नाले अलख जे बेड़ो तार मुंहंजो संत कवर राम साहिब
सिंध के सरताज संत कंवर राम साहिब जी का 137 वां अवतरण "दिवस हिंद से लेकर सिंध तक बड़े ही हर्षो उल्लास व श्रद्धा भक्ति के साथ मनाया गया
संत भक्त कंवर राम साहेब सेवा समिति के द्वारा सिंधी कॉलोनी में सुबह 9:00 बजे भक्त कवर राम साहेब जी के फोटो पर माला अर्पण कर दीप प्रज्वलित करके कार्यक्रम की शुरुआत की गई इस अवसर पर भाई साहब अमर रूपानी के द्वारा अरदास की गई विश्व कल्याण के लिए पल्लो पाया गया उपस्थित सभी लोगों ने भक्त कवर राम साहिब जी को याद किया वह संस्था के अध्यक्ष रमेश महेर चंदानी ने उनके जीवन के बारे में प्रकाश डाला उन्होंने बताया कि भक्त कवर राम साहिब जी का जन्म सन् 1885 मैं ग्राम जरवार जिला सखर सिंध में हुआ
वह बहुत गरीब थे बचपन में ही उनकी मां ने उन्हें कोहर बनाकर देती थी और वह बाजार में जाकर गली गली में बेचते थे कवर के कोहर ले लो कवर के कोहर
एक दिन ऐसे ही गली में जा रहे थे बोलते हुए कवर के कोहर ले लो एक घर में साईं सतराम दास सत्संग कर रहे उनके कानों में भक्त कंवर राम साहेब की मीठी सी आवाज पहुंची उन्होंने अपने भक्तों को कहा जाकर बाहर देखो कौन कोहर् बेच रहा है उसको मेरे पास लेकर आओ भक्त बाहर गया और कवर को लेकर आया साईं सतराम दास ने कहा बेटा कवर थोड़े से कोहर हमको भी दे दो पर हमारे पास पैसे नहीं है तुम्हें देने के लिए कवर ने बड़े ही प्यार से कहा साईं पैसे की क्या बात है
नाले अलख जे बेड़ो पारकर मुहंजो
एक भक्त की आवाज उसके गुरु संत के पास पहुंच गई और चमत्कार हुआ कुछ ही समय बाद जो मृत बच्चा था वह रोने लगा किलकारियां करने लगा वह जिस मां का बच्चा मृत्य था वह पहुंची और खुशी के मारे भक्त कवर राम साहेब के पैरों में गिर गए वह माफी मांगने लगी कि मुझे पता था कि मेरे बच्चे को आपके अलावा और कोई भी जीवित नहीं कर सकता है आपने मेरे बच्चे को नया जीवन दे दिया है खुशी के मारे जोर-जोर से बताने लगी कि मेरे मरे हुवे बच्चे को संत कवर राम जी ने जिंदा कर दिया
बड़े ही सीधे-साधे सरल स्वभाव के संत थे कभी भी किसी का दिल नहीं दुखाते थे 1 दिन ट्रेन से जा रहे थे दूसरे शहर उस समय अविभाजित भारत देश में आजादी की लड़ाई चरम पर थी देश आजाद होने वाला था लेकिन अंग्रेजों ने फूट डालो राज करो की नीति अपना कर रखी थी जिसके कारण हिंदू मुस्लिमों में दंगे जगह-जगह हो रहे थे संत कंवर राम साहेब सभी धर्मों को एक करके आपसी भाईचारा प्यार की मिसाल पेश कर रहे थे कुछ असामाजिक तत्व को यह पसंद नहीं आया और वह संत कवर राम साहेब जी को मारने के लिए ट्रेन में चढ़ गए और जाकर उनसे आशीर्वाद लिया कि आज हम जो काम करने आए हैं वह काम हमारा सफल हो हमें आशीर्वाद दीजिए भक्त कवर राम साहिब जी को पता था कि यह मुझे मारने आए हैं उसके बाद भी उन्होंने आशीर्वाद दिया उन्हें खाली नहीं भेजा और कुछ पलों बाद में असामाजिक तत्वों ने उन्हें गोली मार दी
सच्चे संत के निशानी ही अलग होती है उसकी सूरत नूरानी होती है उनकी वाणी अमृत तो होती है उनके दर्शन मात्र से ही लोक और परलोक सवर जाते हैं ऐसे सच्चे संत थे भक्त कवर राम साहिब जी कार्यक्रम के आखिर में शरबत वितरण किया गया कोहर वितरण किया गया
इस अवसर पर संस्था के अध्यक्ष के द्वारा नवनिर्वाचित पूज्य सिंधी पंचायत कश्यप कॉलोनी के अध्यक्ष भाई जगदीश जगियासी का फूलों की माला पहनाकर स्वागत किया गया
इस आयोजन को सफल बनाने में
संस्था के अध्यक्ष रमेश मेहर चंदानी प्रताप आयलानी महेश दुलानी हरीश भगवानी हुंद राज मोटवानी खुशाल वाधवानी महेश पमनानी श्रीचंद दया लानी बृजलाल भोजवानी हुंदराज केम रानी मोहन मदवानी रूपचंद हिरवानी कमल बजाज बंशीलाल पंजवानी
विजय दुसेजा श्याम हरियानी बबलू मूलचंदानी गोपी ठारवानी मोती मखीजा डॉ हेमंत कलवानी जगदीश जगियासी डीडी आहूजा एल्डरमैन श्याम लाल चंदानी मनीष लोहरानी सतीश लाल पार्षद विजय यादव हरिकिशन गंगवानी परमानंद गिद्ववानी
एवं अन्य लोगों का विशेष सहयोग रहा
श्री विजय दूसेजा जी की खबर