गुरु वो है जो आत्मा को परमात्मा से जोड़े ,,,, संत लाल साई

गुरु वो है जो आत्मा को परमात्मा से जोड़े ,,,, संत लाल साई

गुरु वो है जो आत्मा को परमात्मा से जोड़े ,,,, संत लाल साई

गुरु वो है जो आत्मा को परमात्मा से जोड़े ,,,, संत लाल साई 

गुरु पूर्णिमा  पर्व देशभर में हर्षो उल्लास के साथ मनाया गया शिष्य ने अपने गुरु की पूजा अर्चना की इसी इसी कड़ी में झूलेलाल मंदिर झूलेलाल  नगर चकरभाटा में भी गुरु पूर्णिमा उत्सव हर्षो उल्लास के साथ मनाया गया
कार्यक्रम सुबह 8:00 बजे भगवान झूलेलाल, बाबा गुरमुखदास जी की मूर्ति को संत लाल साई जी के द्वारा पंचामृत से स्नान कराया गया नए वस्त्र व आभूषण धारण कराये गए , पूजा अर्चना, व आरती की गई  भोग लगाया गया।
10:00 से 12:00 तक नामदान की दीक्षा दी गई हजारों की संख्या में भक्तजनों ने नाम दान , दीक्षा गृहण की
 दोपहर 12 कार्यक्रम की शुरुआत भगवान झूलेलाल बाबा गुरमुख दास जी की मूर्ति पर माल्यार्पण कर व बहराणा  साहब की अखंड ज्योत प्रज्वलित करके की गई12:00 बजे से दोपहर 3:00 बजे तक सत्संग कीर्तन की अमृत वर्षा हुई इस अवसर पर भोपाल से आए कलाकार शुभम नथानी एवं कटनी से आकाश म्यूजिकल पार्टी के द्वारा भक्ति भरे भजनों की शानदार प्रस्तुति दी गई संतलाल साई  जी के द्वारा अपनी अमृतवाणी से  गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर कहा कि  गुरु और शिष्य का नाता पिता और पुत्र जैसे पवित्र रिश्ता होता  है, गुरु वो  होता है जो अपने शिष्य  को  सत्य मार्ग दिखाएं, आत्मा को परमात्मा से मिलाएं, भक्ति मार्ग पर ले जाए और यह ऐसा मार्ग है जिस पर चलकर आप परम ज्ञान को भी प्राप्त कर सकते हैं सच्चा गुरु वही है ।
 आज के इस पावन अवसर पर और  हर किसी को गुरु बनाना चाहिए नाम दान की दीक्षा लेनी चाहिए पर गुरु उसे बनाएं जो आपको भगवान से मिलाए , भक्ति का मार्ग दिखाएं ऐसे गुरु से नामदान की दीक्षा लेनी चाहिए आप बड़े भाग्यशाली हैं आज के इस पवित्र दिन में पवित्र नगरी में पवित्र स्थान में बैठे हैं साईं जी ने कहा जैसे भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को अपना शिक्षय माना और  कैसे इस महाभारत में अर्जुन को बचाए रखा उसका मार्गदर्शन किया और अपना विराट रूप दिखाया पूरे महाभारत में उसे विजय दिलाई गुरु ज्ञान का खजाना होता है शिष्य का काम है कि वह उस खजाने को कैसे प्राप्त करें  इस अवसर पर साई जी ने एक ज्ञानवर्धक कथा सुनाई की एक गांव में भोला नाम का एक गरीब व्यक्ति रहता था झोपड़ी में रहता था छोटा सा घर था खाट पर सोता था एक टाइम खाना खाने को मिलता था हमेशा भगवान से प्रार्थना करता था प्रभु मेरे कष्ट हरो, मेरे दिन को बदलो।
उसे झोपड़ी मैं उसके घर के अंदर जिस खाट में व सोता था उसके के नीचे में खजाना दबा हुआ पड़ा था और उसे पता नहीं था और भगवान से हर दिन गरीबी दूर करने के लिए कहता था एक दिन वह  दूसरे गांव को निकला तो रास्ते में एक महापुरुष महान ज्ञानी मिले उसके चरणों में गिर पड़ा और अपनी सारी व्यथा बताई महापुरुष महान ज्ञानी ने कहा ठीक है कल मैं तुम्हारे घर आऊंगा दूसरे दिन महापुरुष महान ज्ञानी भोला के घर पहुंचा और जैसे ही पहला  कदम उसकी झोपड़ी के अंदर रखा उस महापुरुष को समझ में आ गया कुछ न कुछ यहां पर अनमोल खजाना जरूर है और वहां से अच्छे वाएबरशन  आने लगे जैसे ही उस महापुरुष की नजर खाट पर पड़ी उन्होंने आंखें बंद कि वह अपने ब्रह्म ज्ञान से जान लिया कि इस खाट के नीचे जमीन के अंदर सोने का घड़े में हीरे मोतियों से भरा हुआ खजाना दबा पड़ा है उसने भोला को कहा  इस खाट को हटाओ ओर  इसके अंदर में सोने से घड़े में बड़ा  खजाना दबा पड़ा है भोला को यकीन नहीं हो रहा था पर महापुरुष की बातें हैं झूठी नहीं हो सकती उसने तुरंत खड्डा खोदना  शुरू किया 5 फीट के बाद ही उसे सोने का घड़ा हीरे मोतियों से भरा हुआ मिला खुशी के मारे रोने लगा इतना बड़ा खजाना मेरे घर में मेरी खाट के नीचे पड़ा था व मुझे पता नहीं था और मैं गरीबी  में जी रहा था
वह उस महापुरुष उस ज्ञानी के चरणों में गिर पड़ा और कहा आपने मेरी आंखें खोल दी व इस गरीब को करोड़पति बना दिया उस महापुरुष ने कहा भोला अपने संस्कार अपनी मर्यादा और अपने सत्य कर्म को कभी मत  छोड़ना  पैसा आएगा जाएगा लेकिन यह कर्म  हमेशा साथ में रहेंगे और सबसे पहली बात प्रभु का नाम जपना कभी भूलना मत
इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है हमारे अंदर में भी भगवान विराजमान हैं हमारे अंदर में भी खजाना भरा पड़ा हुआ है पर उस खजाने को बताने के लिए, भगवान तक पहुंचाने के लिए उस गुरु की जरूरत है उस महापुरुष की जरूरत है जो हमें  अंदर तक खजाने की जानकारी दें
जैसे दिया तले अंधेरा होता है वही हालत हम इंसानों की भी है जब तक हम गुरु के बताए मार्ग पर नहीं चलेंगे तब तक हमें भी खजाने की प्राप्ति नहीं होगी
साईं जी एवं वरुण साईं ने कई भक्ति भरे भजन गाए

गुरु शिष्य का नाता अनमोल है इसमें न कोई खोट है


बाबा गुरमुखदास की धरती बड़ी महान है जिसमें हम लोग आज यहां विराजमान हैं


जो झूलेलाल का दीवाना है वह नाच के तो दिखाए और जिस नाचना नहीं आता है वह ताली तो बजाए  

साईं  झूलेलाल मुहंजो  आहे


लाल झूले लाल झूले लाल

ऐसे  भजन गाऐ  जिसे सुनकर भक्तजन झूम उठे

भक्तों के द्वारा संत लाल साई  जी पूज्य माता साहिब जी भाभी मां का चरण गंगा जल और दूध से धो  गए ,फूल अर्पण किए गए, चरण पादुका पहनाई गई, माथे पर तिलक चंदन लगाया गया, फूलों की माला पहनाई गई, आरती की गई व आशीर्वाद लिया गया.
पूज्य सिंधी पंचायत चकरभाठा के अध्यक्ष प्रकाश जेसवानी  व साधु वासवानी मिशन छत्तीसगढ़ इकाई के संरक्षक समाजसेवी डॉ रमेश कलवानी के द्वारा भी आए हुए सभी भक्तों को गुरु पूर्णिमा की बधाइयां दी गई व इस अवसर पर एक लघु कथा सुनाई. कार्यक्रम के आखिर में आरती, अरदास की गई, विश्व कल्याण के लिए प्रार्थना की गई ,पल्लो पाया गया, प्रसाद वितरण किया गया, आम भंडारे का आयोजन किया गया बड़ी संख्या में भक्तजनों भंडारा  ग्रहण कर अपनी आत्मा और शरीर को तृप्त किया.
शाम 5:00 बजे बहराणा साहिब  ढोल बाजे के साथ मंदिर से निकल कर तलाब पहुंचे विधि विधान के साथ साई  जी के द्वारा बहराणा साहिब का विसर्जन किया गया व ज्योत को प्रावाहित  किया गया
इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में भक्तजन बिलासपुर, चकरभाटा, रायगढ़, भाटापारा, दुर्ग, भिलाई ,राजनदगांव ,गोंदिया, नागपुर, कटनी,  भोपाल अलग-अलग प्रदेशों से कई शहरों से भक्तजन पहुंचे थे अपने गुरु के  दर्शन किए अपने जीवन को सफल बनाया इस पूरे आयोजन का सोशल मीडिया के माध्यम से सीधा प्रसारण किया गया हजारों की संख्या में भक्तों ने घर बैठे आज के कार्यक्रम का आनंद लिया।
इस पूरे आयोजन को सफल बनाने में बाबा गुरमुख दास  सेवा समिति ,श्री झूलेलाल महिला सखी  सेवा ग्रुप के सभी सेवादारों का विशेष सहयोग रहा।


श्री विजय दुसेजा जी की खबर 

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