहां बैठकर राज्य व्यवस्था को भी देखा करते और भगवान श्री राम उनके लिए हास्य विनोद का समय भी निकाल लिया करते थे, आम के बगीचे में भरत के साथ बैठकर हनुमान जी की प्रतिदिन की राम कथा सुनना उनका परमआनंद कार्य होता था
इस प्रकार आज का ऑनलाइन सत्संग संपन्न हुआ
जय गौ माता जय गोपाल जय सियाराम
ऑनलाइन सत्संग में जुड़ने हेतु पाटेश्वर धाम के मोबाइल नंबर 94255 10729 पर अपना नाम पता लिखकर भेजें