सतयुग में संत व सत्संग का मिलना बहुत कठिन था ,, साई कृष्ण दास

सतयुग में संत व सत्संग का मिलना बहुत कठिन था ,, साई कृष्ण दास

सतयुग में संत व सत्संग का मिलना बहुत कठिन था ,, साई कृष्ण दास

सतयुग में संत व सत्संग का मिलना बहुत कठिन था ,, साई कृष्ण दास 

बाबा आनंद राम दरबार के संत साईं कृष्णदास एकादशी वाले बलराम भैया जी के द्वारा सत्संग की अमृत वर्षा हुई
सत्संग की शुरुआत भगवान राधा कृष्ण भगवान झूलेलाल साईं बाबा जी की मूर्ति पर माला अर्पण कर दीप प्रज्वलित करके की गई।
सत्संग में साई कृष्ण दास जी ने फरमाया कि बड़े भाग्यशाली हैं आप लोग की आप लोगों को संत और सत्संग दोनों का लाभ और दर्शन आसानी से हो रहे हैं सतयुग में तो संत भी बहुत परिश्रम करने के बाद मिलते थे तब दर्शन होते थे और सत्संग का लाभ भी जल्दी नहीं मिल पाता था लोग गुरु बनाने के लिए जंगलों में जाते थे ऋषि मुनि के आश्रम में बच्चों को बाल अवस्था में छोड़ कर आते थे और युवावस्था में वापस घर आते थे संत भी हर किसी को अपना शिक्षय नहीं बनाता था घोर परीक्षा लेने के बाद ही गुरु दीक्षा दी जाती थी जैसे-जैसे वक्त बिता कलजुग आया तो भगवान ने आप लोगों के लिए संत को आप लोगों के बीच ही भेज दिया ताकि आप लोगों को ओर कहीं जाने की जरूरत ना पड़े वह सत्संग भी अब आपके घर के आसपास से ही होते रहते हैंं
। सत्संग की महिमा अपरंपार है जो समझे वह ज्ञानी जो ना समझे वह अज्ञानी सत्संग में आकर सत्संग श्रवण करने से आपको कई यज्ञ का फल प्राप्त हो जाता है अगर आप एक बार भी भगवान का नाम लेते हैं राम सीता राम राधे कृष्णा श्री हरि तो आपके कई पाप ऐसे ही खत्म हो जाते हैं प्रभु नाम की कमाई करें जिस तरह आप पैसे की कमाई करते हैं बैंकों में जमा करते हैं ओर तीजोड़ियों में रखते हैं ताला लगाकर उसी तरह आप प्रभु नाम की कमाई करें एक बैंक बनाएं जिसमें प्रभु नाम की कमाई करके जमा करते जाएं वह बैंक है भक्ति का सिमरन का जितनी देर आप प्रभु का नाम जप आओगे उतना बैलेंस आपका बड़ते जाएगा और उस बैलेंस को ना कोई चोर चोरी कर सकता है और ना ही कोई उसे लूट सकता है और वह बैलेंस आपके इस लोक के साथ-साथ परलोग में भी आप लोगो के काम आएगा
 8400000 योनियों के बाद मानव जीवन मिला है तो सिर्फ खाने पीने के लिए कमाने के लिए घूमने के लिए मौज मस्ती करने के लिए नहीं मिला है बल्कि सत्य कर्म करने के लिए मिला है सत्संग में जाने के लिए मिला है भक्ति सिमरन करने के लिए भी मिला है वक्त हाथ से फिसलता जा रहा है अंत समय में पछताने से क्या फायदा जब चिड़िया चुग गई खेत इसीलिए अभी से ही भक्ति की नाम की कमाई करना शुरू कर दें कार्यक्रम में कई भक्ति भरे भजन गाए इसे सुनकर भक्तजन झूम उठे

राम आयो श्याम आयो आयो गायू न जो गोपाल आयो 


गोपाल राधा कृष्ण गोविंद गोविंद


प्रभु आपकी कृपा से सब काम हो रहे हैं करते तुम कन्हैया नाम मेरा हो रहा है

सब कुछ दिया है तूने मालिक तेरा शुक्रिया है तेरा शुक्रिया है
कार्यक्रम का आखिर में अरदास की गई पल्लो पाया गया प्रसाद वितरण किया गया एवं आए हुए सभी भक्त जनों के भंडारा ग्रहण किया गया कार्यक्रम को सफल बनाने में बाबा आनंद राम सेवा समिति व मोटवानी परिवार के सभी सदस्यों का विशेष सहयोग रहा।


श्री विजय दुसेजा जी की खबर 

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